PM Fasal Bima Yojana: फसल बर्बाद होने पर आपको नहीं होगा नुकसान; सिर्फ ₹1704 देकर मिलेगा ₹85200 का बीमा, जानें कैसे
फसल बीमा से किसानों को बड़ी राहत, सरकार दे रही आधा प्रीमियम
अब आग लगने, भारी बारिश या किसी भी प्राकृतिक आपदा से फसल बर्बाद होने पर किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत किसान अपनी फसल का बीमा कराकर बड़े नुकसान से बच सकते हैं। इस योजना की खास बात यह है कि किसान जितना प्रीमियम भरता है, उतना ही हिस्सा सरकार भी देती है, जिससे बीमा कराना बहुत किफायती हो जाता है। नुकसान होने पर किसानों को आर्थिक सहारा मिलता है और भारी घाटा नहीं उठाना पड़ता। यह योजना किसानों को सुरक्षा कवच प्रदान करती है।
योजना के तहत प्रीमियम और सब्सिडी
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत, एक्चुअरियल प्रीमियम दर (APR) लागू होती है। किसान को अपनी फसल के प्रकार के आधार पर एक निश्चित प्रतिशत प्रीमियम देना होता है।
- खरीफ फसलों (सभी अनाज, बाजरा, दालें और तिलहन) के लिए, किसान को बीमा राशि का 2.0% या एक्चुअरियल दर, जो भी कम हो, प्रीमियम के रूप में देना होता है।
- रबी फसलों (सभी अनाज, बाजरा, दालें और तिलहन) के लिए, यह दर बीमा राशि का 1.5% या एक्चुअरियल दर, जो भी कम हो, होती है।
- वार्षिक वाणिज्यिक और बागवानी फसलों के लिए, किसान को बीमा राशि का 5% या एक्चुअरियल दर, जो भी कम हो, प्रीमियम के रूप में देना होता है।
सरकार भी किसान द्वारा दिए गए प्रीमियम के बराबर राशि का योगदान करती है, जिससे बीमा की लागत कम हो जाती है।
प्रीमियम कैलकुलेटर की सुविधा
किसानों को बीमा से जुड़ी जानकारी आसानी से मिले, इसके लिए PMFBY के पोर्टल पर "इंश्योरेंस प्रीमियम कैलकुलेटर" की सुविधा दी गई है। इससे किसान अपनी फसल, क्षेत्रफल और प्रीमियम की पूरी जानकारी खुद ही देख सकते हैं। उदाहरण के लिए, धान की 1 हेक्टेयर फसल के लिए किसान को 1704 रुपये प्रीमियम देना होता है, और सरकार भी इतनी ही राशि का योगदान करती है। इस तरह कुल बीमित राशि 85,200 रुपये हो जाती है, जो किसी भी नुकसान की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा प्रदान करती है।
किन जोखिमों को किया जाता है कवर?
यह योजना कई तरह के जोखिमों से सुरक्षा प्रदान करती है:
- उपज हानि: प्राकृतिक आग, बिजली गिरना, तूफान, ओलावृष्टि, चक्रवात, बाढ़, जलभराव, भूस्खलन, सूखा, कीट और रोग जैसी आपदाओं से होने वाली उपज हानि को कवर किया जाता है।
- बुवाई में रुकावट: यदि प्रतिकूल मौसम के कारण किसान बुवाई नहीं कर पाते हैं, तो वे बीमित राशि के 25% तक क्षतिपूर्ति के हकदार हो सकते हैं।
- फसल कटाई के बाद नुकसान: कटाई के बाद खेत में सुखाने के लिए रखी गई फसलों को चक्रवात या बेमौसम बारिश से होने वाले नुकसान से कटाई के 14 दिनों तक बचाया जाता है।
- स्थानीय आपदाएँ: ओलावृष्टि, भूस्खलन और बाढ़ जैसी स्थानीय आपदाओं से होने वाले नुकसान को भी कवर किया जाता है।
किन जोखिमों को नहीं किया जाता कवर?
युद्ध, परमाणु जोखिम, दंगे, चोरी, जंगली जानवरों द्वारा फसल नष्ट होना, और कटाई से पहले बंडल बनाकर ढेर लगाने के बाद होने वाले नुकसान जैसे जोखिमों को इस योजना में शामिल नहीं किया गया है।
कौन उठा सकता है PMFBY का लाभ?
18 से 70 साल की उम्र के किसान, जिनका बैंक में सेविंग अकाउंट है, वे इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। इसके लिए जरूरी है कि किसान:
- सरकार द्वारा तय इलाके में तय फसलों की खेती करते हों।
- खुद की जमीन पर या बटाई/लीज पर लेकर खेती करते हों।
- उनके पास जमीन के वैध कागज और बैंक खाता हो।
- समय पर बीमा के लिए आवेदन करें।
आवश्यक दस्तावेज
इस योजना का लाभ उठाने के लिए आधार कार्ड, बैंक खाता नंबर, खेत का खसरा नंबर, भूमि स्वामित्व या लीज एग्रीमेंट, राशन कार्ड या वोटर आईडी, और पासपोर्ट साइज फोटो जैसे दस्तावेजों की आवश्यकता होती है।