बंगाल चुनाव परिणाम: मतदाताओं ने जताया नहीं, जिताया, क्या थी ज़मीनी हकीकत, जिससे हुआ परिवर्तन

Manish Mishra | May 04, 2026, 15:36 IST
Image credit : Gaon Connection Network
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के नतीजे चौंकाने वाले रहे। बीजेपी ने घुसपैठ, महिला सुरक्षा और केंद्र की योजनाओं को लागू करने जैसे मुद्दों को जनता तक पहुंचाया। टीएमसी के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे। राज्य में परिवर्तन की लहर दिखी। किसानों और चाय बागान मजदूरों के लिए बीजेपी ने सुविधाएं देने का वादा किया।

विधानसभा चुनाव तो पांच राज्यों में हो रहे थे लेकिन सबसे दिलचस्प मुकाबला पश्चिम बंगाल में दिखा। चुनावों की ग्राउंड कवरेज के दौरान जो एक पत्रकार के तौर पर हमने नार्थ बंगाल से लेकर साउथ बंगाल तक जो देखा उसमें बीजेपी और टीएमसी की कांटे की टक्कर थी। यहां के चुनाव परिणाम सभी को चौंका रहे हैं। राज्य की 293 सीटों में बीजेपी की 190 सीटों पर बढ़त दिखा रही है कि पार्टी अपना मैसेज आम जनता तक पहुंचाने में सफल रही। लेकिन वो क्या मुद्दे थे, जो बीजेपी अपने वोटरों तक पहुंचा पाई?



घुसपैठिए और गायों की तस्करी का मुद्दा

हमारी यात्रा सिलिगुड़ी से होकर सुंदरबन तक पहुंची, इसलिए उत्तर बंगाल से लेकर दक्षिण बंगाल तक के शहरों और गाँवों के लोगों से बात करके स्थानीय मुद्दों को जानने की कोशिश की। भारत और बांग्लादेश सीमा पर कई जगहों पर बाड़ न होने से घुसपैठिए और गायों की तस्करी का बड़ा मुद्दा उठाया गया। अपने संकल्प पत्र में बीजेपी ने कहा था कि घुसपैठ पर वो जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाएगी। घुसपैठिए बाहर किए जाएंगे। इसी से जुड़ा था एसआईआर का मुद्दा, जिसमें करीब 34 लाख लोग वोट नहीं डाल पाए। क्योंकि इससे जो नाम कटे उन्होंने काफी सीटों पर असर डाला। करीब 34 लाख लोग वोट नहीं डाल पाए, यह भी एक बहुत बड़ा मुद्दा था मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में। क्योंकि जो नाम कटे थे वह सबसे ज्यादा इन्हीं इलाकों से कटे थे और इसका जो असर था वह टीएमसी पर पड़ना था उन मुस्लिम बाहुल्य सीटों पर, जिसका लाभ टीएमसी को मिल रहा था।



महिला सुरक्षा

फिर बात आती है नारी सुरक्षा की, जो आरजीकर मेडिकल कॉलेज पीड़िता की मां को चुनाव लड़ाना हो, या संदेशखाली का मुद्दा उठाना, साथ ही चाय बागान की महिला मजदूरों की सुरक्षा की बात कही, बीजेपी ने महिला वोटरों को सुविधाएं देने के साथ ही इनमें सेंध लगाने की कोशिश की। ज़मीन पर जो दिखा एक तरह की एंटी इनकंबेंसी लोगों में थी, लोग खुलकर बोल नहीं रहे थे, लेकिन दबी जुबान में कहते थे कि परिवर्तन चाहिए। क्योंकि वहां का जो वोटर है, वो बड़ा साइलेंट रहता है। दूसरे राज्यों की तरह खुलकर चर्चा नहीं करता है, वोटर बहुत ही साइलेंट रहता है। टीएमसी नेताओं के खिलाफ करप्शन चार्ज भी खूब लगे। गौ-तस्करी आदि को आरोप टीएमसी को झेलने पड़े। साथ ही कानून-व्यवस्था को दुरुस्त किया जाएगा। आम लोग कानून-व्यवस्था से परेशान थे। कॉमन सिविल कोड को लागू करने की संकल्प पत्र में कही गई है। नीचे लोग



केंद्र की योजनाओं को लागू न करना पड़ा 'भारी'

  • पिछले 2021 के चुनावों की बात करें तो नॉर्थ बंगाल में बीजेपी को लीड मिली थी, लेकिन जो साउथ बंगाल में टीएमसी ने अच्छा प्रदर्शन किया था और टीएमसी को काफी अच्छी बढ़त मिली थी। इस बार भी लग रहा था कि टीएमसी अच्छा काम करेगी, लेकिन इस बार उसको नुकसान हुआ है। केंद्रीय योजनाओं को लाभ आम लोगों तक पहुंचाने के लिए जोर देकर कहा गया। सातवां वेतनमान लागू करने से लेकर केंद्रीय योजनाओं को लागू करने तक। मैंने खुद ग्राउंड पर देखा कि केंद्र की योजनाओं की पब्लिसिटी हमें नहीं दिखी। चाहे मनरेगा हो या दूसरी योजनाएं, वो ग्राउंड पर नहीं दिखी। बीजेपी ने बढ़-चढ़ कर बताया कि हम बंगाल के विकास की बात करेंगे। एक बंगाली को समझना एग्जिट पोल के बस की बात नहीं है। बंगाली को जो उसके मन में है, वो क्या दिखाएगा वो कोई नहीं जान सकता है क्योंकि बंगाल का वोटर बोलता कम है, करता ज्यादा है।
  • किसानों को सुविधा देने के लिए बंगाल में धान ₹3100/क्विंटल के हिसाब से खरीदने की बात कही। इसके लिए एक योजना लेकर के आएंगे और ताकि अभी किसानों को सस्ते दाम पर ना बेचना पड़े। और चाय बागान को जो महिला मजदूर हैं, उनकी मजदूरी बढ़ाने की बात की गई, जो अभी ₹250 मात्र है, उसे ₹500 करने की बात की गई। गाँवों में महिलाओं के बीच टीएमसी का क्रेज दिखा। महिलाओं ने कहा कि हमें सभी चीजे फ्री में मिल रही हैं, लेकिन परिणामों में बंगाल का विकास हावी दिखा। अंग्रेजों के ज़माने में आर्थिक और राजनैतिक राजधानी बंगाल में किसी ने औद्योगिक विकास की बात नहीं की। बंगाल में पहली बार भारतीय जनता पार्टी वहां पर अपने बलबूते सरकार बनाने जा रही है। अब देखना ये है कि ये जो डबल इंजन की सरकार बनेगी। वो कैसे अपना काम करती है?
  • पिछले चुनाव में चुनावी हिंसा काफ़ी हुई थी। पिछले चुनाव में सैकड़ों लोग मारे गए थे। मैं वहाँ पर जब पत्रकारों से मिल रहा था, एक वरिष्ठ पत्राकर ने कहा, वोट पड़ना और वोट डलवाना अलग है। अब देखते हैं कि चुनाव आयोग कैसे कर सकता है, चुनाव आयोग शुरुआत से ही एक्टिव था, राज्य में केंद्रीय बल तैनात किए गए। चुनाव पांच राज्यों में हो रहे थे, लेकिन पश्चिम बंगाल अपनी अस्मिता के लिए लड़ा।
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