बिहार के इस गांव में लोग खुद आगे आकर लगवा रहे वैक्सीन और करवा रहे कोरोना टेस्ट

देश के अलग-अलग हिस्सों से खबरें आती रहती हैं कि लोग टीका नहीं लगवा रहे हैं, या फिर कोरोना की जांच नहीं करा रहे है, लेकिन बिहार की इस ग्राम पंचायत ने इसे झुठला दिया है। यहां स्वास्थ्य विभाग की मदद से मुखिया और कई जागरूक ग्रामीण, लोगों की जांच भी करा रहे हैं और उन्हें टीका लगवाने के लिए प्रेरित भी कर रहे हैं।

Divendra SinghDivendra Singh   11 May 2021 1:54 PM GMT

बिहार के इस गांव में लोग खुद आगे आकर लगवा रहे वैक्सीन और करवा रहे कोरोना टेस्ट

गाँव में लगे कैंप में कोविड का टीका लगवाते ग्रामीण। सभी फोटो: अरेंजमेंट

"हमारी पंचायत में ऐसा कोई वॉर्ड नहीं, जहां पर अभी तक कैंप नहीं लगा है। इसमें कहना गलत नहीं है, जो आदमी पढ़े लिखे हैं वो ज्यादा आगे आ रहे हैं। कुछ लोग तो खुद से वैक्सीनेशन और जांच के लिए आ रहे हैं। हालांकि कुछ लोगों ने समझाने के बाद पहला डोज ले ले लिया, लेकिन अब दूसरा डोज नहीं ले रहे हैं, "यह कहना है कैथी बनकट गाँव के मुखिया संतोष कुमार का।

कैथी बनकट गाँव में 3 अप्रैल से 8 मई तक चार बार कोविड वैक्सीनेशन कैंप और पांच बार जांच के लिए कैंप लग चुका है। ऐसा हो पाया है यहां के मुखिया और ग्रामीणों की मदद से। यही वजह है कि शहर में स्लॉट नहीं मिलने पर लोग अब गांव में आकर वैक्सीनेशन करा रहे हैं।

प्रमोद कुमार अपने गाँव से लगभग 50 किमी दूर गया में रहते हैं, लेकिन कोविड वैक्सीनेशन के लिए वो अपने गाँव में लगने वाले कैंप में आ गए। 56 वर्षीय प्रमोद कुमार बिहार के औरंगाबाद जिले के हसपुरा ब्लॉक के कैथी बनकट गाँव में लगे कैंप में टीका लगवाने आए थे। प्रमोद कुमार शहर से इतनी दूर टीका लगवाने के सवाल पर कहते हैं, "शहर में जांच और वैक्सीन के लिए लंबी लाइन लगानी पड़ती है, लेकिन गाँव में आसानी से टीका लग गया।"

कैथी बनकट गाँव में अब तक चार बार वैक्सीनेशन कैंप लग चुका है।

कैथी बनकट ग्राम पंचायत में कुल 14 वॉर्ड हैं, पंचायत के मुखिया के साथ ही लोग भी जागरूक हैं। उन्हीं में से एक सुधीर कुमार भी है। वो घर-घर जाकर लोगों को समझाते हैं। गाँव कनेक्शन ने जब उनसे बात की तो उस दिन भी वो लोगों को टीकाकरण कैंप लेकर जा रहे थे।

पूरी प्लानिंग के साथ लगाया जा रही वैक्सीन

सुधीर कुमार बताते हैं, "अभी आज (8 मई) भी वैक्सीनेशन कैंप लगा था। हमारे ब्लॉक की चिकित्सा प्रभारी और बीडीओ ने पूरा प्लान बनाया है कि किस तरह से गाँव-गाँव जाकर लोगों की जांच की जाए और वैक्सीन लगाई जाए। इसलिए हम भी उनकी मदद के लिए आगे आ गए हैं। हमारे ब्लॉक में जितने भी गाँव हैं, उनके मुखिया को कैंप का काम सौंपा गया है। क्योंकि हमारे मुखिया एक्टिव हैं। इसलिए हमारी पंचायत में कैंप लग पा रहे हैं।"

गाँव में लग रहे वैक्सीनेशन कैंप के बारे में सुधीर कुमार कहते हैं, "हमारे गाँव में पहले अप्रैल में तीन बार 2 से 4 अप्रैल तक वैक्सीनेशन कैंप लगा था। उसके बाद फिर आज 8 मई को कैंप लगा। गाँव में तो लोग इस समय गया और औरंगाबाद से भी टीका लगवाने आ रहे हैं। प्रमोद कुमार भी गया से आए थे, बता रहे थे कि शहर में बहुत भीड़ रहती है, इसलिए यहां आ गए।"

वैक्सीनेशन के लिए ग्रामीणों को दूर नहीं जाना पड़ता है।

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हसपुरा के अनुसार हसपुरा ब्लॉक के गाँवों में सात मई तक 6916 लोगों का वैक्सीनेशन हुआ है, जबकि 31842 कोरोना टेस्ट हुए हैं. जिनमें से 237 पॉजिटिव पाए गए।बनकट ग्राम पंचायत के 14 वार्ड की आबादी 10,000 के करीब है, जिसमें 45-60 वर्ष की आबादी 3500 के लगभग है, जिसमें से अब तक 1700 लोगों को वैक्सीन लग गई है। 18 से 44 वर्ष को भी वैक्सीन लगने लगी है, जिनकों मिलाकर 2100 के करीब वैक्सीन लग गई है।

