चुनाव के बाद बढ़ सकती हैं तेल की कीमतें, कंपनियों को पेट्रोल पर ₹18/लीटर और डीजल पर ₹35 का हो रहा नुकसान: Macquarie रिपोर्ट

Gaon Connection | Apr 14, 2026, 19:07 IST
Image credit : Gaon Connection Network
भारत की सरकारी तेल कंपनियां भारी नुकसान में हैं। पेट्रोल पर 18 रुपये और डीजल पर 35 रुपये प्रति लीटर का घाटा हो रहा है। अप्रैल 2022 से कीमतें स्थिर हैं। चुनाव के बाद पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं। यह स्थिति अर्थव्यवस्था पर दबाव डाल सकती है।
पेट्रोल-डीजल की बढ़ सकती हैं कीमतें!

भारत की सरकारी तेल विपणन कंपनियां लगातार बढ़ते खर्च के बीच भारी नुकसान झेल रही हैं। बिजनेस स्टैंडर्ड ने वैश्विक ब्रोकरेज फर्म मैक्वेरी के हवाले से बताया है कि पेट्रोल पर घाटा 18 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 35 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है। इसके बावजूद अप्रैल 2022 से ईंधन की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जबकि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव जारी रहा है।



रोजाना हजारों करोड़ की चपत, टैक्स कटौती का सहारा

मैक्वेरी के मुताबिक, पिछले महीने कंपनियों को रोजाना करीब 2,400 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो रहा था, जो अब घटकर करीब 1,600 करोड़ रुपये प्रतिदिन रह गया है। सरकार द्वारा उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती का फायदा आम जनता को नहीं दिया गया, बल्कि इसे कंपनियों के घाटे को आंशिक रूप से कम करने में इस्तेमाल किया गया। मार्च में हुए नुकसान ने जनवरी-फरवरी की कमाई भी खत्म कर दी, जिससे चालू तिमाही में घाटे की आशंका बढ़ गई है।



चुनाव के बाद बढ़ सकते हैं दाम

मैक्वेरी ग्रुप की रिपोर्ट के अनुसार, 135-165 डॉलर प्रति बैरल के कच्चे तेल के स्तर पर कंपनियां पेट्रोल पर 18 रुपये और डीजल पर 35 रुपये प्रति लीटर का नुकसान उठा रही हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कच्चे तेल की कीमत में हर 10 डॉलर की बढ़ोतरी से प्रति लीटर करीब 6 रुपये का अतिरिक्त घाटा बढ़ जाता है। ऐसे में पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में चुनाव के बाद पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की संभावना जताई गई है।



आयात निर्भरता और अर्थव्यवस्था पर खतरा

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का करीब 88 प्रतिशत आयात करता है, जिससे वह वैश्विक कीमतों के उतार-चढ़ाव के प्रति बेहद संवेदनशील है। मौजूदा हालात में उत्पाद शुल्क को पूरी तरह हटाने पर भी कंपनियों का घाटा पूरी तरह खत्म नहीं होगा, जबकि इससे सरकार पर बड़ा राजकोषीय दबाव पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती तेल कीमतें चालू खाता घाटा बढ़ा सकती हैं और अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ डाल सकती हैं।

Tags:
  • petrol diesel loss India
  • OMC losses India 2026
  • petrol diesel price hike India
  • fuel price after elections India
  • पेट्रोल डीजल घाटा भारत
  • ओएमसी नुकसान 2026
  • ईंधन कीमत स्थिर भारत
  • मैक्वेरी रिपोर्ट ईंधन
  • कच्चा तेल असर भारत