पंचायतों को मिली ज्यादा ताकत, लेकिन अभी भी राज्यों के हाथ में फैसला

Gaon Connection | Feb 04, 2026, 17:07 IST
Image credit : Gaon Connection Creatives

देश की ग्राम पंचायतों को और मजबूत बनाने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन असली ताकत अभी भी राज्य सरकारों के पास है। संविधान के मुताबिक पंचायतें राज्य का विषय हैं, इसलिए हर राज्य अपने हिसाब से पंचायतों को अधिकार देता है। नतीजा यह कि एक राज्य की पंचायत के पास जितनी शक्ति है, वो दूसरे राज्य में बिल्कुल अलग हो सकती है।

संविधान के अनुच्छेद 243छ में साफ लिखा है कि राज्य सरकारें चाहें तो पंचायतों को 29 विषयों पर काम करने का अधिकार दे सकती हैं। ये विषय संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में लिखे हैं, जिनमें आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय से जुड़ी योजनाएं शामिल हैं। लेकिन यह पूरी तरह राज्यों की मर्जी पर निर्भर करता है कि वे पंचायतों को कितनी ताकत देना चाहते हैं।



पंचायती राज मंत्रालय ने फरवरी 2025 में एक रिपोर्ट जारी की है जिसका शीर्षक है - "राज्यों में पंचायतों को अंतरण की स्थिति"। इस रिपोर्ट में छह आयामों के आधार पर राज्यों को रैंकिंग दी गई है - रूपरेखा, कार्य, वित्त, पदाधिकारी, क्षमता में वृद्धि और जवाबदेही। रिपोर्ट से पता चलता है कि पिछले कुछ सालों में सुधार जरूर हुआ है। साल 2013-14 में अंतरण सूचकांक 39.9% था, जो 2021-22 में बढ़कर 43.9% हो गया है। यानी राज्य अब पहले से थोड़ा ज्यादा अधिकार पंचायतों को दे रहे हैं, लेकिन अभी भी रास्ता लंबा है।



केंद्र सरकार पंचायतों को डिजिटल बनाने के लिए कई कदम उठा रही है। ई-ग्रामस्वराज पोर्टल (egramswaraj.gov.in) लॉन्च किया गया है, जहां पंचायतें अपनी योजनाएं, बजट और खर्च का पूरा ब्योरा ऑनलाइन डाल सकती हैं। इससे पारदर्शिता बढ़ी है और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने में मदद मिल रही है। इस पोर्टल को सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली से जोड़ा गया है, जिससे वित्त आयोग का पैसा सीधे पंचायतों के खाते में पहुंच सके। साथ ही गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) से भी इसे जोड़ दिया गया है ताकि खरीद में पारदर्शिता आए।



अप्रैल 2020 में 'ऑडिटऑनलाइन' पोर्टल शुरू किया गया, जहां पंचायतों के खातों का ऑनलाइन ऑडिट हो सकता है। इससे वित्त आयोग के पैसे के इस्तेमाल पर नजर रखना आसान हो गया है। इसी तरह 'पंचायत निर्णय' (NIRNAY) नाम का एक ऑनलाइन एप्लिकेशन भी बनाया गया है, जो ग्राम सभाओं की बैठकों और फैसलों को रिकॉर्ड करता है। इससे गांव की जनता को पता चल सकता है कि क्या फैसले लिए गए और कैसे लागू हुए। राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आरजीएसए) के तहत देश भर में पंचायत भवनों का निर्माण और कंप्यूटर की व्यवस्था की जा रही है। अभी तक 13,848 पंचायत भवनों और 65,345 कंप्यूटरों को मंजूरी मिल चुकी है। इस योजना का मकसद सिर्फ बुनियादी ढांचा खड़ा करना नहीं है, बल्कि पंचायत के निर्वाचित प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण देकर उनकी क्षमता बढ़ाना भी है। खासतौर पर उत्तर पूर्व के राज्यों पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है, जहां पंचायत व्यवस्था अभी कमजोर है।



हालांकि केंद्र सरकार लगातार कोशिश कर रही है, लेकिन असली चुनौती यह है कि राज्य सरकारें कितनी इच्छा से पंचायतों को अधिकार देती हैं। कई राज्यों में पंचायतों के पास पैसा तो आता है, लेकिन फैसले लेने का अधिकार नहीं होता। ऐसे में विकास की योजनाएं जमीन पर ठीक से लागू नहीं हो पातीं। पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ​​ललन सिंह ने मंगलवार को राज्यसभा में इन सभी जानकारियों को साझा किया। उन्होंने बताया कि मंत्रालय समय-समय पर अध्ययन, समीक्षा बैठकें और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पंचायतों के काम की निगरानी करता रहता है।

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