जाने क्या करें गठिया रोगी
लखनऊ। सर्दियों के मौसम आते ही गठिया के मरीजों की दिक्कतें बढ़ जाती हैं। पहले गठिया के मरीज दादी, नानी ही होती थीं लेकिन अब युवाओं में भी ये परेशानियां हो रही हैं। इसका कारण मोटापा, तनाव और अनियमित जीवनशैली है। गठिया में क्या सावधानियां बरतनी चाहिए और क्या खानपान होना चाहिए।
इसके बारे में आर्थोपेडिक डॉ आर के यादव बताते हैं, ''ये कई तरह के होते हैं लेकिन सबसे ज्यादा ऑस्टियो आर्थराइटिस और रूमैटॉयड आर्थराइटिस गठिया। ऑस्टियो आर्थराइटिस 45 वर्ष के बाद ज्यादा होने की संभावना होती है। ये आमतौर पर घुटनों पर असर करता है। इसके अलावा कूल्हों, उंगलियों पर भी असर करता है। इसका कारण बदलती जीवनशैली है। जबकि गठिया कोहनी, कलाई, उंगलियों, कंधों, टखने और पैरों पर असर डालता है। ये आनुवांशिक भी होता है।’’
आर्थराइटिस केयर एंड रिसर्च पत्रिका में प्रकाशित शोध में माना गया है कि मोटापा और गठिया का गहरा संबंध है। मोटे लोगों में कम बीएमआई वाले व्यक्तियों की तुलना में इस बीमारी का अनुपात अधिक है। गठिया के 66 फीसदी मरीज मोटापे के शिकार हैं।
लक्षण
इसमें मरीजों के हाथ और पैरों में सूजन और दर्द रहने लगता है, हाथ, पैर मोडऩे और चलने फिरने में दर्द।
ये करें ---
व्यायाम करें
जिन मरीजों को आर्थराइटिस की बीमारी है, उन्हें रोज थोड़ा बहुत व्यायाम करना चाहिए। 10-15 मिनट का योग भी करें। इससे मांसपेशियां मजबूत हो जाती है। जब जोड़ों में लचीलापन होता है तो चोट लगने पर खतरा कम होता है।
खानपान पर ध्यान दें
मरीजों को अपने खान-पान पर भी ध्यान देना चाहिए। ओमैगायुक्तखाद्य पदार्थ मछली, अखरोट खाएं। अदरक, लहसुन, हल्दी, सोंठ आदि खाएं। हरी सब्जियां और विटामिन सी से युक्त फल संतरें, नींबू, मौसमी का सेवन करें। बादी पदार्थ जैसे कटहल, बैंगन, पत्तागोभी न खाएं। दिन भर में कम से कम 10 गिलास पानी जरूर पिएं।
वजन को नियंत्रित करें
वजन ज्यादा होने पर जोड़ों, कूल्हों, टखनों पर ज्यादा जोर पड़ता है। इसलिए अपने वजन को नियंत्रण में रखें।
ध्रूमपान न करें
धू्रमपान का असर हड्डियों पर भी पड़ता है, ये उन्हें कमजोर कर देती हैं। इसलिए शराब और सिगरेट का सेवन न करें।
धूप में बैठें
विटामिन डी शरीर के लिए बहुत जरूरी है, आर्थराइटिस के मरीजों को रोज कम से कम 20 मिनट धूप में बैठना चाहिए। जिन हिस्सों में दर्द है उस पर धूप से सिंकाई करें।
सावधानियां बरतें ---
ठंड से बचें
गठिया के मरीजों को सर्दियों में ज्यादा बचाव करने की जरूरत है। गर्म पानी से ही नहाएं और शरीर को गर्म रखने की कोशिश करें।
एक जगह पर न बैठें
मरीजों को ज्यादा देर तक एक ही पोजिशन में नहीं बैठना चाहिए बीच-बीच में अपनी जगह से उठते रहना चाहिए और हाथ पैरों को चलाते रहना चाहिए।
मालिश करें
किसी भी तेल से शरीर की खासकर जोड़ों की मालिश करते रहना चाहिए। अगर किसी हिस्से में सूजन आ गई हो तो उसकी अच्छे से सिंकाई करनी चाहिए। इससे खून का दौरा बढ़ जाता है।
पेनकिलर न खाएं
दर्द बढऩे पर ज्यादातर लोग पेनकिलर ले लेते हैं लेकिन ऐसा न करें। ये बाद में लीवर को नुकसान पहुंचाता है। इसलिए दर्द होने पर मालिश या सिंकाई करें बिना सलाह के दवाएं न लें।
चोट या अधिक मेहनत की वजह से जोड़ों में होनेवाली जख्मों से आगे चलकर ऑस्टिओआर्थराइटिस होने की संभावना बढ़ जाती है। जोड़ों के आस-पास की मांसपेशियों को मज़बूत रखने से जोड़ों में इस तरह टूट-फूट या घिसाई होने की आशंका कम हो जाती है।
इलाज
अर्थराइटिस का इलाज इस पर निर्भर करता है कि वो किस स्टेज पर है। दवा से भी इसे नियंत्रित किया जाता सकता है, इसके अलावा हड्डियों में इंजेक् शन लगाए जाते हैं। इन सबके बाद सर्जरी एक मात्र उपाय बचता है। ये भी दो तरह की होती है ये निर्भर करता है कि मरीज की दिक्कत कहां तक पहुंच गई है।