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गांवों तक पहुंचा कोरोना, गांव के गांव बुखार से पीड़ित, मेडिकल स्टोर के सहारे इलाज

कोरोना की पहली लहर में गांव बच गए थे, लेकिन इस बार गांवों से बुखार-खांसी जैसी समस्याएं ही नहीं बल्कि मौतों की लगातार खबरें आ रही हैं। पिछली बार शहर से लोग भागकर गांव गए थे, लेकिन इस बार गांव के हालात भी बद्तर होते जा रहे हैं।

Arvind ShuklaArvind Shukla   1 May 2021 12:07 PM GMT

गांवों तक पहुंचा कोरोना, गांव के गांव बुखार से पीड़ित, मेडिकल स्टोर के सहारे इलाज

पिछले साल कोरोना बड़े शहरों तक सीमित था, कस्बों और गांवों के बीच कहीं-कहीं लोगों के बीमार होने की खबरें आती थी, यहां तक की पिछले साल लॉकडाउन में डेढ़ करोड़ से करीब प्रवासियों के शहरों से देश के गांवों में पहुंचने के बीच कोरोना से मौतों की सुर्खियां बनने वाली खबरें नहीं आई थीं, लेकिन इस बार कई राज्यों में गांव के गांव बीमार पड़े हैं, लोगों की जानें जा रही हैं, हालांकि इनमें से ज्यादातर मौतें आंकड़ों में दर्ज नहीं हो रही हैं, क्योंकि टेस्टिंग नहीं या या लोग करा नहीं रहे।

"पिछले साल मुश्किल से किसी गांव से किसी व्यक्ति की मौत की खबर आती थी। लेकिन इस बार हालात बहुत बुरे हैं। मैं आसपास के 50 किलोमीटर के गांवों में काम करता हूं। आए दिन किसी का अंतिम संस्कार करता हूं, गांवों में ज्यादातर घरों में कोई न कोई बीमार है।" महाराष्ट्र में लातूर जिले के गौस शेख कहते हैं।

गौस शेख की बात इसलिए महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि वो और उनके साथी पिछले डेढ़ महीने में महाराष्ट्र के उदगीर तालुका में 152 से ज्यादा लोगों का अंतिम संस्कार कर चुके हैं, जिनमें से कम से कम 50 लोग गांव से थे।

बाराबंकी के खैरा गांव में कई लोग बुखार खांसी से पीड़ित हैं। फोटो: अरविंद शुक्ला

महाराष्ट्र के लातूर से करीब 1400 किलोमीटर दूर राजस्थान के बीकानेर जिले में पलाना गांव है। इस गांव के एक किसान आशुराम गोदारा (38 वर्ष) जो खुद घर में आइसोलेट होकर अपना इलाज करा रहे हैं, उऩके मुताबिक गांव में 70-80 लोग कोविड पॉजिटिव हैं। आशुराम फोन पर गांव कनेक्शन को बताते हैं, "मैं खुद कोरोना पॉजिटिव हूँ, गांव में ज्यादातर घरों में लोगों को बुखार-खांसी की दिक्कत है। पहले गांव में छिटपुट केस थे, फिर जब 5-6 लोग पॉजिटिव निकले तो सरकार की तरफ से एक वैन आई और उसने जांच किया तो 80 के करीब लोग पॉजिटिव मिले हैं। "

बीकानेर जोधपुर एनएच- 89 के किनारे बसे इस गांव की बीकानेर शहर से दूरी 21 किलोमीटर है और यहां की आबादी गोदारा के मुताबिक करीब 4000 है। गांव में ऐसा क्या हुआ कि इतने लोग बीमार हो गए, इस सवाल के जवाब में गोदारा बताते हैं, "सबसे पहले तो गांव में एक दो बारातें आईं फिर 23-24 अप्रैल को यहां आंधी पानी (बारिश) आया था, जिसके बाद लोग ज्यादा बीमार हुए। शुरू में लोगों को लगा मौसमी बुखार है लेकिन की लोगों को दिक्कत होने पर जांच हुई तो पता चला कोरोना है, ज्यादातर लोग घर में ही इलाज करा रहे हैं"

कोरोना का कहर सिर्फ महाराष्ट्र और राजस्थान में ही नहीं है, यूपी और बिहार में स्थितियां बदतर हो रही हैं। बीकानेर से करीब 1000 किलोमीटर दूर उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के बेरूई गांव में रहने वाले अनूप कुमार सिंह की मां और पिता जी की मौत 12 घंटे के अंदर एक ही दिन में हो गई। दोनों की कोविड जांच नहीं हुई थी लेकिन उनमें कोरोना के लक्षण थे।

