अब पेट्रोल की छुट्टी? 100% एथनॉल ईंधन की तैयारी में सरकार, किसानों को होगा फायदा
देश में ईंधन के क्षेत्र में बड़ा बदलाव आने की तैयारी है। केंद्र सरकार 100 प्रतिशत एथनॉल आधारित ईंधन को बढ़ावा देने के लिए मोटर वाहन नियमों में संशोधन कर रही है। इस पहल का मकसद न सिर्फ पेट्रोल पर निर्भरता कम करना है, बल्कि किसानों की आय बढ़ाना और देश को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाना भी है। फिलहाल E20 यानी 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रित पेट्रोल पूरे देश में जारी रहेगा, लेकिन अब सरकार इससे आगे बढ़कर उच्च एथनॉल मिश्रण वाले ईंधनों और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देने की दिशा में कदम उठा रही है।
मोटर वाहन नियमों में बदलाव, E100 तक की तैयारी
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 27 अप्रैल को मोटर वाहन अधिनियम 1988 के तहत एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। इसमें केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 में संशोधन कर E85 तक सीमित प्रावधानों को बढ़ाकर E100 तक करने का प्रस्ताव है। साथ ही उत्सर्जन मानकों, ईंधन वर्गीकरण और तकनीकी शब्दावली में भी बदलाव किए जा रहे हैं, ताकि 100 प्रतिशत एथनॉल तक चलने वाले वाहनों को मंजूरी मिल सके।
ईंधन विकल्प बढ़ेंगे
सरकार ने पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण की सीमा E10 से बढ़ाकर E20 कर दी है और अब B100 बायोडीजल को भी शामिल करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा E25, E27, E35, E85 और E100 जैसे ईंधनों को वैकल्पिक रूप में लाने की योजना है। इससे उपभोक्ताओं को ईंधन के कई विकल्प मिलेंगे और भविष्य में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों का इस्तेमाल बढ़ेगा।
कैसे बनता है एथनॉल और क्यों है सस्ता ईंधन
एथनॉल एक प्रकार का रिन्यूएबल बायोफ्यूल है, जिसे गन्ने, मक्के, टूटे चावल और कृषि अपशिष्ट से तैयार किया जाता है। इसकी उत्पादन प्रक्रिया में इन कच्चे माल को प्रोसेस कर अल्कोहल तैयार किया जाता है, जिसे ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। पेट्रोल के मुकाबले एथनॉल की लागत कम होती है और भारत में इसकी कीमत लगभग 60 से 70 रुपये प्रति लीटर रहने का अनुमान है, जो इसे सस्ता और पर्यावरण के लिए बेहतर विकल्प बनाता है।
किसानों के लिए बड़ा मौका
एथनॉल उत्पादन बढ़ने से किसानों को सीधा फायदा मिलेगा क्योंकि गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों की मांग बढ़ेगी। इससे किसानों को बेहतर कीमत मिलेगी और उनकी आय में बढ़ोतरी होगी। सरकार की इस नीति से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ-साथ कृषि आधारित उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा।
फ्लेक्स-फ्यूल वाहन और इंफ्रास्ट्रक्चर की चुनौती
हालांकि E100 जैसे ईंधन के लिए खास फ्लेक्स-फ्यूल इंजन की जरूरत होगी, जो ज्यादा एथनॉल को सहन कर सकें। इसके लिए वाहन उद्योग को नई तकनीक अपनानी होगी और ईंधन वितरण ढांचे को भी विकसित करना होगा। इससे शुरुआती लागत और उपभोक्ता अपनाने को लेकर कुछ चुनौतियां सामने आ सकती हैं।
ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी पहले ही 100 प्रतिशत एथनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल करने की बात कह चुके हैं। इस दिशा में यह ड्राफ्ट नोटिफिकेशन एक अहम कदम माना जा रहा है। सरकार ने इसे 30 दिनों के लिए सार्वजनिक सुझावों के लिए खुला रखा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे देश की तेल आयात पर निर्भरता कम होगी और ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।