बेमौसम बारिश में इन रबी की फसलों को हो सकता है नुकसान, कृषि वैज्ञानिक ने दिए बचाव टिप्स

Preeti Nahar | Feb 03, 2026, 15:57 IST
Image credit : Gaon Connection Creatives

बिगड़ते मौसम और अचानक होती बारिश ने रबी की फसलों के लिए संकट खड़ा कर दिया है। उत्तर-भारत और मैदानी इलाकों में भारी बारिश और ओलावृष्टि से रबी की फसलें जैसे गेहूं, चना और सरसों बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं। मौसम विभाग ने भी आने वाले दिनों में भी खराब मौसम की चेतावनी दी है। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को फसलों की नियमित जांच, बेहतर जल निकासी और मौसम की चेतावनियों पर ध्यान देने की सलाह दी है। ऐसे में कृषि वैज्ञानिक से समझिए कि कैसे फरवरी के बिगड़ते मौसम में रबी कि फसलों को नुकसान से बचा सकते हैं।

<p>बेमौसम बारिश में रबी की फसलों को बचाएँ<br></p>

Rabi Crops: फरवरी में जिस तरीके से मौसम बिगड़ रहा है उससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। पहाड़ी राज्यों में हो रही लगातार बर्फबारी के साथ-साथ वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभों के प्रभाव से उत्तरी भारत से लेकर मध्य भारत तक बारिश, बर्फबारी, तेज हवाएं और घना कोहरा) ने किसानों के लिए चिंता पैदा कर दी है। फरवरी के मौसम में रबी की कई फसलें और साग-सब्जियाँ खेतों में तैयार हो रही है। ऐसे में अचानक बारिश और ओलावृष्टि से खेतों में तैयार फसल में कई प्रकार के रोग लग सकते हैं। गाँव कनेक्शन ने कृषि विज्ञान केंद्र, बांदा के वैज्ञानिक डा. श्याम सिंह से बातचीत की और जाना की बिगड़ते मौसम में रबी की फसलों पर कैसे ध्यान देना है।



गेहूँ की फसल-

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गेहूँ की फसल नवंबर-दिसंबर में बोई जाती है, फरवरी की शुरूआत में गेहूँ में दाने बनने की शुरुआत हो चुकी होती है। इस समय हल्की बारिश गेहूँ के लिए फायदेमंद होती है क्योंकि इससे मिट्टी में नमी बनी रहती है और मौसम ठंडा रहता है। फरवरी शुरुआत के पहले सप्ताह में गेहूँ की फसल में बाली आ चुकी होती है। हल्की बारिश इस समय की गेहूँ की फसल को कोई नुकसान नहीं पहुँचाता। हाँ, लेकिन लागातर बादल छाए रहते हैं तो गेहूँ के दानों पर असर पड़ सकता है, जिससे माहू रोग लग सकता है। अगर ऐसा होता है तो किसान माहू की दवा का छिड़काव कर सकते हैं। अगर बादल नहीं रहते और हल्की बरसात है तो गेहूँ के किसानों को अधिक चिंता करने की जरूरत नहीं है।



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ध्यान रखने योग्य बात- अधिक बारिश होने पर गेहूँ का दाना ठीक से नहीं भर पाता। तेज हवा चलने से फसल गिर जाती है। लगातार नमी से फसल में जंग (रस्ट) लग जाती है। कटाई के समय बारिश होने पर दाना काला पड़ जाता है, जिससे सरकारी मंडी में गेहूं का दाम कम मिलता है। कई बार तो किसान की पूरी मेहनत आधी रह जाती है। लगातार कई दिनों तक खेत में पानी भरा रहना, जल निकासी की समस्या, बहुत ज्यादा बारिश या ओले पड़ना गेहूँ के लिए नुकसानदायक साबित होता है। इसलिए पानी की निकासी सही से करें।



सरसों की फसल



सरसों भी रबी की मेजर फसल है जो अक्टूबर-नवंबर में बोई जाती है। सरसों जनवरी के अंत तक फूल और फलियां बनने की अवस्था में होती है। पश्चिनी विक्षोभ के कारण फरवरी के शुरूआती सप्ताह में लगातार मौसम के बिगड़ने से सरसों की फसल को नुकसान हो सकता है। जो सरसों नवंबर के अंत में बोई गई थी वो इस वक्त हरी होगी। नवंबर के शुरूआत में बोई जाने वाली सरसों इस वक्त पकने लगती है। जिस तरह से मौसम बिगड़ रहा है उससे हरी सरसों को नुकसान हो सकता है, लेकिन सफेद सरसों जो पक चुकी या पकने वाली है उसपर लगातार बदली का कोई नुकसान नहीं होगा। लेकिन जो सरसों हरी है उसमें Stem-Rot रोग होने की संभावना हो सकती है।



ध्यान रखने योग्य बात- तेज हवाओं के चलते फूल झड़ने की समस्या रहती है जिसके कारण फलियाँ ठीक से पक नहीं पाती। अगर बारिश लगातार हो रही है तो सरसों को ज्यादा नुकसान हो सकता है। नमी बढ़ने पर महू (एक तरह का कीड़ा) लग जाता है, जिससे दाने छोटे रह जाते हैं और तेल भी कम निकलता है। भारी बारिश और तेज हवा से तैयार सरसों की फसल गिर जाती है। किसान भाई-बहन ध्यान रखें कि बारिश तेज है जल भराव की समस्या आ रही है तो जल निकासी ही उपाय है सरसों को बचाने का।



आलू की फसल -

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आलू की बुआई ज्यादातर अक्टूबर-नवंबर में होती है, जनवरी के अंत तक मिट्टी के अंदर आलू का आकार बढ़ने लगता है। 15 जनवरी के आसपास होने वाली हल्की बारिश आलू की फसल के लिए फायदेमंद होती है क्योंकि इससे मिट्टी नरम रहती है, आलू का साइज अच्छा बढ़ता है और ज्यादा सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन, वेस्टर्न डिस्टर्बेंस से हो रही बारिश कई राज्यों में फरवरी के शुरूआती सप्ताह में हो रही है। इस समय के आलू में झुलसा रोग होने की संभावना हो सकती है। लेकिन वो भी तब जब 7 से 8 दिन तक बादल लगे हों।



ध्यान रखने योग्य बात- इस मौसम में लगातार बादल लगे रहने से झुलसा रोग तेजी से फैलता है। आलू जमीन के अंदर ही बैठ जाता है और खेत में पानी रुकने पर सड़ने लगता है। खुदाई में देरी से नुकसान और बढ़ जाता है और मंडी में खराब माल का दाम गिर जाता है। ऐसे में किसानों को सलाह दी जाती है कि वे खेत में पानी न रुकने दें। मौसम साफ होते ही कटाई में देरी न करें। अगर फसल में कोई बीमारी दिखे तो गांव के कृषि सलाहकार से पूछकर दवा डालें। अगर फसल बीमा कराया है तो तुरंत सूचना दें। बेवजह सिंचाई बिल्कुल न करें।



कृषि विशेषज्ञ यह भी सलाह दे रहे हैं कि किसानों को मौसम विभाग द्वारा जारी की जाने वाली ताज़ा भविष्यवाणियों और चेतावनियों पर लगातार ध्यान देना चाहिए। इसके अलावा, खेतों के आसपास सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम भी करने चाहिए। यह सुनिश्चित करेगा कि अचानक आने वाली प्राकृतिक आपदाओं से फसलों को कम से कम नुकसान हो।

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