Budget 2026: मत्स्य पालन को मिला रिकॉर्ड फंड

Divendra Singh | Feb 01, 2026, 15:46 IST
Image credit : Gaon Connection Network, Gaon Connection

Budget 2026 में सरकार ने मत्स्य पालन क्षेत्र को रिकॉर्ड 2,761 करोड़ रुपये का समर्थन दिया है। यह कदम देश की ब्लू इकोनॉमी को मजबूत करने और तटीय व ग्रामीण समुदायों की आमदनी बढ़ाने की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

<p>मछुआरों के लिए बजट 2026 खुशखबरी, PMMSY को 2500 करोड़, सीफूड प्रोसेसिंग को राहत<br></p>

केंद्रीय बजट 2026 में सरकार ने मत्स्य पालन क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए अब तक का सबसे बड़ा आर्थिक समर्थन देने का ऐलान किया है। इस बजट में मत्स्य क्षेत्र के लिए कुल 2,761.80 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिसमें से 2,530 करोड़ रुपये सीधे योजनाओं के जरिए मछुआरों और मछली पालकों तक पहुंचेंगे। यह कदम देश की ब्लू इकोनॉमी को मजबूत करने और तटीय व ग्रामीण समुदायों की आमदनी बढ़ाने की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।



सरकार की प्रमुख योजना प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) को इस बजट में फिर से केंद्र में रखा गया है। वर्ष 2026–27 के लिए इस योजना को 2,500 करोड़ रुपये का आवंटन मिला है, जिससे मछली उत्पादन, कोल्ड स्टोरेज, प्रोसेसिंग यूनिट, बाजार संपर्क और रोजगार सृजन को गति मिलेगी।



वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में घोषणा की कि देशभर में 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों का एकीकृत विकास किया जाएगा। इसका मकसद तटीय और अंतर्देशीय क्षेत्रों में मत्स्य पालन की पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करना है।



भारत में करीब 31.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फैले जलाशय मौजूद हैं, जो अंतर्देशीय मत्स्य पालन के लिए बड़ी संभावना रखते हैं। अब तक मिशन अमृत सरोवर के तहत देश में 68,827 अमृत सरोवर विकसित किए जा चुके हैं, जिनमें से 1,222 सरोवर सीधे मछली पालन से जुड़े हैं। इन जल स्रोतों से मछली उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ जल संरक्षण और स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिला है।



इस नई पहल के तहत स्टार्टअप्स, महिला समूहों और फिश फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन (Fish FPOs) को बाजार से जोड़ने पर खास जोर दिया जाएगा, ताकि मछुआरों को बेहतर दाम और सीधी बिक्री का मौका मिल सके।



सरकार का फोकस अब केवल मछली पकड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी सप्लाई चेन को मजबूत करने पर है। इसमें उत्पादन से लेकर प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, मार्केटिंग और निर्यात तक की व्यवस्था शामिल है।



Image credit : Gaon Connection Network


इस योजना के तहत करीब 200 मत्स्य स्टार्टअप्स को सहयोग दिया जाएगा। इसके अलावा 34 प्रोसेसिंग और उत्पादन क्लस्टर विकसित किए जाएंगे, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ेगा और पोस्ट-हार्वेस्ट नुकसान कम होगा। इससे मछुआरों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने की संभावना है।



सरकार का अनुमान है कि इन प्रयासों से करीब 50 लाख मछुआरों, मछली पालकों और तटीय श्रमिकों को सीधा लाभ मिलेगा।



बजट 2026–27 में एक अहम फैसला यह भी लिया गया है कि भारतीय जहाजों द्वारा EEZ (एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक ज़ोन) और खुले समुद्र में पकड़ी गई मछली को ड्यूटी फ्री किया जाएगा। इसके अलावा अगर यह मछली विदेशी बंदरगाहों पर उतारी जाती है, तो उसे निर्यात (Export) माना जाएगा।



ये भी पढ़ें: Budget 2026: किसानों के लिए ‘भारत विस्तार AI’ प्लेटफॉर्म, अब होगी स्मार्ट और टेक्नोलॉजी आधारित खेती



इससे मछुआरों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सीधे पहुंच मिलेगी और उनकी कमाई बढ़ेगी। सरकार ने यह भी साफ किया है कि ट्रांजिट और ट्रांसशिपमेंट के दौरान किसी तरह के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए सख्त निगरानी व्यवस्था लागू की जाएगी।



भारत के पास 11,099 किलोमीटर लंबा समुद्री तट और करीब 24 लाख वर्ग किलोमीटर का EEZ क्षेत्र है। यह क्षेत्र लाखों मछुआरों के लिए रोज़गार का आधार है और देश की ब्लू इकोनॉमी में अहम भूमिका निभाता है।



निर्यात बढ़ाने के लिए सरकार ने सीफूड प्रोसेसिंग यूनिट्स को भी राहत दी है। अब प्रोसेसिंग के लिए जरूरी इनपुट्स के ड्यूटी फ्री आयात की सीमा 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 3 प्रतिशत कर दी गई है।



इससे प्रोसेसिंग यूनिट्स की लागत कम होगी, अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों को पूरा करना आसान होगा और यूरोप, जापान, ब्रिटेन, दक्षिण कोरिया जैसे बड़े बाजारों में भारतीय सीफूड की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।



भारत का मत्स्य पालन क्षेत्र पिछले एक दशक में तेज़ी से बढ़ा है। वर्ष 2014–15 के बाद से इस सेक्टर की औसत वार्षिक वृद्धि दर 7.87 प्रतिशत रही है, जो कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों में सबसे अधिक है।



मछली उत्पादन 95.79 लाख टन से बढ़कर 197.75 लाख टन तक पहुंच चुका है। वहीं, अंतर्देशीय मत्स्य पालन और एक्वाकल्चर में 147 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।



सीफूड निर्यात भी दोगुना होकर 30,213 करोड़ रुपये से बढ़कर 62,408 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। खासतौर पर झींगा उत्पादन में जबरदस्त उछाल आया है, जिससे युवाओं और महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ी है।



ये भी पढ़ें:Budget 2026: सहकारी समितियों को बड़ी राहत, किसानों और पशुपालकों को मिलेगा सीधा लाभ

Tags:
  • Budget 2026 fisheries
  • मत्स्य पालन बजट 2026
  • PMMSY योजना
  • अमृत सरोवर योजना
  • fisheries budget India
  • Blue Economy India
  • fish farming India
  • seafood export India
  • fish farmers scheme
  • inland fisheries development