Vegetable Farming: रबी के बाद खाली खेत न छोड़ें, फरवरी–मार्च में बोएं बेहतर पैदावार और मुनाफे वाली ये 10 सब्ज़ियाँ

Preeti Nahar | Feb 17, 2026, 16:30 IST
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फरवरी–मार्च का महीना सब्ज़ी उगाने के लिए बेहद बेहतर माना जाता है। इस समय तापमान और नमी कई सब्ज़ियों के लिए अनुकूल होती है, जिससे कम लागत में अच्छी पैदावार और बेहतर दाम मिलने की संभावना रहती है। अगर किसान इस दौरान सही सब्ज़ियों का चुनाव करें और समय पर बुवाई करें, तो वे गर्मी के सीजन में बाजार की माँग का फायदा उठाकर अच्छी कमाई कर सकते हैं। इस लेख में ऐसी 10 सब्ज़ियों के बारे में बताया गया है, जिनकी फरवरी–मार्च में बुवाई करके किसान मुनाफे की खेती कर सकते हैं।

<p>फरवरी–मार्च में बोएं बेहतर पैदावार और मुनाफे वाली ये 10 सब्ज़ियाँ<br><br></p>

अगर आप सब्जियों की खेती करना चाहते हैं तो फरवरी से मार्च का महीना सबसे बेहतर माना गया है, सब्जि़याँ उगाने के लिए। फरवरी में ज्यादातर सब्जी वाली फसलों की बुवाई शुरू हो जाती है, जिनकी बुवाई मार्च तक भी चलती है। इस समय पर बुवाई करने से सब्जियों की फसल अच्छी होती है। फरवरी से मार्च के बीच कई मौसमी सब्जियों की बुवाई होती है जैसे खीरा, ककड़ी, करेला, लौकी, तोरई, पेठा, पालक, फूलगोभी, बैंगन, भिण्डी, अरबी जैसी सब्जि़याँ।



1 खीरा

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ये समय खीरे की बुवाई के लिए सबसे बेहतर होता है। खीरे की खेती के लिए बीजों को लाईन में बोया जाता है। लाइन से लाइन की दूरी 1 मीटर तक की रखें। बुवाई के 20 से 25 दिन बाद निराई-गुड़ाई करें। खेत में सफाई रखें और तापमान बढ़ने पर हर सप्ताह हल्की सिंचाई करें। समय-समय पर खेत से खरपतवार हटाते रहें।



2. ककड़ी

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ककड़ी की बुवाई के लिए उपयुक्त समय फरवरी से मार्च में ही होता है। कुछ किसान अगेती फसल लेने के लिए पॉलीथीन की थैलियों में बीज भरकर उसकी रोपाई जनवरी में भी कर सकते हैं। ककड़ी की खेती के लिए एक एकड़ भूमि में किलोग्राम बीज की जरूरत होती है। इसे लगभग हर तरह की ज़मीन में उगाया जा सकता है। भूमि की तैयारी करते समय गोबर की खाद डालें व खेत की तीन से चार बार जुताई करके सुहागा लगाएँ। ककड़ी की बीजाई 2 मीटर चौड़ी क्यारियों में नाली के किनारों पर करनी चाहिए। पौधे से पौधे का अंतर 60 सेंटीमीटर का रखें। एक जगह पर दो-तीन बीज बोएं। पौधा बनने के बाद एक जगह पर एक ही ककड़ी का पौधा बोएं।



3 करेला

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करेले की खेती के लिए दोमट मिट्टी सबसे बेहतर मानी जाती है। करेले की बुवाई दो तरीके से की जा सकती है, बीज से और पौधे से। करेले की खेती के लिए 2 से 3 बीज 2.5 से 5 मीटर की दूरी पर बोएं। करेले के बीजों को बोने से पहले 24 घंटे के लिए पानी में भिगो लेना चाहिए, इससे बीजों का अंकुरण जल्दी और अच्छा होता है। करेले की खेती के लिए नदी किनारे की जमीन बढ़िया रहती है। कुछ अम्लीय भूमि में इसकी खेती की जा सकती है। बाते करें जुताई की तो पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करें। इसके बाद दो-तीन बार हैरो या कल्टीवेटर चलाएँ।



4 लौकी

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लौकी की खेती हर तरह की मिट्टी में हो जाती है लेकिन दोमट मिट्टी इसके लिए सबसे अच्छी होती है। लौकी की खेती के लिए एक हेक्टेयर में 4.5 किलोग्राम बीज की जरूरत होती है। लौकी के बीज सख्त होते हैं इसके लिए बीज बोने से पहले 24 घंटे के लिए पानी में भिगोने के बाद अगले 24 घंटों तक टाट में बाँधकर रखें। ऐसा करने से बीजों का अंकुरण जल्दी होती है। लौकी के बीज बोने के लिए 2.5 से 3.5 मीटर की दूरी पर 50 सेंटीमीटर चौड़ी व 20 से 25 सेंटीमीटर गहरी नालियाँ बनानी चाहिए। इन नालियों के दोनों किनारों पर गरमी में60 से 70 सेंटीमीटर का फासले पर बीजों की बुवाई करनी चाहिए। एक जगह पर 2 से 3 बीज 4 सेंटीमीटर की गहराई पर बोएं।



