Geeta Yadav

GUEST

Geeta Yadav

    हर एक महिला के मोबाइल में होने चाहिए ये ऐप्स
    हर एक महिला के मोबाइल में होने चाहिए ये ऐप्स

    By Geeta Yadav

    आए दिन महिलाओं के साथ हिंसा की खबरें आती रहती हैं, ऐसे में महिलाओं की सुरक्षा के लिए कई मोबाइल ऐप बनाए गए हैं, जिनकी मदद से आप भी खुद को सुरक्षित रख सकती हैं।

    आए दिन महिलाओं के साथ हिंसा की खबरें आती रहती हैं, ऐसे में महिलाओं की सुरक्षा के लिए कई मोबाइल ऐप बनाए गए हैं, जिनकी मदद से आप भी खुद को सुरक्षित रख सकती हैं।

    क्या सर्वाइकल कैंसर से जंग में संजीवनी बनेगी वैक्सीन?
    क्या सर्वाइकल कैंसर से जंग में संजीवनी बनेगी वैक्सीन?

    By Geeta Yadav

    दुनिया-भर में गर्भाशय-ग्रीवा कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं। हर आठ मिनट में, एक महिला की मौत हो रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का लक्ष्य 2050 तक सर्वाइकल कैंसर के 40 प्रतिशत तक मामलों को घटाना है। इसके तहत 2030 तक 15 साल की उम्र वाली 90 प्रतिशत लड़कियों को वैक्सीन देने का लक्ष्य रखा गया है।

    दुनिया-भर में गर्भाशय-ग्रीवा कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं। हर आठ मिनट में, एक महिला की मौत हो रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का लक्ष्य 2050 तक सर्वाइकल कैंसर के 40 प्रतिशत तक मामलों को घटाना है। इसके तहत 2030 तक 15 साल की उम्र वाली 90 प्रतिशत लड़कियों को वैक्सीन देने का लक्ष्य रखा गया है।

    क्या सर्वाइकल कैंसर से जंग में संजीवनी बनेगी वैक्सीन?
    क्या सर्वाइकल कैंसर से जंग में संजीवनी बनेगी वैक्सीन?

    By Geeta Yadav

    दुनिया-भर में गर्भाशय-ग्रीवा कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं। हर आठ मिनट में, एक महिला की मौत हो रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का लक्ष्य 2050 तक सर्वाइकल कैंसर के 40 प्रतिशत तक मामलों को घटाना है। इसके तहत 2030 तक 15 साल की उम्र वाली 90 प्रतिशत लड़कियों को वैक्सीन देने का लक्ष्य रखा गया है।

    दुनिया-भर में गर्भाशय-ग्रीवा कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं। हर आठ मिनट में, एक महिला की मौत हो रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का लक्ष्य 2050 तक सर्वाइकल कैंसर के 40 प्रतिशत तक मामलों को घटाना है। इसके तहत 2030 तक 15 साल की उम्र वाली 90 प्रतिशत लड़कियों को वैक्सीन देने का लक्ष्य रखा गया है।

    आने वाले समय में इस तरह से गायब हो जाएँगी नदियाँ
    आने वाले समय में इस तरह से गायब हो जाएँगी नदियाँ

    By Geeta Yadav

    देश की जीवनदायिनी नदियाँ आज प्रदूषण का शिकार हैं; कई नदियाँ मरणावस्था में पहुँच गई हैं, कुछ इंतज़ार में हैं। गँगा-यमुना जैसी बड़ी नदियों में फैले प्रदूषण को ख़त्म करने के लिए हज़ारों, करोड़ों रुपए की परियोजनाएँ चलाई जा रही हैं, जबकि सैकड़ों छोटी नदियाँ आज भी कराह रही हैं।

    देश की जीवनदायिनी नदियाँ आज प्रदूषण का शिकार हैं; कई नदियाँ मरणावस्था में पहुँच गई हैं, कुछ इंतज़ार में हैं। गँगा-यमुना जैसी बड़ी नदियों में फैले प्रदूषण को ख़त्म करने के लिए हज़ारों, करोड़ों रुपए की परियोजनाएँ चलाई जा रही हैं, जबकि सैकड़ों छोटी नदियाँ आज भी कराह रही हैं।

    सर्दियों में बढ़ जाते हैं ब्रेन स्ट्रोक के मामले, कहीं आप भी तो नहीं कर रहे हैं ये लापरवाही
    सर्दियों में बढ़ जाते हैं ब्रेन स्ट्रोक के मामले, कहीं आप भी तो नहीं कर रहे हैं ये लापरवाही

    By Geeta Yadav

    बदलती जीवन-शैली लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डाल रही है। देर से सोना, जल्दी जागना, तनाव में रहना, हाइपरटेंशन, अनियमित खान-पान, शराब और स्मोकिंग की वजह से मस्तिष्क आघात के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

    बदलती जीवन-शैली लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डाल रही है। देर से सोना, जल्दी जागना, तनाव में रहना, हाइपरटेंशन, अनियमित खान-पान, शराब और स्मोकिंग की वजह से मस्तिष्क आघात के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।