दस साल का सफर: किसानों की फ़िक्र से शुरू हुई PMFBY आज दुनिया की सबसे बड़ी फसल बीमा योजना बन चुकी है

Gaon Connection | Feb 18, 2026, 18:43 IST
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आज 18 फरवरी 2026 को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) अपने दस साल पूरे कर रही है। 2016 में PM नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई इस योजना ने अब तक 10.80 करोड़ से ज़्यादा किसानों को करीब ₹1.93 लाख करोड़ का मुआवज़ा दिया है। दुनिया की सबसे बड़ी फसल बीमा योजना बन चुकी PMFBY ने भारतीय खेती की तकदीर बदली है, हालांकि कुछ राज्यों में देरी और धोखाधड़ी की शिकायतें भी सामने आई हैं।

आज का दिन भारत के करोड़ों किसानों के लिए एक खास दिन है। ठीक दस साल पहले, 18 फरवरी 2016 को, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना यानी PMFBY की शुरुआत की थी। एक दशक बाद, यह योजना न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया की सबसे बड़ी फसल बीमा योजना बन चुकी है।



क्या है यह योजना?

PMFBY एक सरकारी फसल बीमा योजना है जो किसानों को सूखा, बाढ़, ओले, आंधी, कीट और बीमारी जैसी प्राकृतिक आपदाओं से फसल को होने वाले नुकसान की भरपाई करती है। इसे "एक देश एक योजना" की सोच के साथ पुरानी बीमा योजनाओं की कमियों को दूर करके बनाया गया था। किसानों को खरीफ फसल के लिए सिर्फ 2%, रबी फसल के लिए 1.5%, और बागवानी व व्यावसायिक फसलों के लिए 5% प्रीमियम देना होता है। बाकी राशि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर देती हैं यानी किसान को बहुत कम खर्च में बड़ी सुरक्षा मिलती है। यह योजना छोटे, सीमांत, कर्ज़ लेने वाले और बिना कर्ज़ वाले यानी हर तरह के किसान के लिए है। 2024-25 के आंकड़े बताते हैं कि करीब 55% बीमित किसान ऐसे हैं जो स्वेच्छा से इसमें शामिल हुए, यानी उन्हें कोई बैंक कर्ज़ नहीं लेना था, फिर भी उन्होंने बीमा कराया। यह इस बात का सबूत है कि किसान अब इस योजना पर भरोसा करने लगे हैं।



कैसे करें आवेदन?

कोई भी किसान इन तरीकों से PMFBY में शामिल हो सकता है। pmfby.gov.in वेबसाइट पर जाकर, Crop Insurance मोबाइल ऐप से, नजदीकी CSC (कॉमन सर्विस सेंटर) या बैंक शाखा के ज़रिए। इसके अलावा हेल्पलाइन नंबर 14447 पर कॉल करके या WhatsApp नंबर 7065514447 पर मैसेज भेजकर भी पूरी जानकारी पाई जा सकती है।



दस साल में क्या हासिल हुआ?

दस साल के सफर में PMFBY ने ₹1.93 लाख करोड़ से ज़्यादा के दावे 10.80 करोड़ से ज़्यादा किसानों को चुकाए हैं, जिससे बड़े पैमाने पर किसानों को क़र्ज़ के जाल से बाहर निकलने में मदद मिली। 2024-25 में अकेले 23 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 4.19 करोड़ से ज़्यादा किसान इस योजना के तहत बीमित थे। इसमें शामिल 85% किसान छोटे और सीमांत वर्ग से हैं, जो इसे दुनिया की सबसे समावेशी योजनाओं में से एक बनाता है। सरकार ने इस योजना को आगे जारी रखने के लिए जनवरी 2025 में ₹69,515 करोड़ का बजट मंज़ूर किया है।



इसके साथ ही तकनीक को बढ़ावा देने के लिए FIAT (Fund for Innovation and Technology) फंड भी बनाया गया है, जिसके तहत ड्रोन, सैटेलाइट इमेजिंग और डिजिटल टूल्स से फसल नुकसान का आकलन किया जा सके। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी अपने सोशल मीडिया पर किसानों को बधाई देते हुए कहा कि यह योजना मोदी सरकार की किसानों के प्रति प्रतिबद्धता का जीता-जागता सबूत है।



चुनौतियाँ भी कम नहीं

हालांकि यह योजना कामयाब रही है, लेकिन रास्ते में कांटे भी थे। पंजाब ने इस योजना को कभी लागू ही नहीं किया, जबकि गुजरात, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और झारखंड जैसे राज्य इससे बाहर निकल गए थे। राजस्थान में एक बड़ा मामला सामने आया जहाँ बीमा कंपनी के सर्वेयर ने किसानों के फर्जी दस्तावेज़ बनाए और हज़ारों फॉर्मों में शून्य नुकसान दिखाया जबकि असल में 50 से 70 फ़ीसदी फसल बर्बाद हुई थी। कुछ राज्यों ने हज़ारों करोड़ रुपये के दावों का भुगतान नहीं किया, जिससे किसानों का भरोसा डगमगाया। इन कमियों को दूर करने के लिए सरकार ने Kharif 2025-26 से एक नया नियम लागू किया है जिसके तहत राज्यों को अपना प्रीमियम हिस्सा पहले से Escrow खाते में जमा करना होगा ताकि भुगतान में देरी न हो।

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