मिट्टी की सेहत बचाने को आगे आए पद्म पुरस्कार विजेता किसान
उर्वरक विभाग ने देश भर के आठ पद्म पुरस्कार विजेता प्रगतिशील किसानों के साथ मिलकर मिट्टी की सेहत सुधारने और संतुलित खाद इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए एक खास बैठक का आयोजन किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'धरती मां को बचाओ' अभियान के तहत यह पहल की गई। किसानों ने जैविक खेती, प्राकृतिक खाद और फसल विविधता पर जोर देते हुए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
देश की मिट्टी की सेहत को बचाने के लिए सरकार ने एक अनोखी पहल की है। उर्वरक विभाग ने 13 फरवरी को शास्त्री भवन में देश भर के आठ पद्म पुरस्कार विजेता किसानों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक का मकसद था - मिट्टी की सेहत सुधारना और किसानों को संतुलित खाद इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करना। यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'धरती मां को बचाओ' अभियान का हिस्सा है। रसायन और उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा के नेतृत्व में यह योजना आगे बढ़ाई जा रही है।
विभाग सचिव ने बताई चिंता
बैठक की अध्यक्षता उर्वरक विभाग के सचिव राजत कुमार मिश्र ने की और उन्होंने किसानों का स्वागत करते हुए कहा कि उनका अनुभव और मार्गदर्शन विभाग के लिए बेहद कीमती है। श्री मिश्र ने कहा, "किसानों तक सही जानकारी समय पर पहुंचाना बहुत जरूरी है। अगर हम मिट्टी की सेहत बचाना चाहते हैं तो यह सबसे पहला कदम है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि असंतुलित खाद के इस्तेमाल से मिट्टी की सेहत लगातार खराब हो रही है। विशेषज्ञों के सुझावों को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया जा सकता है।
किसानों ने दिए कई सुझ
पद्म पुरस्कार विजेता उमाशंकर पांडे ने "जहर मुक्त खेती स्कूल" शुरू करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि इन स्कूलों के जरिए किसानों को टिकाऊ खेती के तरीके सिखाए जा सकते हैं। उन्होंने सभी राज्यों में विभाग के साथ काम करने की इच्छा जताई। राम शरण वर्मा ने फसल बदल-बदल कर उगाने (क्रॉप रोटेशन) पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "मिट्टी की सेहत बनाए रखने के लिए संतुलित खाद का इस्तेमाल बहुत जरूरी है। किसानों की यह सोच बदलनी होगी कि ज्यादा खाद डालने से ज्यादा फायदा होगा।" उन्होंने हरी खाद को बढ़ावा देने और खाद की थैलियों के आकार को ठीक करने की सलाह दी।
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भारत भूषण त्यागी ने फसलों में विविधता लाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि गांव स्तर पर कंपोस्ट की उपलब्धता होनी चाहिए। उनका संदेश था - "फसल अवशेष समृद्धि की नींव है" और यह बात हर किसान तक पहुंचनी चाहिए। सेठ पाल सिंह ने कहा कि कई बार खाद कंपनियां ज्यादा बिक्री के लिए दबाव बनाती हैं। खेत के लिए कितनी खाद चाहिए, इसका सही अनुमान लगाना जरूरी है। किसानों को संतुलित इस्तेमाल के बारे में व्यवस्थित तरीके से जानकारी देनी चाहिए।
गौशालाओं को खाद केंद्र बनाने का सुझाव
कंवल सिंह ने एक अनोखा सुझाव देतें हुए कहा कि गौशालाओं को जैविक खाद बनाने की इकाइयों में बदला जा सकता है। जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए क्लस्टर बनाए जा सकते हैं। उन्होंने स्वास्थ्य के लिहाज से अच्छी खेती पर जोर दिया और प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को सही मार्गदर्शन देने की बात कही। चंद्रशेखर सिंह ने जैविक उत्पादों की सख्त जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं को सही जानकारी मिलनी चाहिए। गाँव स्तर पर किसान उत्पादक संगठन के जरिए जागरूकता अभियान चलाने की सिफारिश की गई।
पारंपरिक तरीकों की अहमियत
नेक राम शर्मा ने उन आदर्श किसानों की पहचान करने पर बल दिया जो धरती की रक्षा में मिसाल पेश कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जंगल बचाना खेती के लिए जरूरी है। उन्होंने बताया कि नौ तरह के अनाज इस्तेमाल करने वाली पारंपरिक नवग्रह पूजा फसल विविधता का प्रतीक है और इसे प्रोत्साहित करना चाहिए। श्याम सुंदर पालिवाल ने मिट्टी की ताकत वापस लाने के लिए प्राकृतिक खेती के तरीकों का समर्थन किया। उन्होंने ग्राम पंचायत स्तर पर प्राकृतिक खाद बनाने के संयंत्र लगाने का सुझाव दिया। बैठक में शामिल सभी लोगों ने कहा कि गांव स्तर पर खाद और उर्वरक की स्थानीय उपलब्धता होनी चाहिए। इससे किसान संतुलित और जिम्मेदार इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित होंगे।
तीन बातों पर हुई सहमति
बैठक के अंत में तीन महत्वपूर्ण बातों पर सहमति बनी:
-पहला, संतुलित खाद का इस्तेमाल बढ़ाना जरूरी है
-दूसरा, जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना होगा
-तीसरा, किसानों में लगातार जागरूकता अभियान चलाना होगा
इन तीनों कामों से ही मिट्टी की सेहत की रक्षा और धरती मां की सुरक्षा संभव है।
उर्वरक विभाग ने आश्वासन दिया कि बैठक में मिले सभी सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। इन सुझावों को आगे बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। बैठक में अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस शर्मा, संयुक्त सचिव कृष्णा कांत पाठक, संयुक्त सचिव अनुराग रोहतागी, उप सचिव अमर कुशवाहा, उप निदेशक गोरी शंकर और विभाग के अन्य अधिकारी भी मौजूद थे। यह पहल भारत की खेती के लिए एक नई दिशा तय कर सकती है। जब पुरस्कार विजेता किसान और सरकार मिलकर काम करते हैं, तो देश की मिट्टी की सेहत सुधरना तय है। प्रधानमंत्री के 'धरती मां को बचाओ' अभियान को किसानों का भरपूर समर्थन मिल रहा है।