Budget 2026: ‘नारियल संवर्धन योजना’ से बदलेगी खेती की तस्वीर

Divendra Singh | Feb 01, 2026, 12:06 IST
Image credit : Gaon Connection Network, Gaon Connection

Budget 2026 में नारियल किसानों के लिए बड़ी राहत का ऐलान किया गया है। सरकार पुराने नारियल बागानों के पुनरोपण, सफेद मक्खी जैसे कीटों के नियंत्रण, आधुनिक मशीनों और ड्रोन तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रही है।

<p>सरकार का लक्ष्य नारियल खेती को सिर्फ पारंपरिक फसल के रूप में नहीं, बल्कि एक आधुनिक एग्री-बिजनेस मॉडल के रूप में विकसित करना है।<br></p>

देश के लाखों नारियल किसानों के लिए बजट 2026 एक नई उम्मीद लेकर आया है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में घोषणा करते हुए कहा कि नारियल उत्पादन में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और उत्पादकता सुधारने के लिए सरकार एक नई नारियल संवर्धन योजना शुरू करने जा रही है। इस योजना का मकसद सिर्फ पैदावार बढ़ाना नहीं है, बल्कि नारियल खेती को ज्यादा टिकाऊ, लाभकारी और बाजार से जुड़ा बनाना है।



आज केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, गोवा और पूर्वोत्तर राज्यों में लाखों छोटे किसान नारियल पर निर्भर हैं। लेकिन कई इलाकों में बागान पुराने हो चुके हैं। पेड़ बूढ़े हो गए हैं, फल कम दे रहे हैं और रोगों का खतरा बढ़ता जा रहा है। ऐसे में किसानों की आमदनी रुक गई है। नई योजना के तहत सरकार ने साफ किया है कि मुख्य नारियल उत्पादक राज्यों में बेकार और कमजोर पेड़ों की जगह नई उन्नत किस्मों के पौधे लगाए जाएंगे, ताकि कम समय में ज्यादा उत्पादन मिल सके और किसानों की आमदनी बढ़े।



उत्पादन बढ़ाने और उत्पादकता में वृद्धि के उद्देश्य से लागू की गई नारियल संवर्धन योजना के तहत 3 करोड़ लोगों को लाभ मिलेगा, जिनमें 1 करोड़ किसान शामिल हैं।



यह पहल उन किसानों के लिए खास मायने रखती है जो सालों से पुराने पेड़ों पर निर्भर हैं और बार-बार नुकसान झेल रहे हैं। नए पौधे बेहतर किस्म के होंगे, जो रोगों के प्रति ज्यादा सहनशील होंगे और जलवायु बदलाव के असर को भी बेहतर तरीके से झेल सकेंगे। इससे न सिर्फ नारियल का उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि खेती का खर्च घटेगा और जोखिम भी कम होगा।



सरकार का फोकस केवल खेत तक सीमित नहीं है। बजट में भारतीय काजू और कोको (कोकोआ) के लिए भी एक विशेष कार्यक्रम का ऐलान किया गया है। इसका उद्देश्य भारत को कच्चे काजू और नारियल के उत्पादन के साथ-साथ प्रोसेसिंग में भी आत्मनिर्भर बनाना है। अभी तक बड़ी मात्रा में कच्चा माल विदेशों से आता है और प्रोसेसिंग के बाद उत्पाद महंगे दामों पर बिकते हैं। नई नीति के तहत देश में ही प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाई जाएगी, जिससे गाँवों में रोजगार पैदा होंगे और किसानों को अपने उत्पाद का बेहतर दाम मिलेगा।



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