Gold silver Price: सोने-चाँदी के भाव आसमान पर, बिगड़ा शादी ब्याह का बजट, चमक फीकी और दुकानें सूनी

Preeti Nahar | Jan 31, 2026, 11:02 IST
Image credit : Gaon Connection Creatives

सोने और चांदी की कीमतें आसमान छू रही हैं। इससे लोगों की चिंता बढ़ गई है और शादी-ब्याह में गहने खरीदना मुश्किल हो गया है। ग्रामीण परिवारों का बजट बिगड़ गया है। कई लोग खरीद टाल रहे हैं या आर्टिफिशियल ज्वेलरी खरीद रहे हैं। ज्वैलर्स की दुकानों पर ग्राहक नहीं आ रहे हैं।

<p>सोने-चाँदी के भाव आसमान पर, बिगड़ा शादी ब्याह का बजट<br></p>

Gold Silver Rate: लगातार बढ़ते सोने-चाँदी के दामों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। लोग शादी-ब्याह में भी गहने नहीं खरीद पा रहे हैं। कीमतें आसमान छूने से ग्रामीण परिवारों का बजट बिगड़ गया है। कई परिवार मजबूरी में गहनों की खरीद टाल रहे हैं या पुराने आभूषणों से ही काम चला रहे हैं। कुछ लोग असली गहनों की जगह आर्टिफिशियल ज्वेलरी खरीद रहे हैं। वहीं, ज्वैलर्स की दुकानों पर ग्राहक आना बंद हो गए हैं, शादी-ब्याह के सीजन में सुनार की दुकान पर महीने भर से कोई ग्राहक नहीं आ रहे।



गाँव कनेक्शन ने ग्रामीणों और ज्वैलर्स से बात करके जाना कि सोने चाँदी की बढ़ती कीमतों का असर उन पर कैसे हो रहा है?



'एक महीने से नहीं आया कोई ग्राहक'

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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से 30 किमी दूर कुम्हरावां में अपनी दुकान पर सन्नाटे में बैठे ज्वैलर अमित सोनी बढ़ते रेट कहते हैं, “एक महीने से भी अधिक का समय हो गया है, लेकिन दुकान पर ग्राहक नहीं आ रहे। व्यापार एकदम ठप्प पड़ा है।



अमित बताते हैं, “पिछले एक साल में चाँदी का रेट 2.5 लाख प्रति किलो से भी ज्यादा बढ़ चुका है। जनवरी में जो चाँदी 3 लाख के पार चली गई, वही एक साल पहले 70 हजार के करीब थी। एक साल में 2.5 लाख के करीब रेट बढ़ जाने से आम आदमी की कमर टूट चुकी है। पहले शादी-ब्याह के सीजन में अच्छी कमाई होती थी, लेकिन अब ग्राहक गहना खरीदना तो दूर, भाव पूछकर ही दुकान से वापिस चले जाते हैं। चाँदी के बर्तनों और पायल-बिछिया जैसी चीज़ों की मांग भी पहले के मुकाबले कम हो गई है।"



कोवि़ड से भी बुरी हालत

सोने-चाँदी के भाव पर अमित सोनी कहते हैं, “हम 30 साल से इस बिजनेस में हैं, लेकिन इतना मंदा व्यापार नहीं देखा। कोई कहता है कि चाँदी को सोलर प्लेट्स में इस्तेमाल किया जा रहा है, कोई कहता है कि बिजली के वाहनों के बढ़ने से चाँदी की डिमांड बढ़ गई है। जिस तरह से महंगाई के कारण आज की तारीख में व्यापार ठप हो रहा है, इतनी बुरी स्थिति तो कोविड के समय भी नहीं थी।”



कैसे निकलती है चाँदी?

