छत पर बागवानी योजना: अब घर की छत कर सकते हैं सब्ज़ियों की खेती
छत पर बागवानी योजना 2025-26 के तहत बिहार सरकार शहरी परिवारों को अपनी छत पर सब्ज़ी, फल और सजावटी पौधे उगाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इस योजना में गमले, फार्मिंग बेड और जैविक किट पर अनुदान देकर लोगों को कम लागत में खेती शुरू करने का मौका मिलेगा।
बढ़ते शहरीकरण और कम होती खुली ज़मीन के बीच अब खेती सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं रही। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए बिहार सरकार के उद्यान निदेशालय ने “छत पर बागवानी योजना 2025-26” की शुरुआत की है। इस योजना का उद्देश्य शहरों और घनी आबादी वाले इलाकों में लोगों को अपनी छत पर ताज़ी सब्ज़ियाँ, फल और सजावटी पौधे उगाने के लिए प्रोत्साहित करना है। इससे एक ओर परिवारों को रसायन-मुक्त ताज़ा भोजन मिलेगा, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण संरक्षण और हरियाली को भी बढ़ावा मिलेगा।
इस योजना के तहत आम लोग अपनी छत पर गमलों और पोर्टेबल फार्मिंग बेड के ज़रिए सब्ज़ियाँ और फल उगा सकते हैं। गमलों में तुलसी, टमाटर, मिर्च, धनिया, पुदीना जैसी सब्ज़ियाँ और औषधीय पौधे आसानी से लगाए जा सकते हैं। वहीं बड़े गमलों में अनार, नींबू, अमरूद जैसे फलदार पौधे भी लगाए जा सकते हैं। इससे रोज़मर्रा की जरूरत की कई चीज़ें घर पर ही उगाई जा सकती हैं।
छत पर बागवानी योजना में सरकार की ओर से आर्थिक सहायता भी दी जा रही है। गमला योजना के तहत प्रति इकाई लागत का बड़ा हिस्सा अनुदान के रूप में मिलता है, जिससे लोगों को कम खर्च में बागवानी शुरू करने का मौका मिलता है। इसी तरह फार्मिंग बेड योजना में भी पोर्टेबल बेड, जैविक किट और जरूरी उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं। इससे शुरुआती लागत कम होती है और आम परिवार भी इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।
छत पर बागवानी केवल सब्ज़ी उगाने तक सीमित नहीं है। इससे घर का तापमान नियंत्रित रहता है, हवा शुद्ध होती है और कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद मिलती है। हरी छतें बारिश के पानी को रोककर जल संरक्षण में भी सहायक होती हैं। वहीं ताज़ी और जैविक सब्ज़ियाँ खाने से परिवार की सेहत बेहतर होती है और बाज़ार पर निर्भरता कम होती है।
यह योजना शहरी खेती (Urban Farming) को बढ़ावा देती है। जिन लोगों के पास खेत नहीं हैं, वे भी अब खेती से जुड़ सकते हैं। बच्चों और युवाओं में प्रकृति के प्रति जागरूकता बढ़ती है और लोगों को आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा मिलती है। कई परिवार अपनी जरूरत से ज्यादा उत्पादन कर पड़ोस या स्थानीय बाजार में बेचकर अतिरिक्त आय भी कमा सकते हैं।
इस योजना का लाभ लेने के लिए इच्छुक लोग अपने जिले के उद्यान विभाग कार्यालय या संबंधित पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। चयन के बाद लाभार्थियों को गमले, फार्मिंग बेड, जैविक खाद और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाता है, ताकि वे सही तरीके से खेती कर सकें।