यूपी के किसान अब सिर्फ पारंपरिक फसलों के भरोसे नहीं हैं, नई-नई तकनीक और फसलें अपनाकर आमदनी बढ़ा रहे हैं। मोती की खेती भी उनमें से एक है, जिसे बढ़ावा देने के लिए यूपी में कई सरकारी स्कीम भी चल रही हैं। मथुरा जिले के गाँव सेऊपट्टी के किसान हुकुम सिंह के खेत में बने तालाब में मोती की खेती का पहला प्रोजेक्ट जिले में शुरू किया। जिसे खेत तालाब योजना से उन्हें मदद मिली। जिसके बाद यूपी के मथुरा में कई अन्य किसानों ने भी इसे शुरू किया है।
उत्तर प्रदेश के पूर्व अपर कृषि निदेशक आनंद त्रिपाठी कहते हैं, अपनी पारंपरिक खेती को छोड़े बिना, किसान खेत के एक छोटे हिस्से में तालाब बनाकर इससे लाखों की कमाई कर सकते हैं। अगर एक छोटे तालाब में 1000 सीप डाली जाएं और उनमें से 600-700 भी सही सलामत मोती दे दें, तो भी किसान लागत से कई गुना मुनाफा कमा सकते हैं।
यूपी सरकार ने पर्ल फार्मिंग प्रोजेक्ट शुरू किया है। इसके तहत किसानों को 12 लाख रुपये तक की लागत पर 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जाएगी। इसकी खेती से किसान डेढ़ वर्ष में औसतन 8.5 लाख रुपये तक की कमाई कर सकते हैं। केंद्र सरकार की नीली क्रांति योजना के तहत भी किसान मोती की खेती पर सब्सिडी का लाभ ले सकते हैं। मत्स्य सम्पदा योजना के तहत मोती की खेती पर 50 प्रतिशत तक अनुदान उपलब्ध है।
कैसे निकलता है सीप से मोती?
- सबसे पहले 4 से 6 मिलीमीटर का एक बीड (Nucleus) सीप के अंदर डाला जाता है।
- सीप को तालाब में विशेष जालीदार बैग में रखा जाता है। इन्हें 'एल्गी' और 'काई' जैसा प्राकृतिक आहार दिया जाता है।
- लगभग 8-12 महीने में सही ऑक्सीजन लेवल के बीच सीप अपने अंदर कैल्शियम की परतें चढ़ाती है। जिसके बाद तैयार होता है चमकदार मोती।
क्या सावधानियां जरूरी?
सीपों की रोज़ाना निगरानी ज़रूरी है। अगर कोई सीप बीमार हो जाए तो उसे तुरंत दवा देनी पड़ती है और मृत सीप को तालाब से हटाना होता है ताकि संक्रमण न फैले।