बिहार में कुल 79,90,481 लोगों का वैक्सीनेशन हुआ है, इसमें से पहला डोज 64,44,938 लोगों को लगा है, जबकि 15,45,543 लोगों को दूसरा डोज दिया गया है।

अभी जागरूकता की और है जरूरत

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हसपुरा की प्रभारी डॉ मीना राय के अनुसार सभी लोगों को और जागरूक होना पड़ेगा। तभी लोग वैक्सीन लेने या फिर कोरोना जांच के लिए आगे आएंगे। अपने ब्लॉक के गाँवों की स्थिति के बारे में डॉ राय कहती हैं, "अभी भी बहुत से लोग हैं, जो वैक्सीन लेना ही नहीं चाह रहे हैं, लेकिन अभी तक बनकट गाँव में ही सबसे ज्यादा वैक्सीनेशन और जांच हुई हैं। बाकी जगह भी ठीक है, लेकिन इतना अच्छा रेस्पॉन्स नहीं है।"

वो आगे कहती हैं, "हम कुछ पंचायत या गाँव को सेलेक्ट करते हैं और उसके बाद दूसरे दिन दूसरे गाँव में जाते हैं। ऐसे हर दिन किसी न किसी गाँव में हम जाते रहते हैं। कई गाँव में तो लोग सुनना ही नहीं चाहते। अभी एक गाँव मवारी में एक भी वैक्सीन नहीं लगी है। उसके बाद दिलावर गए, वहां भी किसी ने वैक्सीन नहीं ली है। मवारी ग्राम में तो लोगों ने बिल्कुल मना कर दिया कि हमें लेना ही नहीं है। ऐसे में हम क्या कर सकते हैं। वहां की सिस्टर (एएनएम) को भी कई बार बोला कि आप थोड़ा सा कोशिश कीजिए, शायद कोई मान जाए, लेकिन रिजल्ट कुछ नहीं आया।"


"लेकिन ऐसा भी नहीं है कि लोग बिल्कुल नहीं सुन रहे, कुछ गाँव अच्छा कर रहे हैं, इसमें वहां के लोग, मुखिया और वार्ड मेंबर का सहयोग सबसे ज्यादा जरूरी होता है। बनकट के मुखिया के साथ गाँव वाले भी जागरूक हैं, तभी वहां कैंप लग रहे हैं, "डॉ मीना राय ने आगे कहा।

बिहार में अब तब 6,01,650 कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं, जिनमें से 4,93,189 लोग ठीक हो गए, जबकि 1,05,103 अभी एक्टिव मरीज हैं। पूरे प्रदेश में कोरोना से मरने वालों की संख्या 3,357 है।

पॉजिटिव केस आने पर बनाया कंटेनमेंट जोन

बनकट ग्राम पंचायत में कुल 14 वॉर्ड हैं। यहां के एक वॉर्ड में अप्रैल में कोरोना पॉजिटिव केस मिले थे। मुखिया बताते हैं, "कई घरों में कोरोना मरीज मिले थे। पीएचसी में बताया तो 100 लोगों की जांच हुई, जिसमें से पहली बार 17 लोग पॉजिटिव निकल आए। उसके बाद भी कई बार जांच हुई, अभी तक 25-30 लोग पॉजिटिव निकले होंगे।"

कोरोना के संक्रमण को बढ़ने से रोकने के लिए वॉर्ड को कंटेंटमेंट जोन तो बनाया ही गया, साथ ही लोगों को समझाया भी गया। संतोष कुमार कहते हैं, "जिन घरों में कोरोना पॉजिटिव लोग निकले सबसे कहा गया कि आप आइसोलेट हो जाए। कहीं जाने की जरूरत नहीं। अगर कोई जरूरत होगी तो हमें बताइए, हम उसे पूरा करने की कोशिश करेंगे। बाहर के लोगों को भी सूचना दे दी गई कि उनके संपर्क में न रहें।"


"प्रशासन की तरफ से आदेश है कि कंटेनमेंट जोन बनाया जाए, लेकिन अब लोग खुद से जागरूक हो रहे हैं, अब लोग ठीक भी हो गए हैं, लोग घर पर रहकर ही ठीक हो गए। जितने लोग पॉजिटिव थे, उन्हें किट दे दी गई, बहुत से लोगों ने खुद से भी दवा मंगाई। स्वास्थ्य विभाग से सभी के पास फोन आया, उन्हें डाइट भी बताई गई।" मुखिया ने आगे बताया।

सुधीर कुमार कहते हैं, "अभी तक गाँव में 230 लोगों का एंटीजन टेस्ट हुआ था। 75 लोगों की आरटी पीसीआर जांच हुई। इनमें से कई लोग पॉजिटिव निकले, जो अब पूरी तरह से ठीक हो गए हैं।"

औरंगाबाद की अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. निर्मला कुमारी बताती हैं, "मुखिया के साथ ही, बीडीओ, सीडीपीओ की मदद ली जा रही है। जहां वैक्सीनेशन के लिए कोई नहीं तैयार है उस जिले में एक टीम बनाई गई है, वो वहां जाकर लोगों को समझा रही है।"

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