रोज दूध पीने के बावजूद नहीं बन रही सेहत तो ये भी हो सकती है वजह ?

रोज दूध पीने के बावजूद नहीं बन रही सेहत तो ये भी हो सकती है वजह ?दूध दुहने के वक्त सावधानी बतरते की होती है जरुरत। 

लखनऊ। साफ दूध मानव स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित होता है। इसके सेवन से बीमारी का कोई खतरा नहीं रहता है। साफ दूध उत्पादन के लिए बहुत सी बातों जैसे स्वच्छ वातावरण और दुग्धशाला, साफ बर्तन, स्वच्छ एवं स्वस्थ पशु, स्वच्छ दूध दुहने का तरीका और साफ दूधिया होना आवश्यक है।

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बर्तन कैसा हो

दूध दुहने का बर्तन स्टेनलेस स्टील का होना चाहिए अगर नहीं है तो एल्यूमीनियम का भी प्रयोग कर सकते हैं। पीतल और तांबे का बर्तन बिल्कुल इस्तेमाल न करें। खुली बाल्टी के स्थान पर गुम्बदाकार छत वाली बाल्टी में दूध दुहना चाहिए।

  • दूध दुहने से लिए साफ बर्तन का प्रयोग करना चाहिए।
  • दूध दुहने के बाद बर्तन को साबुन/सोडा व गर्म पानी से धोना चाहिए। अगर बर्तन को राख से साफ करना हो तो दो-तीन बार पानी से धो लें।
  • बर्तन धोने के साफ पानी का इस्तेमाल करें।

वातावरण एवं दुग्धशाला कैसी हो

  • पशुपाला बनाते समय इस बात का ध्यान रखें कि उसमें हवा और प्रकाश का समुचित प्रबंध हो ताकि पशु उसमें सर्दी, गर्मी, बरसात में रह सके।
  • गायों एवं भैसों को सुबह और शाम दुहने के बाद दुग्धशाला को 2 प्रतिशत फिनाइलयुक्त पानी से धोना चाहिए ताकि प्रत्येक बार दुहने के पहले वह साफ और कीटाणुमुक्त रहे।
  • दुहते समय पशुओं को धूलयुक्त चारा नहीं देना चाहिए।

गाय से दूध दुहती महिला।

दूध दुहने से पहले क्या करें

  • दूध दुहने से पहले पशु का पिछला हिस्सा अच्छी तरह रगड़कर धो लें।
  • दुहने के पहले थनों को जीवाणुनाशक (एक बाल्टी पानी में एक चुटकी पोटेशियम परमैगनेट) घोल में साफ कपड़े से पोछ दे।
  • दूध दुहते समय पशु की पूंछ पैर से बांध दे जिससे पूंछ हिलाने से धूल, मिट्टी या गंदगी दूध में नहीं गिरे।
  • पशु के थनों की रोज़ जांच करें। अगर कोई दरार हो तो उसको साफ करके एंटीसेप्टिक क्रीम लगा दें और अगर थनों में सूजन हो या मवाद अथवा खून दूध के साथ आ रहा हो तो इसके लिए पास के पशु चिकित्सालय से संपर्क करे।

साफ दूध कैसे दुहें

  • दूध दुहने से पहले दूधिया को अपने हाथों को साबुन से अच्छी तरह साफ कर लेना चाहिए।
  • हाथ के नाखून समय-समय पर काटते रहें।
  • दूध को हाथ से ही दुहना चाहिए। दूध दुहने वाला व्यक्ति स्वस्थ होना चाहिए।

अगर दूधिया किसी बीमारी जैसे- कालरा, टायफाइड या टी.बी आदि से ग्रसित हैं तो बीमारी के कीटाणु दूध द्वारा स्वस्थ व्यक्ति में भी फैल सकते है।

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