गांव में जागरूकता के नाम पर कुछ ऐसे बैनर और दीवारों पर नारे दिए गए। फोटो: अरविंद शुक्ला

अनूप गांव कनेक्शन को फोन पर बताते हैं, "जांच तो नहीं कराई थी लेकिन लक्षण कुछ जरूर थे, "हम झूठ काहे (क्यों) बोली। अम्मा लखनऊ में थी, वहां के हालात तो पता ही हैं कैसे हैं। फिर कुछ तबीयत खराब लगी तो अम्मा बोली घर ले चलो। यहां लाए डॉक्टर को बुलाए, ऑक्सीजन का इंतजाम किया। लेकिन वायरस हावी हो गया था। 26 तारीख (अप्रैल) को रात में तीन बजे अम्मा और फिर दोसरे दिन (27 अप्रैल) एक बजे पिता जी चले।"

अनूप के मुताबिक पिता ज्वाला सिंह (72 वर्ष) और मां विमला देवी एक दूसरे के साथ ही रहे आखिरी वक्त में। पिता जी मां की सेवा करते हुए जरुर बीमार हुए होंगे। अनूप कहते हैं, "हम तो अपना पूरा घर सैनेटाइजर करवाए रहन, मास्क पहनत रहन। अब बीमारी ऐसी है कि का कहा जाए, गांव में कई घरों में लोगों को बुखार है। खुद हमारी पत्नी को बुखार था, जो पैर में उतर गया। ज्याततर लोग लोग मेडिकल स्टोरी दवा ला रहे।"

भारत में कोरोना का आंकड़ा 1 मई को 24 घंटे में 4 लाख को पार कर गया। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार 1 मई को भारत में 24 घंटे में कोरोना संक्रमण के 4,01,993 नए मामले आए हैं, जबकि 3523 लोगों की मौत हुई है। देश में अब पॉजिटिव मामलों की संख्या 1,91,64,969 हो गयी है।


सरकारी आंकड़ों में अनूप के मां-पिता जी का जिक्र नहीं है और ना ही उनके गांव के बीमार लोगों के आंकड़े दर्ज हैं। क्योंकि इनमे से किसी की जांच नहीं हुई थी।

मुंबई में रहने वाले स्वास्थ्य कार्यकर्ता और जनस्वास्थ्य अभियान से जुड़े रवि दुग्गल फोन पर गांव कनेक्शऩ को बताते हैं, "कोरोना जो डाटा है वो ज्यादातर शहरों का ही होता है। गांव में तो पब्लिक हेल्थ सिस्टम बद्तर है। जांच टेस्टिंग की सुविधाएं नहीं हैं। लोगों की मौत हो भी रही है तो पता नहीं चल रहा, दर्ज नहीं हो रही कहीं। दूसरा अगर आप शहरों की स्थितियां देखिए तो जो डाटा हम लोगों तक आ रहा है वो बता रहा है कि शहरों में ही मौतें आंकड़ों से कई गुना ज्यादा है। अगर ग्रामीण भारत में सही से जांच हो, आंकड़े दर्ज किए जाएं तो ये नंबर कहीं ज्यादा होगा।"

ग्रामीण भारत में हालात कैसे इसका अंदाजा छोटे-छोटे कस्बों के मेडिकल स्टोर और इन जगहों पर इलाज करने वाले डॉक्टरों (डिग्री धारी और गैर डिग्री वाले, जिन्हें बोलचाल की भाषा में झोलाछाप कहा जाता है) के यहां भीड़ से लगाया जा सकता है। यूपी जैसे राज्यों मे ब्लॉक और तहसील पर स्थित पीएचसी और सीएचसी में ओपीडी पहले से बंद है।

गाँवों और कस्बों के मेडिकल स्टोर्स पर इस समय सबसे ज्यादा खांसी-बुखार की दवाएं लेने आ रहे हैं। फोटो: अरविंद शुक्ला

अनूप के गांव के निकटतम कस्बे सूरतगंज (बाराबंकी) में एक मेडिकल स्टोर के संचालक अमित कुमार बताते हैं,"रोज के 100 लोग बुखार और बदन दर्द की दवा लेने आ रहे हैं। पिछले साल इन दिनों के मुकाबले ये आंकड़ा काफी ज्यादा है।"

कोविड-19 से जुड़ी दवाएं तो अलग बात है, बुखार की पेरासिटामोल, विटामिन सी की टैबलेट और यहां तक की खांसी के अच्छी कंपनियों के सिरप तक नहीं मिल रहे हैं। ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में एक बड़ी दिक्कत ये भी है कि खांसी और बुखार को लोग सामान्य फ्लू मानकर चल रहे हैं।

