Weather Alert: समझें रैन बैंड के कारण क्यों हो रही है बारिश? 25 मार्च के बाद फिर लौटेगा बारिश का दौर
Rain in UP: देश के कई हिस्सों में अचानक बदले मौसम, तेज बारिश, आँधी और ओलावृष्टि ने लोगों को चौंका दिया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस बार मौसम में आई इस तेज गतिविधि के पीछे “रेन बैंड” एक अहम कारण है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, यह एक ऐसा मौसमीय पैटर्न है जो कम समय में बड़े क्षेत्र में भारी असर डाल सकता है।
क्या होता है रेन बैंड?
रेन बैंड (Rain Band) दरअसल बादलों और बारिश की एक लंबी पट्टी होती है, जो सैकड़ों किलोमीटर तक फैली होती है। यह आमतौर पर चक्रवात, पश्चिमी विक्षोभ या साइक्लोनिक सर्कुलेशन के साथ बनती है। इस पट्टी के अंदर तेज बारिश, गरज-चमक, आँधी और कभी-कभी ओलावृष्टि भी होती है। जब यह किसी क्षेत्र से गुजरती है, तो वहां मौसम अचानक बिगड़ जाता है और कम समय में भारी वर्षा हो सकती है।
कैसे बनता है रेन बैंड?
रेन बैंड तब बनता है जब वातावरण में नमी, तापमान और हवा की दिशा में असंतुलन होता है। पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने पर अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी खिंचती है, जो बादलों के घने समूह बना देती है। बादलों का ये घना समूह एक लाइन या पट्टी के रूप में बढ़े होकर “रेन बैंड” का रूप ले लेते है। यह पट्टी आगे बढ़ते हुए कई राज्यों को प्रभावित करती है, जो बारिश, आँधी औऱ ओलावृष्टि के रूप में सामने आता है।
कहाँ-कहाँ सक्रिया रेन बैंड?
बादलों का ये समूह जिसे हम चक्रवात की कह सकते हैं, वो उत्तर-प्रदेश, पश्चिमी राजस्थान, हरियाणा, तटीय आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु-केरल के अंदरूनी हिस्सों में सक्रिय है। इसी कारण से पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी और मैदानी इलाकों में आँधी के साथ बारिश देखी जा रही है।
मौसम से क्या नुकसान हुआ?
हाल के दिनों में इस तरह के सक्रिय मौसम और रेन बैंड के कारण कई राज्यों में नुकसान की खबरें सामने आई हैं। तेज आँधी, बिजली गिरने और भारी बारिश की वजह से जनहानि भी हुई है। कई जगहों पर पेड़ गिर गए, बिजली आपूर्ति बाधित हुई और कच्चे मकानों को नुकसान पहुँचा। खेतों में खड़ी फसलें-खासकर गेहूं, सरसों और सब्जियाँ,ओलावृष्टि और तेज हवाओं से प्रभावित हुई हैं, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा है। उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य भारत के कुछ इलाकों में बिजली गिरने की घटनाओं में लोगों की मौत की खबरें भी आई हैं, जो इस तरह के मौसम की गंभीरता को दिखाती हैं। इसके अलावा, शहरों में जलभराव और ट्रैफिक बाधित होने जैसी समस्याएं भी सामने आईं।
फिर बदलेगा मौसम
रेन बैंड और लगातार सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण तापमान में भी तेज गिरावट दर्ज की गई है। कई इलाकों में दिन का तापमान सामान्य से काफी नीचे पहुँच गया, जिससे मार्च में भी ठंड का एहसास हो रहा है। हालांकि यह स्थिति अस्थायी है और आने वाले दिनों में धीरे-धीरे मौसम सामान्य होने की संभावना है। इस तरह का मौसम आमतौर पर दिसंबर से फरवरी के बीच पश्चिमी विक्षोभ के अधिक सक्रिय रहने के कारण होता हैं और मार्च खत्म होते-होते ये घटने लगता है।
ऐसे में मार्च को खत्म होने में अभी भी 10 दिन बाकी है और बदलते मौसम की गतिविधियाँ अभी भी जारी है। भारतीय मौसम विभाग की तरफ से जानकारी दी गई है कि सक्रिय मौसम का असर 25 मार्च तक सामान्य हो जाएगा लेकिन 26 से 28 मार्च तक बारिश और बर्फबारी फिर से होगी। देश के कई हिस्सों में आँधी-तूफान की संभावना भी बनी रहेगी।
सावधानी बरतने की सलाह
रेन बैंड एक सामान्य लेकिन प्रभावशाली मौसमीय प्रक्रिया है, जो कम समय में बड़े बदलाव ला सकती है। जहाँ एक ओर यह गर्मी से राहत देता है, वहीं दूसरी ओर तेज हवाओं, बिजली और ओलावृष्टि के कारण जान-माल का नुकसान भी कर सकता है। ऐसे में मौसम विभाग की चेतावनियों पर ध्यान देना और सतर्क रहना बेहद जरूरी है, खासकर किसानों और खुले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए।