गर्भावस्था में पैरासिटामोल लेना है सुरक्षित, गर्भ में पल रहे बच्चे को नहीं होगा कोई नुकसान
क्या आपको भी लगता है गर्भावस्था में पैरासिटामोल लेना सुरक्षित नहीं है, या इसको लेने से गर्भ में पल रहे बच्चे को मानसिक बीमारियाँ हो सकती हैं तो आप गलत है, ये हम नहीं कह रहे वैज्ञानिकों का अध्ययन कहता है।
जब कोई महिला गर्भवती होती है और उसे बुखार, सिरदर्द या शरीर दर्द होता है, तो डॉक्टर अक्सर पैरासिटामोल लेने की सलाह देते हैं। यह दवा भारत में सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होने वाली दर्द और बुखार की दवा है। लेकिन पिछले कुछ सालों में कुछ रिपोर्टों की वजह से डर फैल गया था कि गर्भावस्था में पैरासिटामोल लेने से बच्चे को आगे चलकर ऑटिज़्म, ध्यान की कमी (ADHD) या दिमागी विकास की समस्या हो सकती है।
इसी डर को साफ करने के लिए वैज्ञानिकों ने एक बड़ा अध्ययन किया, जिसे दुनिया की प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल The Lancet में प्रकाशित किया गया।
इस नए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने दुनिया भर के 43 शोधों का विश्लेषण किया। इनमें लाखों माँ-बच्चों के डेटा को देखा गया। खास बात यह रही कि कुछ अध्ययनों में एक ही परिवार के बच्चों की तुलना की गई, यानी एक माँ के दो बच्चों में से एक को गर्भ में पैरासिटामोल मिला और दूसरे को नहीं। इससे यह समझने में मदद मिली कि असर दवा का है या परिवार और आनुवंशिक कारणों का।
इस स्टडी पर किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के फार्माकोलॉजी डिपार्टमेंट के विभागाध्यक्ष डॉ आरके दीक्षित बताते हैं, "प्रेग्नेंसी में भ्रूण में पल रहे बच्चे को ज़्यादातर दवाएँ नुकसान कर सकती हैं; क्योंकि गर्भ में पल रहा बच्चा इम्च्योर होता है, ऐसे में दवाएँ नुकसानदायक हो सकती हैं, इसलिए दवा देने के लिए मना किया जाता है।"
वो आगे कहते हैं, "अगर ज़्यादा परेशानी आती है तो ऐसी दवाएँ देने की सलाह दे सकते हैं जो गर्भ में पल रहे बच्चे तक न पहुँच पाए, जिससे उसे कोई नुकसान न पहुँचे।"
इस पूरी जांच के बाद वैज्ञानिकों का साफ निष्कर्ष है कि गर्भावस्था में डॉक्टर की सलाह से ली गई पैरासिटामोल से बच्चों के दिमागी विकास पर कोई नुकसान नहीं पाया गया। न तो ऑटिज़्म का खतरा बढ़ा, न ADHD का, और न ही सीखने की क्षमता पर कोई बुरा असर दिखा।
वैज्ञानिकों ने यह भी बताया कि पहले जो छोटे-मोटे खतरे दिखाए गए थे, वे अक्सर इसलिए थे क्योंकि उन अध्ययनों में यह नहीं देखा गया था कि माँ को बुखार या इंफेक्शन क्यों हुआ था। असल में कई बार बीमारी खुद बच्चे के विकास को प्रभावित कर सकती है, न कि दवा। जब इन सभी बातों को सही तरीके से जांचा गया, तो पैरासिटामोल को सुरक्षित पाया गया।
डॉक्टरों के लिए यह भी राहत की खबर है, क्योंकि पैरासिटामोल गर्भावस्था में सबसे सुरक्षित दवाओं में मानी जाती है। दूसरी दर्द की दवाएँ, गर्भ में ज्यादा नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसलिए आज भी मेडिकल गाइडलाइन में पैरासिटामोल को पहली पसंद की दवा माना जाता है।
एरा मेडिकल कॉलेज, लखनऊ की स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की हेड डॉ एसपी जैसवार कहती हैं, "ऐसा नहीं है कि पैरासिटामोल गर्भवती महिलाओं के लिए नुकसानदायक है; वैसे तो हम प्रेग्नेंसी में कोई भी दवा देने की सलाह नहीं देते हैं, लेकिन अगर ज़्यादा स्थिति खराब है तो हम पैरासिटामोल को ज़्यादा सुरक्षित मानते हैं।"
भारत जैसे देश में, जहाँ गाँवों और छोटे शहरों में महिलाएँ अक्सर बिना डॉक्टर से पूछे दवा ले लेती हैं, यह बात समझना ज़रूरी है कि डॉक्टर की सलाह से सही मात्रा में ली गई पैरासिटामोल सुरक्षित है। इसका मतलब यह नहीं कि दवा ज़रूरत से ज्यादा ली जाए। हर दवा सीमित मात्रा में ही सुरक्षित होती है।
इस स्डटी के अनुसार गर्भवती महिलाओं को बेवज़ह डरने की ज़रूरत नहीं है। अगर बुखार या दर्द है और डॉक्टर ने पैरासिटामोल दी है, तो यह माँ और बच्चे दोनों के लिए सुरक्षित मानी जाती है। सही इलाज समय पर मिलने से माँ स्वस्थ रहती है और बच्चे का विकास भी बेहतर होता है।
आज जब सोशल मीडिया पर अधूरी जानकारी तेजी से फैलती है, तब ऐसे वैज्ञानिक शोध यह भरोसा दिलाते हैं कि फैसले डर से नहीं, बल्कि विज्ञान और डॉक्टर की सलाह से लेने चाहिए।
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