यूपी : प्रदेश के सर्वश्रेष्ठ दूध उत्पादकों को किया गया सम्मानित   

Diti BajpaiDiti Bajpai   11 Oct 2017 7:25 PM GMT

यूपी : प्रदेश के सर्वश्रेष्ठ दूध उत्पादकों को किया गया सम्मानित   प्रतिदिन 450 लीटर दूध उत्पादन के लिए युवा पशुपालक वरुण सिंह को मिला प्रथम गोकुल पुरस्कार।

लखनऊ। तीस वर्षीय वरुण सिंह को वर्ष 2016-17 में प्रदेश में सबसे ज्यादा दूध उत्पादन करने के लिए सरकार की तरफ एक लाख रुपए की राशि मिली है। इस राशि को पाकर वरुण काफी खुश है। इस राशि से वह अपनी डेयरी में मशीनों को खरीद पाएंगे, जिससे वो और ज्यादा दूध उत्पादन कर सके।

लखनऊ स्थित गन्ना संस्थान में दुग्ध विकास विभाग की ओर प्रदेश में सबसे ज्यादा दूध उत्पादन करने वाले दूध उत्पादकों को सम्मानित किया। वर्ष 2015-16 और वर्ष 2016-17 के प्रदेश के 146 दुग्ध उत्पादकों को गोकुल पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जिसमें से 36 महिला दूध उत्पादक रही।

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प्रदेश के 146 दुग्ध उत्पादकों को किया गया पुरस्कृत।

" इस बार डेयरी में पैकेजिंग का काम शुरू करना है। पुरस्कार के इस पैसे मशीनों का इंतजाम करेंगे। ताकि अगली बार भी पहला पुरुस्कार जीत सकें।" ऐसा बताते हैं, वरुण सिंह। लखीमपुर जिले के धरौरा ब्लॅाक के बेलवामोती गाँव में लगभग एक एकड़ में इनकी डेयरी बनी हुई है। इस डेयरी वरुण के पास वरुण के पास 100 पशु (गाय-भैंस) हैं, जिनसे प्रतिदिन 450 लीटर दूध उत्पादन होता है।

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कार्यक्रम में मुख्य अतिथि दुग्ध विकास मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने वर्ष 2015-16 और वर्ष 2016-17 के दुग्ध उत्पादकों को सम्मानित किया गया। मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने कहा कि भारत वर्ष को अगर स्वास्थ्य बनाना है तो दूध उत्पादन बढ़ाना होगा। कई ऐसी कंपनियां है जो पराग कंपनी को हजम करना चाहती है। ये एक बिजनेस का तरीका है लेकिन किसानों को इससे समझना चाहिए। कि वो पराग को ही दूध दे। चौधरी ने आगे कहा, " देशी गाय के दूध में वृद्यि हो इसके जिले में जो देशी गाय से जो सबसे ज्यादा दूध उत्पादन करेगा उसको एक लाख की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी साथ ही नंद बाबा पुरुस्कार से नवाजा जाएगा।"

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फैजाबाद जिले के मिल्कीपुर तहसील के धमधुआ गाँव में रहने वाली राजपति देवी को वर्ष 2015-16 में प्रदेश में सबसे ज्यादा दूध उत्पादन करने के लिए सम्मानित किया गया। अशिक्षित होने के बावजूद राजपति यह मुकाम हासिल किया।

राजपति बताती हैं, ''डेयरी का पूरा काम देखते है बाहर का जितना काम होता है वो मेरे पति देखते हैं। अबकी बार आठवी बार पुरुस्कार मिला है मैं बहुत खुश हूं।'' राजपति की डेयरी में 70 से भी ज्यादा पशु है, जिनमें प्रतिदिन 300 लीटर दूध उत्पादन हो रहा है। "सबसे ज्यादा गाय के दूध का उत्पादन कर रहे है। जो भी राशि पुरुस्कार से मिलती है उससे अपनी डेयरी में पशु खरीदते है। इस बार मिल्किंग मशीन खरीदेंगे।" राजपति ने आगे बताया।

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बढ़ाएगी गई गोकुल पुरस्कार की राशि

प्रमुख सचिव दुग्ध विकास विभाग डॉ. सुधीर एम बोबडे ने बताया, "दूध उत्पादकों को प्रोत्साहन देने और पराग से अच्छा रिश्ता बनने के लिए वर्ष 2015-16 गोकुल पुरस्कार की राशि एक लाख रुपए थी जिसकों बढ़ाकर वर्ष 2016-17 ढेड़ लाख रुपए कर दिया गया। इसके अलावा दूसरे और तीसरे पुरस्कार की भी राशि को बढ़ाया गया है।"

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दूध उत्पादन में महिलाओं की भागीदारी

वर्ष 2015-16 और वर्ष 2016-17 के प्रदेश के 146 दुग्ध उत्पादकों को पुरस्कृत किया गया, जिसमें से 36 महिला दूध उत्पादक रही। प्रदेश में दुग्ध उत्पादन का कार्य ज्यादातर महिलाएं करती है लगभग तीस प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी गोकूल पुरस्कार में है।

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एक प्रतिशत से कम हिस्सा पराग का

दुग्ध विकास विभाग के मुताबिक प्रदेश में प्रतिदिन आठ करोड़ लीटर दूध उत्पादन हो रहा है लेकिन पराग को एक प्रतिशत से भी नीचे हिस्सा मिलता है। पराग को दूध कम मिलने का कारण डॅा बोबडे बताते हैं, ''दूध की दर प्रतिसर्धात्मक नहीं है। प्रदेश के किसी भी जिले में जो दूध का रेट अमूल जैसी प्राईवेट कंपनियां दे रही है। वहीं रेट पराग को भी देना होगा। इससे पराग को ज्यादा दूध मिल सकेगा। अगर दूध का रेट किसानों को मिलेगा तो दूध की गुणवत्ता भी अच्छी होगी।"

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डीपीएमसीयू से दूध मूल्य भुगतान में आएगी पारर्शिता

पीसीडीएफ से जुड़ी सहकारी क्षेत्र की दुग्ध समितियों में दूध दे रहे उत्पादकों को उचित मूल्य उनके बैंक खाते में सीधे दिलाने के हर में दुग्ध समिति में आधुनिक मशीन डेटा प्रोसेसिंग मिल्क कलेक्शन यूनिट ( डीपीएमसीयू) बनाई गई है। ''प्रदेश में अभी 800 डीपीएमसीयू बनाए गए है। आने वाले समय में इनकी संख्या आठ हजार से भी ज्यादा की जाएगी। डीपीएमसीयू के माध्यम से पूरी रिपोर्ट दुग्ध विकास मुख्यालय पर आती है।

स्थानीय जिले में जो रेट है उसी के हिसाब से दूध के मूल्य का भुगतान मुख्यालय द्वारा किया जा रहा है।" डॅा सुधीर बताया, ''छोटे दुग्ध उत्पादकों का बैंक से पैसे निकालने में दिक्कत न हो इसके लिए समितियों के सचिव या गाँव के ही किसी शिक्षित व्यक्ति को बैंकिग संवाददाता बनाऐंगे ताकि गाँव में ही नकद भुगतान मिल सके। डीपीएमसीयू का प्रयोग करने पर पशुपालकों को बोनस भी दिया जाएगा जो कागज़ों में मिलता था।"

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