वैज्ञानिकों ने मेंढकों जैसा सोचने वाला न्यूरोमॉर्फिक सेंसर किया तैयार, नमी और रोशनी से होगा कंट्रोल, इन सेक्टर में आएगा काम

Gaon Connection | Apr 10, 2026, 14:05 IST
मेंढकों की अनोखी क्षमता के अध्ययन से प्रेरित होकर वैज्ञानिकों ने एक अभिनव न्यूरोमॉर्फिक सेंसर का निर्माण किया है। यह सेंसर वातावरण की नमी का अनुभव कर सकता है और इंसानी दिमाग जैसा कार्यशील है। इसमें सूचना का प्रोसेसिंग और संग्रहण करने की क्षमता है, जिससे ऊर्जा की खपत में कमी आएगी।
वैज्ञानिकों ने विक​सित किया उन्नत न्यूरोमॉर्फिक सेंसर​

वैज्ञानिकों ने मेंढकों से प्रेरणा लेकर एक ऐसा उन्नत न्यूरोमॉर्फिक सेंसर विकसित किया है, जो नमी के प्रति संवेदनशील है और मानव मस्तिष्क की तरह काम कर सकता है। यह सेंसर न केवल पर्यावरणीय बदलावों को महसूस करता है, बल्कि उसी डिवाइस में जानकारी को प्रोसेस और स्टोर भी कर सकता है, जिससे पारंपरिक इलेक्ट्रॉनिक्स की तुलना में ऊर्जा खपत और डेटा प्रोसेसिंग की जरूरतों में बड़ी कमी आ सकती है।



कहां हुआ शोध और क्या है खासियत

यह शोध विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के स्वायत्त संस्थान जवाहरलाल नेहरू उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र (JNCASR) के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया है। शोधकर्ताओं ने 1D सुपरमॉलिक्यूलर नैनोफाइबर पर आधारित इस सेंसर को विकसित किया है, जो जैविक तंत्रिका तंत्र की कार्यप्रणाली की नकल करता है। इस अध्ययन के परिणाम जर्नल ऑफ मैटेरियल्स केमिस्ट्री C में प्रकाशित हुए हैं।



क्यों बढ़ रहा है न्यूरोमॉर्फिक तकनीक का महत्व

दरअसल, पारंपरिक कंप्यूटिंग सिस्टम बढ़ती ऊर्जा खपत और डेटा प्रोसेसिंग की मांग से जूझ रहे हैं, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और एज कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में। ऐसे में न्यूरोमॉर्फिक इलेक्ट्रॉनिक्स का महत्व तेजी से बढ़ रहा है। यह तकनीक जैविक सिस्टम की तरह एक ही प्लेटफॉर्म पर सेंसिंग, मेमोरी और प्रोसेसिंग को एकीकृत करने का प्रयास करती है।



मेंढकों से मिली प्रेरणा और काम करने का तरीका

इस सेंसर के विकास की प्रेरणा क्रिकेट मेंढकों से मिली, जिनका व्यवहार नमी और प्रकाश के प्रति बेहद संवेदनशील होता है। वैज्ञानिकों ने पाया कि जैसे मेंढकों की गतिविधि आर्द्रता के अनुसार बदलती है, उसी तरह यह सेंसर भी नमी के स्तर में बदलाव के अनुसार अपनी प्रतिक्रिया बदलता है। इतना ही नहीं, यह डिवाइस पहले मिले संकेतों को कुछ समय तक “याद” भी रख सकता है, जो इसे मस्तिष्क जैसी कार्यप्रणाली के करीब ले जाता है।



भविष्य में कहां होगा उपयोग

शोधकर्ताओं ने बताया कि यह पहली बार है जब किसी न्यूरोमॉर्फिक उपकरण में आर्द्रता को प्राथमिक उत्तेजना के रूप में उपयोग किया गया है, जिससे सिनैप्टिक व्यवहार की नकल की जा सके। यह तकनीक भविष्य में स्मार्ट पर्यावरण निगरानी प्रणालियों, हेल्थकेयर डिवाइस, वियरेबल सेंसर, AI और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। साथ ही, यह ऊर्जा-कुशल और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील अगली पीढ़ी की इलेक्ट्रॉनिक तकनीकों के विकास की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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