5 भिंडी

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भिंडी की अगेती किस्म की बुवाई फरवरी से मार्च के बीच करते हैं। इसकी खेती हर तरह की मिट्टी में हो जाती है। भिंडी की खेती के लिए दो-तीन बार जुताई कर मिट्टी को भुरभुरा कर लेना चाहिए फिर पाटा चलाकर समतल कर लेना चाहिए। भिंडी की बुवाई कतारों में करनी चाहिए। बीजों के बुवाई के समय कतारों के बीच का फासला 25-30 सेमी रखें। पौध की दूरी 15-20 सेंटीमीटर रखनी चाहिए। बोने के 15-20 दिन बाद पहली निराई-गुड़ाई करना जरूरी होता है। खरपतवार नियंत्रण समय-समय पर करते रहें।



6 तोरई

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हल्की दोमट मिट्टी तोरई की सफल खेती के लिए बढ़िया मानी जाती है। खेती की तैयारी में मिट्टी भुरभुरी हो जानी चाहिए। तोरई में निराई ज्यादा करनी पड़ती है। इसके लिए कतार की दूरी 1 से 1.20 मीटर और पौधे से पौधे की दूरी एक मीटर की रखें। एक जगह पर 2 बीज बोने चाहिए। बीज को ज्यादा गहराई में न लगाएँ, क्योंकि ऐसा करने से अंकुरण पर फर्क पड़ता है। एक हेक्टेयर ज़मीन में 4 से 5 किलोग्राम बीज लगता है।



7 पालक

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पालक के लिए बलुई दोमट या मटियार मिट्टी अच्छी होती है, लेकिन ध्यान रखें की अम्लीय मिट्टी वाली जमीन में पालक की खेती नहीं होती है। इसलिए मिट्टी की पहचान करके की पालक की खेती करें। भूमि की तैयारी के लिए मिट्टी को पलेवा करके जब वह जुताई योग्य हो जाए तब मिट्टी पलटने वाले हल से एक जुताई करना चाहिए, इसके बाद 2 या 3 बार हैरो या कल्टीवेटर चलाकर मिट्टी को भुरभुरा बना लेना चाहिए। साथ ही पाटा चलाकर भूमि को समतल करें। पालक की खेती के लिए एक हेक्टेयर में 25 से 30 किलोग्राम बीज की ज़रूरत होती है। बुवाई के लिए कतार से कतार की दूरी 20 से 25 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 20 सेंटीमीटर रखना चाहिए। पालक के बीज को 2 से 3 सेन्टीमीटर की गहराई पर बोना चाहिए, इससे अधिक गहरी बुवाई नहीं करनी चाहिए।



8 अरबी

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अरबी की खेती के लिए रेतीली दोमट मिट्टी अच्छी रहती है। इसके लिए ज़मीन गहरी होनी चाहिए जिससे इसके कंदों का समुचित विकास हो सके। अरबी की खेती के लिए समतल क्यारियाँ बनाएँ। इसके लिए कतार से कतार की दूरी 45 सेमी.व पौधे से पौधे की दूरी 30 सेमी होनी चाहिए। इसकी गांठों को 6 से 7 सेंटीमीटर की गहराई पर बो दें।



9 बैंगन

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इसकी नर्सरी फरवरी में तैयार की जाती है और बुवाई अप्रैल में की जाती है। बैंगन की खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी उपयुक्त होती है। नर्सरी में पौधे तैयार होने के बाद दूसरा ज़रूरी काम होता है खेत को तैयार करना। मिट्टी परीक्षण करने के बाद खेत में एक हेक्टेयर के लिए 4 से 5 ट्रॉली पक्का हुआ गोबर का खाद् बिखेर दे। बैंगन की खेती के लिए दो पौधों और दो कतार के बीच की दूरी 60 सेंटीमीटर होनी ही चाहिए।



10 पेठा

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पेठा कद्दू की खेती के लिए दोमट व बलुई दोमट मिट्टी सब से अच्छी मानी जाती है। इसके अलावा यह कम अम्लीय मिट्टी में आसानी से उगाया जा सकता है। पेठा की बुवाई से पहले खेतों की अच्छी तरह से जुताई कर के मिट्टी को भुरभुरी बना लेना चाहिए और 2-3 बार कल्टीवेटर से जुताई कर के पाटा लगाना चाहिए। इसके लिए एक हेक्टेयर में 7 से 8 किग्रा बीज की ज़रूरत होती है। इसकी बुवाई के लिए लगभग 15 हाथ लंबा का एक सीधा लकड़ी का डंडा ले लेते हैं, इस डंडे में दो-दो हाथ की दूरी पर फीता बांधकर निशान बना लेते हैं जिससे लाइन टेढ़ी न बने। दो हाथ की दूरी पर लम्बाई और चौड़ाई के अंतर पर गोबर की खाद का सीधे लाइन में गोबर की खाद घुरवा बनाते हैं जिसमे पेठे के सात से आठ बीजे गाड़ देते हैं अगर सभी जम गए तो बाद में तीन चार पौधे छोड़कर सब उखाड़ कर फेंक दिए जाते हैं।

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