Wheat Farming: बढ़ते तापमान में गेहूं की फसल को क्या नुकसान? जानिए मौसम विभाग ने क्या दी सलाह?
देश में लगातार बदलते मौसम के कारण फरवरी की फसलों पर असर दिखने लगा है। कई इलाकों में बेमौसम बारिश व ओलावृष्टि, तो कई जगहों पर अचानक बढ़ता तापमान किसानों के लिए चिंता का विषय बन रहा है। इस समय फरवरी का महीना चल रहा है। पिछले दो-तीन दिन से दोपहर के समय मई-जून जैसी तेज गर्मी पड़ने लगी है। तापमान में आई अचानक बढ़ोतरी ने गेहूं की खेती करने वाले किसानों की चिंता को बढ़ा दिया है। इस समय अचानक तापमान में बढ़ोतरी गेहूं व चने की फसल के लिए नुकसानदेय हो सकता है। ऐसे में किसानों को बढ़ते हुए तापमान से अपनी गेहूं व चने की फसल में होने वाले नुकसान से बचाने के उपाय करना जरूरी हो जाता है।
उत्तर-भारत में बढ़ेगा तापमान
उत्तर भारत के की इलाकों में तेजी से बढ़ते तापमान क असर गेहूं की फसल पर दिखने लगा है। फरवरी के दूसरे हफ्ते में ही तापमान सामान्य से 2 से 4 डिग्री सेल्सियस ज्यादा दर्ज किया गया है। ऐसे में गेहूं की फसल, जो इस समय दाना भरने की अवस्था में है, उसके लिए खतरा बढ़ गया है। मौसम विभाग ने किसानों को पहले से सतर्क रहने की सलाह दी है। मौसम विभाग के वैज्ञानिकों का कहना है, 2022 की तरह इस बार भी जल्दी गर्मी की लहर आ सकती है। इसलिए किसानों को हल्की सिंचाई और दूसरी जरूरी सावधानियाँ समय पर अपनाने की जरूरत है।
बढ़ते तापमान से गेहूं की फसल को क्या नुकसान?
इस सीजन में लगभग 95% गेहूं की बुवाई 25 अक्टूबर से 15 नवंबर के बीच हुई थी, जो सही समय माना जाता है। लेकिन अब अचानक बढ़ता तापमान चिंता की वजह बन गया है। जब गेहूं में दाने बन रहे होते हैं, तब ज्यादा गर्मी से दाने का वजन कम हो सकता है, जिससे पैदावार और क्वालिटी दोनों पर असर पड़ता है। खासकर हल्की से मीडियम मिट्टी में जल्दी बोई गई फसल ज्यादा प्रभावित होती है।
IMD के मुताबिक, अगले चार दिनों में उत्तर-पश्चिम भारत में अधिकतम तापमान 2–3 डिग्री सेल्सियस तक और बढ़ सकता है। इस हफ्ते कई इलाकों में तापमान सामान्य से 3–5 डिग्री ज्यादा रहने की संभावना है। सोमवार को पंजाब के फरीदकोट में अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो फरवरी के हिसाब से काफी ज्यादा है।
बढ़ती गर्मी में गेहूं की फसल को कैसे बचाएँ?
- बढ़ती गर्मी के असर को सही समय पर किए गए उपायों से काफी हद तक कम किया जा सकता है जैसे-
- समय पर हल्की सिंचाई करें, लेकिन सिंचाई करते वक्त हवा की रफ्तार का जरूर ध्यान रखें, ताकि फसल गिरने से बची रहे।
- बूट लीफ और एंथेसिस स्टेज पर 2% पोटैशियम नाइट्रेट (13:0:45) के दो स्प्रे करें। इसके लिए 200 लीटर पानी में 4 किलो पोटैशियम नाइट्रेट घोलकर छिड़काव किया जा सकता है। इससे ज्यादा तापमान का असर कुछ हद तक कम किया जा सकता है और दाने की भराव क्षमता बनी रहती है।
IMD दोनों का साफ कहना है कि अगर आने वाले हफ्तों में तापमान 35 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुँचता है, तो गेहूं की पैदावार पर बुरा असर पड़ सकता है। इसलिए किसानों को मौसम पर लगातार नजर रखने, हल्की सिंचाई करने और वैज्ञानिक सलाह के अनुसार स्प्रे करने की जरूरत है, ताकि फसल को गर्मी से बचाया जा सके।