Unseasonal Rain: देशभर में बेमौसम बारिश का कहर: बर्बाद हुई फसलें, इन राज्य की सरकारों ने नुकसान के आकलन के दिए आदेश
देशभर में बदलते मौसम का असर अब साफ तौर पर खेती-किसानी पर दिखने लगा है। बेमौसम बारिश, तेज हवाओं और ओलावृष्टि ने कई राज्यों में खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुँचाया है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। उत्तर से लेकर पश्चिम और उत्तर-पश्चिम भारत तक, अलग-अलग राज्यों में हालात बिगड़ते नजर आ रहे हैं। ऐसे में राज्य सरकारें राहत, मुआवजा और नुकसान के आकलन में जुटी हैं, वहीं विशेषज्ञ इसे जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव से जोड़कर देख रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर: मौसम की मार से खेती हुई मुश्किल
जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि खेती-किसानी अब मौसम की मार से और भी मुश्किल हो गई है। उन्होंने बताया कि बेमौसम बरसात और भयानक मौसम की घटनाओं के कारण किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। Omar Abdullah ने साफ कहा कि अब खेती-किसानी पहले से ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गई है। बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की फसलों को भारी नुकसान पहुँचाया है। उन्होंने बताया कि मौसम का पैटर्न पूरी तरह बदल चुका है, जब जरूरत होती है तब बारिश नहीं होती और जब होती है तो बेहद तीव्र होती है।
फसल बीमा, सुनिश्चित सिंचाई और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर हो सुनिश्चित
हम अक्सर अपनी फसलें बेचते हैं और फिर बारिश आ जाती है। शोपियां और दूसरे इलाकों को देखिए। ओलावृष्टि से कितना नुकसान हुआ है। उमर अब्दुल्ला ने कहा, "हम मौसम को नहीं बदल सकते। मौसम तो सबके लिए एक जैसा है। लेकिन कम से कम हमें मौसम के असर को, मौसम के खतरों को कम करना चाहिए।" उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसानों के जोखिम को कम करने के लिए फसल बीमा, सुनिश्चित सिंचाई और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे उपायों पर ध्यान देना चाहिए।
पंजाब: 1.25 लाख एकड़ फसल तबाह, मुआवजे का भरोसा
Punjab में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से करीब 1.25 लाख एकड़ से ज्यादा फसलें प्रभावित हुई हैं। सबसे ज़्यादा नुकसान फाजिल्का में 45,000 एकड़, मुक्तसर में 43,000 एकड़, बठिंडा में 20,000 एकड़ और संगरूर में 3,000 एकड़ में हुआ है। कृषि मंत्री ने मुक्तसर में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि खराब मौसम के कारण फसलों का बहुत नुकसान हुआ है। उन्होंने चिंता जताई कि गेहूं की फसल कटाई के लिए तैयार थी। मौसम विभाग ने राज्य में और बारिश की भविष्यवाणी की है, जिससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है।
नुकसान का आकलन कर मुआवजा दिया जाएगा
राज्य के कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुडियन ने किसानों को भरोसा दिलाया है कि नुकसान का आकलन कर मुआवजा दिया जाएगा। वहीं मुख्यमंत्री Bhagwant Mann ने ‘गिरदावरी’ के आदेश दिए हैं, ताकि प्रभावित किसानों को जल्द राहत मिल सके। लगातार बारिश की चेतावनी से किसानों की चिंता और बढ़ गई है। रविवार को किसानों ने राज्य के कई हिस्सों में बारिश और ओलावृष्टि से हुए फसल नुकसान के लिए मुआवज़े की मांग की थी। किसानों ने अमृतसर, बठिंडा, मुक्तसर, फाजिल्का, तरन तारन जैसे इलाकों में बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान की सूचना दी है।
विपक्षी दलों ने की मुआवजे की मांग
विपक्षी दलों के नेताओं ने भी फसल नुकसान के लिए मुआवज़े की माँग की है। इसमें गेहूं, मक्का और सब्जियों जैसी फसलें शामिल हैं। शिरोमणि अकाली दल (SAD) की नेता और बठिंडा की सांसद हरसिमरत कौर बादल और कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को चिट्ठी लिखी है। उन्होंने राज्य में ओलावृष्टि से खड़ी गेहूं की फसल को हुए नुकसान का आकलन करने के लिए एक विशेष टीम भेजने और प्रभावित किसानों को एक विशेष मुआवज़ा पैकेज जारी करने का आग्रह किया है।
