युवाओं में बढ़ता हार्ट अटैक का खतरा, सर्दियों में विशेष सतर्कता ज़रूरी

Gaon Connection | Jan 14, 2026, 12:22 IST
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हाल के अध्ययनों से स्पष्ट है कि हार्ट अटैक अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि 18 से 45 वर्ष के युवाओं में भी तेजी से बढ़ रहा है। बदलती जीवनशैली, अनियमित खानपान, तनाव, धूम्रपान और शारीरिक निष्क्रियता इसके प्रमुख कारण हैं।

<p>समय-समय पर स्वास्थ्य जांच, ब्लड प्रेशर और शुगर की निगरानी, तथा कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखकर इन जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके बावजूद जागरूकता की कमी के कारण लोग शुरुआती लक्षणों को गंभीरता से नहीं लेते।<br></p>

हाल के वर्षों में हार्ट अटैक के मामलों में जिस तेजी से वृद्धि हुई है, उसने चिकित्सकों के साथ-साथ आम लोगों की चिंता भी बढ़ा दी है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) सहित कई प्रमुख संस्थानों की ओर से हाल ही में किए गए अध्ययनों में यह स्पष्ट हुआ है कि अब हार्ट अटैक केवल बुजुर्गों की बीमारी नहीं रह गई है। विशेष रूप से 18 से 45 वर्ष की आयु के युवाओं और वयस्कों में दिल के दौरे के मामलों में चिंताजनक बढ़ोतरी देखी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे सबसे बड़ा कारण जीवनशैली में आए बदलाव हैं।



आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में अनियमित खानपान, जंक फूड और तले-भुने भोजन की बढ़ती आदत, शारीरिक गतिविधियों की कमी, लगातार तनाव, धूम्रपान और शराब का सेवन, मोटापा, मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसे कारक दिल की सेहत पर गहरा असर डाल रहे हैं। यही कारण है कि कम उम्र में भी लोग हृदय रोग की चपेट में आ रहे हैं। एक बड़े वैश्विक अध्ययन, जिसमें लाखों वयस्कों को शामिल किया गया, यह सामने आया कि लगभग 99 प्रतिशत हार्ट अटैक और स्ट्रोक चार मुख्य जोखिम कारकों से जुड़े होते हैं। ये कारक हैं- उच्च रक्तचाप, उच्च कोलेस्ट्रॉल, बढ़ी हुई रक्त शर्करा और धूम्रपान। विशेषज्ञों का कहना है कि दिल का दौरा शायद ही कभी अचानक बिना किसी चेतावनी के आता है। अधिकांश मामलों में वर्षों पहले ही शरीर संकेत देने लगता है, लेकिन लोग इन्हें अनदेखा कर देते हैं।



समय-समय पर स्वास्थ्य जांच, ब्लड प्रेशर और शुगर की निगरानी, तथा कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखकर इन जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके बावजूद जागरूकता की कमी के कारण लोग शुरुआती लक्षणों को गंभीरता से नहीं लेते। आंकड़ों के अनुसार, हार्ट अटैक के सबसे अधिक मामले सर्दियों के मौसम में सामने आते हैं। तापमान गिरने के साथ ही शरीर में कई ऐसे बदलाव होते हैं, जो हृदय पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं। ठंड के मौसम में रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं, जिसे चिकित्सकीय भाषा में वासोकोनस्ट्रिक्शन कहा जाता है। इससे रक्तचाप बढ़ जाता है और दिल को सामान्य से अधिक मेहनत करनी पड़ती है। सर्दियों में खून थोड़ा गाढ़ा हो जाता है, जिससे ब्लड क्लॉट बनने की संभावना बढ़ जाती है। यही कारण है कि दिल की धमनियों में रुकावट का खतरा अधिक हो जाता है। एक शोध में यह भी पाया गया है कि छुट्टियों के मौसम में दिल के दौरे के मामलों में लगभग 25 प्रतिशत की वृद्धि होती है, जबकि इनसे होने वाली मौतों में 40 प्रतिशत तक इजाफा देखा गया है। दिसंबर का महीना दिल के मरीजों के लिए सबसे अधिक जोखिम भरा माना जाता है।



