ग्राम प्रधान और स्टाफ के सहयोग से बदल गई इस प्राथमिक विद्यालय की तस्वीर

देश के सबसे पिछड़े दस जिलों में शामिल सिद्धार्थनगर जिले के उसका बाजार का भिटिया ग्राम पंचायत ज़िले का पहला ओडीएफ गाँव है, इसी के साथ ही यहां का प्राथमिक विद्यालय भी किसी से कम नहीं।

Divendra SinghDivendra Singh   14 July 2018 10:35 AM GMT

ग्राम प्रधान और स्टाफ के सहयोग से बदल गई इस प्राथमिक विद्यालय की तस्वीर

उसका बाजार (सिद्धार्थनगर)। अच्छी शिक्षा, अच्छा माहौल, साफ-सुथरा स्कूल अभिभावकों को और क्या चाहिए, ऐसे में जब स्कूल की जि़म्मेदारी अभिभावकों के ही ऊपर ही आ जाती है, तो और ध्यान देते हैं। ऐसा ही ये प्राथमिक विद्यालय है जहां पर ग्राम प्रधान, विद्यालय प्रबंधन समिति व अध्यापकों के सहयोग से स्कूल चकाचक हो गया है।


देश के सबसे पिछड़े दस जिलों में शामिल सिद्धार्थनगर के उसका बाजार का भिटिया ग्राम पंचायत ज़िले का पहला ओडीएफ गाँव है, इसी के साथ ही यहां का प्राथमिक विद्यालय भी किसी से कम नहीं। साफ-सुथरा स्कूल, गीला और सूखा कूड़ा फेंकने के लिए अलग-अलग कूड़ेदान, साफ शौचालय व अच्छी पढ़ाई यहां सब है, इसका श्रेय जाता हैं, यहां की इंचार्ज जरीना बेग़म और दूसरे अध्यापकों को। इस प्राथमिक विद्यालय में प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी चार अप्रैल को दौरा कर चुके हैं।

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सिद्धार्थनगर ज़िले में 1916 प्राथमिक विद्यालय और 743 पूर्व माध्यमिक विद्यालय हैं, लेकिन ये जिले के कुछ चुनिंदा विद्यालयों में हैं जो इसे दूसरों विद्यालयों से अलग करता है।

प्राथमिक विद्यालय भिटिया की प्रधानाध्यापिका जरीना बेगम बताती हैं, "मेरा मायका यही उसका बाजार में है मैं हमेशा से चाहती थी कि कुछ अलग करूं, और मेरी पहली पोस्टिंग उसका बाजार में हुई और जब 2013 में प्रमोशन हुआ तो भिटिया प्राथमिक विद्यालय में इंचार्ज के रूप में नियुक्ति हुई तो मुझे लगा कि कुछ करना चाहिए, ऐसे में यहां का के दूसरे अध्यापक और ग्राम प्रधान का पूरा सहयोग भी मिला।"


आज सिद्धार्थनगर जिले का ऐसा कोई अधिकारी नहीं होगा जो इस विद्यालय में न आया हो, साथ ही कोई विधायक या मंत्री आता है तो इस विद्यालय को देखने जरूर आता है। यहां पर चार अप्रैल को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी स्कूल देखने आ चुके हैं।

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जरीना बताती हैं, "ग्राम प्रधान का भी पूरा सहयोग मिलता रहता है, उन्हीं के सहयोग से स्कूल की बिल्डिंग और दूसरे काम आसानी से हो जाते हैं, हमारे यहां पर मुझे मिलाकर कुल छह लोगों का स्टाफ है, जिसमें एक शिक्षामित्र भी हैं, वो भी पूरा सहयोग करते हैं, स्टाफ और ग्राम प्रधान का ही सहयोग है जो हमारा स्कूल आज दूसरों से बिल्कुल अलग है। अगर उन्हीं का सहयोग न मिलता तो मैं अकेले क्या कर पाती।"


जरीना बेगम ने अपने वेतन से स्कूल के सभी बच्चों को टाई-बेल्ट और आईकार्ड भी दिया है, साथ ही स्कूल में कोई जरूरत होती है तो सरकारी बजट का इंतजार नहीं करती बस आपसी सहयोग से सब हो जाता है। स्कूल में हर महीने विद्यालय प्रबंधन समिति की बैठक भी होती है, जिसमें स्कूल में जो कुछ कमी या सुझाव होता है, सभी सदस्यों के सहयोग से हो जाता है।

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ग्राम प्रधान सतीश चौधरी स्कूल के बारे में बताते हैं, "हमारा गाँव जिले का पहले ओएडीफ मुक्त गाँव है, इसमें गाँव वालों और अधिकारियों का भी पूरा सहयोग मिला, आज गाँव में कोई भी खुले में शौच नहीं जाता, सभी घरो में शौचालय बन गए हैं लोग उसी का उपयोग भी करते हैं। लोगों का ही सहयोग है कि हमारे गाँव का स्कूल भी सबसे अलग है। हमारी तो जिम्मेदारी होती है कि गाँव में विकास करें।"

बच्चों के लिए बनाए गए हैं चाइल्ड फ्रेंडली शौचालय


इस प्राथमिक विद्यालय में लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग शौचालय बनाए गए हैं, साथ ही छोटे बच्चों के लिए बेबी फ्रेंडली शौचालय बनाए गए हैं, जिससे छोटे बच्चों को कोई परेशानी न हो।

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साफ-सफाई का रखा जाता है विशेष ध्यान

अगर बच्चों को शुरू से ही साफ-सफाई का महत्व समझाया जाए तो यही बच्चे बड़े होकर दूसरों को सफाई का महत्व समझाते हैं। विद्यालय में गीला और सूखा कूड़ा फेकने के लिए अलग-अलग कूड़ेदान बनाए गए हैं।





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