Mango Farming: मार्च में आम के बागों की देखभाल कैसे करें? बौर झड़ने से बचाने के उपाय जानें!

Gaon Connection | Mar 19, 2026, 13:33 IST
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मार्च का महीना आम के बागवानों के लिए एक सुनहरा अवसर लेकर आता है। इस दौरान पेड़ पर खिलते हुए फूल भविष्य के आमों की कहानी लिखते हैं। फूलों को सुरक्षित रखने के लिए सही देखभाल जैसे सिंचाई, खाद और कीट नियंत्रण की आवश्यकता है।
मार्च में आम के पेड़ों की देखभाल

आम के बागवानों के लिए मार्च का महीना बहुत खास होता है। इस समय आम के पेड़ों पर बौर आते हैं, जो बाद में फल बनते हैं। अगर इस दौरान थोड़ी सी भी लापरवाही हुई, तो बौर झड़ सकते हैं और पैदावार कम हो सकती है। इसलिए, किसानों को इस महीने में खास ध्यान रखने की जरूरत है। सही समय पर सही देखभाल से न सिर्फ बौर झड़ने से बचेंगे, बल्कि आम की पैदावार और क्वालिटी में भी सुधार होगा।



मार्च में आम के पेड़ों की देखभाल

आम को 'फलों का राजा' कहा जाता है और इसकी माँग देश-विदेश में बहुत ज्यादा है। इससे किसान अच्छी कमाई की उम्मीद रखते हैं। अच्छी पैदावार के लिए सही समय पर सही देखभाल बहुत जरूरी है, खासकर मार्च का महीना आम के पेड़ों के लिए बेहद अहम होता है। इस समय पेड़ों पर बौर यानी फूल फल में बदलते हैं और इस दौरान सिंचाई, खाद या देखभाल में थोड़ी भी लापरवाही से फूल झड़ सकते हैं और फलों की कमी हो सकती है। इसलिए किसानों को इस समय खास सावधानी बरतने की जरूरत होती है।



सिंचाई का सही तरीका

मार्च में आम के पेड़ों की सिंचाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। जब पेड़ों पर बौर निकल रहे हों, उस समय ज्यादा पानी नहीं देना चाहिए। मार्च के महीने में बागानों में अधिक सिंचाई करने से पेड़ों में नई पत्तियाँ निकलने लगती हैं, जिससे फूल कमजोर पड़ जाते हैं और झड़ने का खतरा बढ़ जाता है। जब पेड़ों पर मटर के दाने जितने छोटे फल दिखाई देने लगें, तब हल्की सिंचाई शुरू करनी चाहिए। मार्च में जब फल बढ़ने लगते हैं, तब नियमित लेकिन सीमित मात्रा में पानी देना जरूरी होता है। विशेषज्ञों के मुताबिक ड्रिप सिंचाई इस समय सबसे बेहतर तरीका माना जाता है, क्योंकि इससे जड़ों तक सही मात्रा में नमी पहुंचती है और पानी की बचत भी होती है।



संतुलित पोषण और खाद का प्रयोग

इस मौसम में पेड़ों को संतुलित पोषण देना भी बेहद जरूरी होता है। इसके लिए गोबर की सड़ी खाद या वर्मी कम्पोस्ट डालना फायदेमंद माना जाता है। इसके साथ ही बोरॉन, जिंक और मैग्नीशियम जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिड़काव करने से फूल और फल मजबूत बनते हैं। ऐसे में किसान मार्च के महीने में पोटाश युक्त खाद जैसे NPK 13:00:45 या पोटैशियम नाइट्रेट का 3 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर स्प्रे कर सकते हैं। इससे एक मंजर से 8–10 आम तक लगने की संभावना बढ़ जाती है।



कीट और रोग नियंत्रण

मार्च के महीनें में मौसम में हो रहे बदलाव और तापमान में बढ़ोतरी होने से आम के पेड़ों पर मधुआ, गुझिया और हॉपर जैसे कीट हमला कर सकते हैं, जो फूलों को नुकसान पहुंचाते हैं। इसके अलावा झुलसा रोग भी आम की फसल के लिए बड़ी समस्या बन सकता है। ऐसे में मार्च के दौरान ही पहला और दूसरा स्प्रे कर लेना चाहिए। जरूरत पड़ने पर कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेकर ही दवाओं का इस्तेमाल करें।



मल्चिंग और छंटाई का महत्व

पेड़ों के नीचे सूखी घास, पत्तियां या प्लास्टिक की मदद से मल्चिंग करने से मिट्टी की नमी लंबे समय तक बनी रहती है। इससे खरपतवार भी कम उगते हैं और पेड़ों की जड़ों को बेहतर वातावरण मिलता है। इसलिए मार्च के महीनें में आम के बागानों में मल्चिंग करना फायदेमंद होता है। अगर पेड़ों की टहनियाँ बहुत घनी हो गई हों तो सूखी या बीमार शाखाओं को हल्का काट देना चाहिए। इससे धूप और हवा पेड़ के अंदर तक पहुंचती है और फल बेहतर लगते हैं। हालांकि इस समय भारी छंटाई से बचना चाहिए, क्योंकि पेड़ फूल के दौर में होता है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसान मार्च में आम के बाग की सही तरीके से देखभाल करें, तो न केवल फूल झड़ने से बच सकते हैं बल्कि पैदावार और आम की क्वालिटी दोनों में अच्छा सुधार देखा जा सकता है।

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