Trench Method: ट्रेंच विधि से गन्ने की खेती- कम पानी में ज्यादा पैदावार का नया मॉडल, यूपी कृषि विभाग ने किसानों को दी सलाह

Gaon Connection | Apr 17, 2026, 12:52 IST
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वाराणसी के सुबास चंद्र वर्मा ने ट्रेंचर विधि का इस्तेमाल कर गन्ने की बुआई में क्रांति लेकर आए हैं। इस नई तकनीक से 40 प्रतिशत अधिक उपज के साथ-साथ 50 प्रतिशत पानी की खपत में कमी आई है। कृषि विभाग ने इस विशेष विधि के लाभ किसानों को बताए हैं। जानिए कैसे ट्रेंच विधि से आप गन्ने की खेती में ज्यादा पैदावार और बढ़िया कमाई कर सकते हैं।
बोने के लिए सिंगल बड का इस्तेमाल करें

Trench method sugarcane cultivation: उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों के लिए नई तकनीकें तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं। इसी क्रम में वाराणसी जिले के ब्लॉक हरहुआ के ग्राम भोपापुर के प्रगतिशील किसान श्री सुबास चंद्र वर्मा ने ट्रेंचर विधि से सिंगल बड गन्ने की बुआई कर एक सफल उदाहरण पेश किया है। उत्तर प्रदेश कृषि विभाग के अनुसार, 4 से 5 फीट दूरी पर ट्रेंच विधि से सिंगल बड गन्ना लगाने पर 40 प्रतिशत तक अधिक उपज, 50 प्रतिशत तक पानी की बचत और बेहतर फुटाव मिलता है। विभाग किसानों को इस तकनीक को अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है।



क्या है ट्रेंच विधि से गन्ने की खेती?

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ट्रेंच विधि में खेत में गहरी और चौड़ी नालियाँ (Trench) बनाई जाती हैं, जिनमें गन्ने की बुआई की जाती है। सामान्य समतल बुआई की तुलना में इसमें पौधों को अधिक जगह, बेहतर नमी और जड़ों के फैलाव का अवसर मिलता है। इस विधि में सिंगल बड (एक आंख) गन्ना बीज का उपयोग किया जाता है, जिससे बीज की मात्रा भी कम लगती है।



सिंगल बड गन्ना क्या होता है?

गन्ने के पूरे टुकड़े लगाने के बजाय इसमें गन्ने की केवल एक स्वस्थ बड (bud) काटकर लगाई जाती है। यही सिंगल बड बाद में कई कल्ले बनाती है। कृषि विभाग के अनुसार, सिंगल बड से 8 से 10 तक कल्ले निकल सकते हैं, जिससे पौध संख्या मजबूत बनती है।



ट्रेंच विधि से किसानों को क्या फायदे मिलते हैं?

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1. 40% तक अधिक उपज: पौधों को पर्याप्त दूरी और पोषण मिलने से गन्ना मोटा और स्वस्थ बनता है। इससे कुल उत्पादन बढ़ता है।



2. 50% तक पानी की बचत: नालियों में सिंचाई होने से पानी सीधे जड़ों तक पहुँचता है। बेवजह पानी बहता नहीं है, जिससे सिंचाई खर्च घटता है।



3. बेहतर फुटाव: सिंगर बड से कई कल्ले निकलते हैं, जिससे खेत में पौधों की संख्या तेजी से बढ़ती है।



4. कम बीज लागत: पूरे गन्ने की जगह केवल बड का उपयोग होने से बीज कम लगता है।



5. खाद का बेहतर उपयोग: नालियों में खाद और उर्वरक देने से पौधों को सीधा लाभ मिलता है।



कैसे करें ट्रेंच विधि से बुआई?

खेत की तैयारी



  1. खेत की गहरी जुताई करें
  2. पाटा चलाकर समतल करें
  3. खरपतवार साफ करे

ट्रेंच बनाना

  1. 4 से 5 फीट की दूरी पर लाइनें रखें
  2. 20 से 30 सेंटीमीटर गहरी नालियाँ बनाएं
  3. मिट्टी भुरभुरी रखें

बीज चयन

  1. रोगमुक्त और स्वस्थ गन्ना चुनें
  2. अच्छी किस्मों का चयन करें
  3. केवल स्वस्थ आंखें काटें

बुआई

  1. बड को उचित दूरी पर रखें
  2. हल्की मिट्टी से ढकें
  3. तुरंत हल्की सिंचाई करें

वाराणसी के किसान बने मिसाल

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ग्राम भोपापुर, ब्लॉक हरहुआ, वाराणसी के किसान श्री सुबास चंद्र वर्मा ने इस तकनीक को अपनाकर दिखाया है कि आधुनिक खेती से कम लागत में बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। कृषि विभाग ऐसे किसानों के उदाहरण देकर अन्य किसानों को जागरूक कर रहा है।



वैज्ञानिक शोध क्या कहते हैं?

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भारतीय कृषि अनुसंधान से जुड़े अध्ययनों में ट्रेंच या संशोधित ट्रेंच पद्धति को पारंपरिक विधियों की तुलना में अधिक उपज देने वाला पाया गया है। कुछ अध्ययनों में बेहतर गन्ना उत्पादन और आर्थिक लाभ दर्ज किए गए हैं। भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान के डॉ. अजय कुमार साह, जो यहाँ के प्रधान वैज्ञानिक हैं बताते हैं, "अभी तक उत्तर प्रदेश के किसान जो सामान्य विधि से गन्ने की खेती कर रहे हैं, उन्हें प्रति हेक्टेयर 60-70 टन गन्ने का उत्पादन मिलता है और अगर वही किसान ट्रेंच विधि से गन्ना लगाता है तो इसमें दस से बीस टन ज्यादा गन्ने का उत्पादन मिलता है। जैसे कि कोई किसान सामान्य विधि से एक हेक्टेयर में 70 टन गन्ने का उत्पादन ले रहा है तो ट्रेंच विधि से 90 से 100 टन तक उत्पादन ले सकता है।"



किन किसानों के लिए सबसे उपयोगी?

यह तकनीक विशेष रूप से उन किसानों के लिए लाभकारी है:



  1. जहाँ पानी की कमी है
  2. सिंचाई खर्च ज्यादा है
  3. कम जमीन में अधिक उत्पादन चाहिए
  4. मजदूरी लागत बढ़ गई है
  5. आधुनिक खेती अपनाना चाहते हैं

कृषि विभाग की सलाह

उत्तर प्रदेश कृषि विभाग किसानों से अपील कर रहा है कि वे पारंपरिक पद्धति के साथ-साथ नई तकनीकों को अपनाएं। ट्रेंच विधि से गन्ना खेती करने पर लागत घट सकती है और उत्पादन बढ़ सकता है। गन्ना किसानों के लिए ट्रेंच विधि अब सिर्फ प्रयोग नहीं, बल्कि फायदे का मॉडल बनती जा रही है। वाराणसी के किसान सुबास चंद्र वर्मा इसका उदाहरण हैं। अगर किसान सही तकनीक, सही बीज और सही प्रबंधन अपनाएं तो कम पानी में ज्यादा उत्पादन संभव है। यानी अब स्मार्ट खेती से मीठा मुनाफा कमाने का समय है।

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