अनूप के गांव बरुई से कोई 7-8 किलोमीटर पर बाराबंकी जिले में ही पल्हरी गांव है, गांव में करीब 10 घर हैं, और हर घर में कोई न कोई बीमार है। पिछले दिनों यहां एक बुजुर्ग व्यक्ति की बुखार के बाद मौत भी हो गई थी।

65 साल के बड़कन अपने घर में जालीदार गेट को पकड़े काफी देर से खड़े थे, उनकी आवाज और चेहरे की मायूसी बता रही था कि वो हताश हैं। हों भी क्यों न, उनके घर से 1 घर छोड़कर एक बुजुर्ग की मौत हुई थी। बड़कन और उनकी पत्नी 15 दिनों से बीमार हैं। जिनके यहां मौत हुई वो इनके परिवार के ही थी।

हाल पूछने पर बड़कन कहते हैं, "15 दिन से दवा चल रही कोई फायदा ही नहीं हो रहा, अब क्या कहें।"

बड़कन की बात खत्म होने से पहले उनसे करीब 15 फीट की दूरी पर खड़े अमरेश शुक्ला (57 वर्ष) बीच में बोल पड़ते हैं, "अरे बीमार तो सब हैं लेकिन भैया हियां (यहां) कोई केरे कोरोना नाई है। और जांच कराना भी चाहो तो कहां जाए, अस्पताल में न दवा है और ऑक्सीजन। घर में रोज काढ़ा और भाप ले रहे हैं, बुखार की दवा खाई है, अब सब लोग ठीक है। और मौत आई होई तो मरब नई तो कोई मारय वाला पैदा नाई है।"

गाँव वालों की माने तो इस समय मेडिकल स्टोर के सहारे ही उनका इलाज चल रहा है।

रवि दुग्गल के मुताबिक भारत में जन्म का रिकॉर्ड लगभग 100 फीसदी होगा लेकिन मृत्यु के मामले में कई राज्य बहुत फिड्डी है। केरल, नार्थ ईस्ट, महाराष्ट्र समेत कुछ राज्यों को छोड़ दे वहां ये दर्ज नहीं होता, यूपी में ये आंकड़ा 35-40 के आसपास होगा। वो आगे कहते हैं, "दूसरी अहम बात है मेरे कई परिचितों ने बताया है कि कोरोना महाराष्ट्र के गांवों में फैल रहा है। मुंबई और पुणे में ये आंकड़े पिछले 15 दिनों में कम हुए है लेकिन गांवों में फैल रहा और वहां निपटने के इंतजाम नहीं, ये अधिकारी खुद मानते हैं।"

स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में एक मई तक कुल 1252324 पॉजिटिव केस सामने आये हैं, इनमें से 928971 लोग ठीक होकर घर जा चुके हैं जबकि 12570 लोगों की जान जा चुकी है।

गांव के हालात कैसे हैं, लोग जांच क्यों नहीं करवा रहे, जांच आसानी से हो रही है, इन सबके अलग-अलग जवाब और लोगों के अपने-अपने तर्क हैं लेकिन, दो कुछ चीजें बहुत सारे लोगों में बात करने पर सामान्य नजर आती हैं।

"गांव में पंचायत चुनाव और शादी बारातों ने काम खराब किया है। अभी तो कुछ नहीं है, असली तबाही तो 2 मई के बाद आई। आदमी देख रहा कि शहर कि खोपड़ी (सिर) पर मौत नाच रही है लेकिन अपनी हरकतन से बाज नहीं आ रहा है।" एक ग्रामीण इलाके के एक मेडिकल स्टोर संचालक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा।

यूपी में बाराबंकी जिले की सबसे बड़े ब्लॉक फतेहपुर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. एके वर्मा गांव में बुखार और कोविड के बारे में पूछने पर कहते, "कोविड के मामलों से जुड़े सवाल सीएमओ (जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी) साहब ही दे पाएंगे बाकी बुखार-खांसी का मामला है कि इस बार की अपेक्षा पिछली बार कुछ नहीं था। कई गांवों से लोग दवा लेने आते हैं। फिलहाल हमारे यहां 200 एक्टिव केस हैं।"

डॉ. वर्मा जिस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी हैं वहां 92 ग्राम पंचायतें आती हैं। यानि औसतन करीब 150 गांव शामिल हैं।

डॉ. वर्मा आखिर में कहते हैं, अगर सबकी जांच हो जाए तो आधे लोग कोरोना पॉजिटिव निकलेंगे।

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