होली की 200 साल पुरानी परंपरा: जहाँ टूट जाती हैं जाति-धर्म की दीवारें
Ashwani Kumar Dwivedi | Mar 24, 2024, 14:51 IST
जैदी मंजिल में गुझिया की महक, ढोलक और मजीरा की थाप पर भांग की ठंडाई में डूबे रंग बिरंगे होरियारो के 'बिरहा गीतों' की महफ़िल सजती है; जो एक दूसरे को गले लगकर होली मुबारक के साथ पूरी होती है।
होली की 200 साल पुरानी परंपरा: जहाँ टूट जाती हैं जाति-धर्म की दीवारें