Agriculture Policy 2026: आज से कृषि रीजनल कॉन्फ्रेंस शुरू, 5 राज्यों के मंत्री करेंगे मंथन, किसानों के लिए नई नीति में क्या होगा बदलाव?
केंद्र सरकार देशभर में कृषि नीतियों को बेहतर ढंग से लागू करने और राज्यों के साथ तालमेल मजबूत करने के लिए एक नई पहल कर रही है। इसके तहत अप्रैल-मई 2026 में क्षेत्रीय (जोनल) बैठकें होंगी। इन बैठकों में रबी और खरीफ सीजन की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। इसका मुख्य मकसद नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करना, जमीनी स्तर की समस्याओं को पहचानना और उनका समाधान निकालना है।
देशभर में होंगे क्षेत्रीय सम्मेलन
सरकार की योजना के अनुसार, ये बैठकें अलग-अलग क्षेत्रों में होंगी। पहली बैठक 7 अप्रैल को जयपुर में पश्चिमी राज्यों के साथ होगी। इसके बाद 17 अप्रैल को लखनऊ में उत्तरी क्षेत्र की बैठक होगी। पूर्वी क्षेत्र के लिए भुवनेश्वर में बैठक होगी। मई के अंत तक दक्षिण और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए हैदराबाद और गुवाहाटी में सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे।
केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जानकारी देते हुए बताया कि हमारे देश में अलग-अलग जलवायु, माटी और एग्रो-क्लाइमेटिक जोन हैं, इसलिए क्षेत्रवार योजना बनाना अधिक प्रभावी होता है। इसी सोच के साथ यह सम्मेलन आयोजित किया गया है। इस कॉन्फ्रेंस में कृषि मंत्री, वैज्ञानिक, अधिकारी, कृषि विशेषज्ञ और उन्नत किसान एक साथ बैठकर क्षेत्र की चुनौतियों पर चर्चा करेंगे और उनके समाधान खोजेंगे।
साथ ही उन्होंने कहा कि आज कृषि की रीजनल कॉन्फ्रेंस प्रारंभ हो रही है। इस कॉन्फ्रेंस में हम कृषि के विविधीकरण, दलहन और तिलहन उत्पादन बढ़ाने, प्राकृतिक खेती, आधुनिक तकनीक जैसे एआई और मशीन लर्निंग के उपयोग पर चर्चा करेंगे। गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों की भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए फसलों और पद्धतियों पर विस्तृत विचार-विमर्श होगा। साथ ही योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा और प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों के लिए आगे की रणनीति भी बनाई जाएगी।
रबी–खरीफ रणनीति पर रहेगा खास फोकस
इन बैठकों में आने वाले रबी और खरीफ सीजन की तैयारी पर खास ध्यान दिया जाएगा। उत्पादन बढ़ाने की रणनीति और फसलें बदलने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होगी। मौसम, उत्पादन का अनुमान, खाद-बीज की उपलब्धता और राज्यों की तैयारियों का भी जायजा लिया जाएगा। इससे कृषि क्षेत्र की बेहतर योजना बनाने में मदद मिलेगी।
प्रमुख कृषि योजनाओं की समीक्षा
सरकार इन बैठकों में कई महत्वपूर्ण योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करेगी। इनमें आत्मनिर्भर दलहन मिशन, राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन, प्राकृतिक खेती मिशन और डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन शामिल हैं। इन योजनाओं को जमीनी स्तर पर बेहतर तरीके से लागू करने के लिए राज्यों से सुझाव भी लिए जाएंगे।
किसानों और विशेषज्ञों की भागीदारी
इन सम्मेलनों में सिर्फ सरकारी अधिकारी ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक, किसान, एफपीओ (किसान उत्पादक संगठन), कृषि स्टार्टअप और निजी क्षेत्र के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। इससे नीति बनाने में जमीनी अनुभव और तकनीकी ज्ञान दोनों का मेल होगा। इससे ऐसे फैसले लिए जा सकेंगे जो ज्यादा व्यावहारिक और प्रभावी हों।
तकनीक और नवाचार पर जोर
सरकार कृषि क्षेत्र में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ाने पर भी जोर देगी। डिजिटल प्लेटफॉर्म, एग्री-स्टैक (कृषि डेटा का एकीकरण), सिंचाई में सुधार, सप्लाई चेन (सामान पहुंचाने की व्यवस्था) और मूल्य श्रृंखला को मजबूत बनाने जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। इसका लक्ष्य कृषि उत्पादकता बढ़ाना और किसानों की आय में सुधार लाना है।
कृषि क्षेत्र में नई दिशा की उम्मीद
केंद्र सरकार का मानना है कि इस तरह के संवाद और सहयोग से कृषि क्षेत्र में नए विचारों को बढ़ावा मिलेगा। इससे नीतियों को जमीन पर बेहतर तरीके से लागू किया जा सकेगा। यह पहल किसानों की आय बढ़ाने, उत्पादन सुधारने और कृषि को अधिक टिकाऊ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।