महाराष्ट्र: 2 लाख हेक्टेयर से ज्यादा फसल बर्बाद
Maharashtra में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ दी है। मार्च से अप्रैल की शुरुआत तक, राज्य के 29 जिलों में 2.05 लाख हेक्टेयर से ज़्यादा ज़मीन पर खड़ी फसलें बर्बाद हो गईं। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यह नुकसान अचानक हुई बारिश और ओलों के कारण हुआ है।
लाखों हेक्टेयर फसल हुई बर्बाद
शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, मार्च के दूसरे पखवाड़े में 1.22 लाख हेक्टेयर में फसलें खराब हुईं। वहीं, अप्रैल की शुरुआत में 82,704 हेक्टेयर ज़मीन पर खड़ी फसलें ओलावृष्टि की चपेट में आ गईं। नासिक, अहिल्यानगर, जलगांव और धुले जैसे जिलों में सबसे ज़्यादा तबाही मची है। छत्रपति संभाजीनगर और बुलढाणा में भी किसानों को भारी नुकसान हुआ है। पुणे, सोलापुर, सांगली और जालना जिलों के कुछ हिस्सों के साथ-साथ विदर्भ, कोंकण और मराठवाड़ा क्षेत्रों में भी फसलों को नुकसान पहुंचा है।
दलहन और प्याज जैसी फसलें हुईं बर्बाद
इस बार गेहूं, मक्का और ज्वार जैसी अनाज वाली फसलें, चने जैसी दलहन फसलें और प्याज जैसी नकदी फसलें भी ओलावृष्टि से बच नहीं पाईं। इतना ही नहीं, केले, आम, अंगूर, अनार, तरबूज, खरबूजा और नींबू जैसी नकदी फसलों के साथ-साथ सब्ज़ियों की खेती करने वाले किसानों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा है। अधिकारियों ने बताया कि ये आंकड़े अभी शुरुआती जाँच पर आधारित हैं। ज़िला स्तर पर फसलों के नुकसान का विस्तृत सर्वे चल रहा है। अंतिम रिपोर्ट तैयार होने के बाद ही राज्य सरकार राहत उपायों और मुआवज़े पर कोई फैसला लेगी।
राजस्थान: कृषि विकास पर जोर, वैज्ञानिक खेती की अपील
Rajasthan में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने खेती-किसानी पर गंभीर असर डाला है। राज्य के कई जिलों जैसे जोधपुर, बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ और नागौर में तेज बारिश और ओलों के कारण खेतों में पानी भर गया, जिससे गेहूं और इसबगोल जैसी प्रमुख फसलें प्रभावित हुई हैं। कटाई के लिए तैयार फसलें भी भीगकर खराब हो गईं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। तेज हवाओं के साथ आई बारिश ने खड़ी फसलों को गिरा दिया, वहीं लगातार नमी के कारण फसल की गुणवत्ता भी घट गई है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ऐसा मौसम लंबे समय तक जारी रहा, तो किसानों की आय पर गहरा असर पड़ सकता है और उत्पादन में भी कमी आ सकती है।
Rajasthan के मुख्यमंत्री Bhajan Lal Sharma ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हित में लगातार काम कर रही है। उन्होंने “विकसित राजस्थान 2047” के तहत कृषि क्षेत्र को मजबूत करने का रोडमैप पेश किया है। सरकार ने कृषि बजट में 34% की बढ़ोतरी करते हुए 1.19 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। साथ ही किसानों से आधुनिक तकनीकों, स्प्रिंकलर सिंचाई और फसल विविधीकरण अपनाने की अपील की गई है, ताकि मौसम की मार से बचा जा सके।
हरियाणा: मौसम की मार के साथ नीतियों पर भी सवाल
Haryana में बेमौसम बारिश के साथ-साथ सरकारी नीतियों को लेकर भी विवाद बढ़ गया है। पहले बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के कारण खेतों में तैयार खड़ी फसल खराब हुई उसके बाद मंडी में किसानों को खरीद में भी दिक्कत आ रही है। फसलों की खरीद में देरी की शिकायतों की खबरें सामने आ रही है। पूर्व मुख्यमंत्री Bhupinder Singh Hooda ने आरोप लगाया कि किसान पहले ही मौसम से परेशान हैं, ऊपर से मंडियों में नई शर्तों के कारण उन्हें अपनी फसल बेचने में दिक्कत हो रही है। उन्होंने सरकार से तुरंत गिरदावरी और मुआवजे की माँग की है, साथ ही MSP पर खरीद को सरल बनाने की बात कही है। उनके मुताबिक किसान दोहरे संकट मौसम और नीतिगत दबाव का सामना कर रहे हैं।