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भारत दुनिया का सबसे बड़ा चाँदी उत्पादक देश है। चाँदी कभी भी, अलग से नहीं पाई जाती बल्कि ज़िंक, लेड और कॉपर के खनन के बाय-प्रोडक्ट में रूप में मिलती है। जिंक, लेड और कॉपर को रिफाइन किया जाता है। उसके बाद ही चाँदी फाइनल प्रोडक्ट में रूप में मिलती है। राजस्थान, झारखंड, कर्नाटक और आंध्र-प्रदेश में खदानें हैं, जहाँ जिंक और लेड की माइनिंग की जाती है, वहीं से चाँदी मिलती है। गोल्ड और कॉपर की माइनिंग के दौरान चाँदी पाई जाती है।



बिना कुछ खरीदे वापिस लौट रहे ग्राहक

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लखनऊ के ज्वैलर अनुज मौर्या बताते हैं, “दो से तीन साल के बिजनेस में इतनी महंगाई हमने नहीं देखी। जब हमने बिजनेस शुरू किया था तो सोना-चांदी का भाव स्थायी था, लोगों के बजट में भी था। पिछले एक साल में जिस तेजी से रेट बढ़ रहे हैं, उससे ग्राहकों में कमी आई है। ग्राहक आते हैं, रेट पूछते हैं और बिना कुछ खरीदे वापस चले जाते हैं।



शादियों पर पड़ रहा असर

ज्वैलर्स अनुज से बताया कि हल्की से हल्की ज्वेलरी भी लोगों के बजट से बाहर जा रही है। शादियों का सीजन शुरू हो चुका है, लेकिन ग्राहक आभूषणों पर पैसा खर्च नहीं कर रहा। क्योंकि छोटी से छोटी चाँदी की चीज भी महंगी हो गई है। लोग शादियों में आभूषण न देकर लेन-देन कैश में कर रहे हैं, ताकि सामने वाला अपनी पसंद का सामान खरीद सके।



पिछले एक साल में चाँदी के बढ़ते भावों पर एक नज़र



जनवरी 2025 को भारत में चांदी का भाव करीब ₹84,792 प्रति किलो था। जो जनवरी 2026 को यह लगभग ₹4,00,000 प्रति किलो से ज्यादा पहुँच गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चाँदी ने पहली बार 100 डॉलर प्रति औंस का ऐतिहासिक स्तर भी पार किया है। 31 जनवरी 2026 को (खबर लिखे जाने तक चाँदी का भाव 3,50,000 पर है।



2,600 की पायल हुई 12 हजार की

ज्वैलर्स अमित सोनी बताते हैं, “चाँदी की पायल जो 2600 की थी, वो आज 12 हजार की बिक रही है। सीधा-सीधा 461 % चाँदी का भाव बढ़ा है पिछले 7 महीने के अंतराल में। जहाँ पहले शादी के लिए धीरे-धीरे गहने बनवाए जाते थे, वहीं अब परिवार मजबूरी में या तो खरीद टाल रहे हैं या बहुत हल्के आभूषणों से काम चला रहे हैं। कई लोग पुराने गहनों को गलाकर नए डिज़ाइन बनवाने या उन्हें गिरवी रखने को मजबूर हैं।”



शादी ब्याह में नहीं खरीद पा रहे लोग आभूषण

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लखनऊ में रहने वाली नेहा बताती हैं, “घर में शादी है जिसके लिए आभूषण बनवाने हैं। पहले भारी आभूषण बनवा लेते थे, लेकिन अभी छोटी सी चीज बनवाने के लिए भी बजट देखना पड़ रहा है। लेन-देन में अगर आभूषण का साइज कम कर देते हैं तो ससुराल वालों की तरफ से ताने भी मिलते हैं, जिससे घर परिवार के रिश्ते बिगड़ते हैं।”



आर्टिफिशियल ज्वैलरी की बढ़ी माँग

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लखनऊ के कुम्हरावां में आर्टिफिशियल ज्वेलरी की शॉप चलाने वाले दुकानदार ने नाम न बताते हुए कहा, सोने-चाँदी के भाव बढ़ने से लोग अब आर्टिफिशियल ज्वैलरी पर शिफ्ट होने लगे हैं। रोजगार की कमी और खेती-किसानी में कमाई न होने से गाँवों में भी पिछले कुछ समय से आर्टिफिशियल ज्वैलरी की माँग बढ़ी है।

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