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ठंडी हवा शरीर के तापमान को बनाए रखना कठिन बना देती है। जब शरीर जल्दी-जल्दी गर्मी खोता है, तो हाइपोथर्मिया की स्थिति बन सकती है, जो हृदय की मांसपेशियों को नुकसान पहुंचा सकती है। इसके अलावा सर्दियों में वातावरण में ऑक्सीजन का घनत्व भी कम हो जाता है। ऐसे में हृदय को अधिक ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है, लेकिन सिकुड़ी हुई रक्त वाहिकाओं के कारण दिल तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। यही असंतुलन कई बार हार्ट अटैक का कारण बन जाता है। सर्दियों में शारीरिक निष्क्रियता और भावनात्मक तनाव भी बढ़ जाता है। लोग ठंड के कारण घर से बाहर कम निकलते हैं, व्यायाम कम हो जाता है और मानसिक तनाव बढ़ने लगता है। ये सभी कारक मिलकर दिल के दौरे के खतरे को और बढ़ा देते हैं।



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हार्ट अटैक के लक्षण हर व्यक्ति में एक जैसे नहीं होते। सबसे आम लक्षण सीने में तेज़ और असहनीय दर्द है, जो गर्दन, कंधे और बाएं हाथ तक फैल सकता है। कई बार यह दर्द जलन या भारीपन के रूप में महसूस होता है। पुरुषों में मतली, पसीना आना और चक्कर आने जैसे लक्षण अधिक देखे जाते हैं, जबकि महिलाओं में बिना किसी स्पष्ट कारण के अत्यधिक थकान, सांस फूलना और चक्कर आना जैसे असामान्य संकेत भी हो सकते हैं। ह्दय रोग विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सीने में दर्द या जलन कुछ मिनटों से अधिक समय तक बनी रहे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। समय पर अस्पताल पहुंचने से जान बचाई जा सकती है।



हृदय रोग विशेषज्ञों के अनुसार सर्दियों में कुछ सावधानियां अपनाकर हार्ट अटैक के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। मौसम के अनुसार पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनना जरूरी है। सिर, हाथ और पैरों को ठंड से बचाना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। यदि आप बाहर काम करते हैं, तो बीच-बीच में खुद को गर्म रखने के लिए ब्रेक लें। शराब का अधिक सेवन सीमित करें, क्योंकि शराब पीने के बाद शरीर को झूठी गर्माहट महसूस होती है, जिससे बाहर निकलते समय जोखिम बढ़ सकता है। मधुमेह, उच्च रक्तचाप और धूम्रपान जैसे जोखिम कारकों पर सख्त नियंत्रण रखें। दवाओं को नियमित रूप से लें और डॉक्टर की सलाह के बिना उन्हें बंद न करें।



दिल को स्वस्थ रखने के लिए नियमित दिनचर्या बेहद जरूरी है। रोजाना संतुलित और हृदय-अनुकूल आहार लें, जिसमें फल, सब्जियां, साबुत अनाज और कम वसा वाले खाद्य पदार्थ शामिल हों। अत्यधिक घी, तेल और चिकनाई वाले भोजन से दूरी बनाएं। सुबह कम से कम 30 मिनट तक हल्का व्यायाम या योग करें। तनाव को नियंत्रित करने के लिए ध्यान और प्राणायाम को दिनचर्या में शामिल करें। पर्याप्त नींद लेना भी उतना ही जरूरी है। नींद की कमी दिल पर सीधा असर डालती है। दिन में पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं ताकि शरीर में खून गाढ़ा न हो।



हालांकि घरेलू नुस्खे इलाज का विकल्प नहीं हैं, लेकिन नियमित देखभाल के रूप में ये लाभकारी साबित हो सकते हैं। सर्दियों में लहसुन का सेवन खून को पतला रखने में मदद करता है और ब्लॉकेज बनने का खतरा कम करता है। सुबह एक कली लहसुन पानी के साथ लेना फायदेमंद माना जाता है।रात में सोने से पहले हल्का गर्म हल्दी वाला दूध पीना भी दिल के लिए लाभकारी है। हल्दी में मौजूद एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण सूजन को कम करने में मदद करते हैं। ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे अखरोट, अलसी, बादाम और मछली का तेल भी हृदय स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हैं। सर्दियों में भाप लेना और गर्म पेय का सेवन करना सांस संबंधी समस्याओं को कम करता है। कफ और सांस फूलने की समस्या दिल पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती है, इसलिए इससे बचाव जरूरी है।



विशेषज्ञ मानते हैं कि हार्ट अटैक से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका जागरूकता है। समय पर जांच, लक्षणों की पहचान और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर दिल की बीमारियों को काफी हद तक रोका जा सकता है। दिल की सेहत को नजरअंदाज करना भविष्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। सर्दी हो या गर्मी, हृदय की देखभाल हर मौसम में ज़रूरी है, क्योंकि स्वस्थ दिल ही स्वस्थ जीवन की कुंजी है।



(देवेंद्र सिंह, राजस्थान के वरिष्ठ पत्रकार हैं)



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