रंगीन शिमला मिर्च की बढ़ रही मार्केट में डिमांड, किसानों के लिए मुनाफे की खेती
रंगीन शिमला मिर्च आज किसानों के लिए कम समय में ज़्यादा मुनाफ़ा देने वाली फसल बन गई है। हरी, पीली और लाल शिमला मिर्च की बाज़ार में अच्छी मांग है और होटल, रेस्टोरेंट व शहरों में इसके अच्छे दाम मिलते हैं। सही मौसम, उपयुक्त मिट्टी और उन्नत किस्मों का चुनाव करके किसान खुले खेत या पॉलीहाउस में इसकी खेती कर सकते हैं।
आज के समय में रंगीन शिमला मिर्च किसानों के बीच तेज़ी से लोकप्रिय हो रही है। हरी, पीली और लाल रंग की शिमला मिर्च की बाज़ार में अच्छी मांग है। इसका इस्तेमाल घरों में सब्ज़ी, सलाद, फास्ट फ़ूड और पैकेट वाले खाने में खूब होता है। होटल, रेस्टोरेंट और शहरों के बाज़ारों में इसकी कीमत भी अच्छी मिल जाती है। खास बात यह है कि इसे खुले खेत के साथ-साथ पॉलीहाउस में भी उगाया जा सकता है, जिससे किसान कम समय में अच्छी आमदनी कर सकते हैं।
लखनऊ मोहनलालगंज के किसान बलविंदर सिंह बताते हैं कि रंगीन शिमला मिर्च स्वाद के साथ-साथ सेहत के लिए भी बहुत फ़ायदेमंद है। वो खुद पॉलीहाउस में रंगीन शिमला मिर्च की खेती करते हैं। बलविंदर सिंह बताते हैं कि इसकी डिमांड तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि ताज़ी शिमला मिर्च में विटामिन-ए और विटामिन-सी पाया जाता हैं। इसके अलावा इसमें कैल्शियम, मैग्नीशियम, फॉस्फ़ोरस और पोटैशियम जैसे ज़रूरी खनिज भी पाए जाते हैं। यही वजह है कि इसकी मांग हर साल बढ़ती जा रही है।
मौसम और मिट्टी का सही होना ज़रूरी
शिमला मिर्च की अच्छी फसल के लिए मौसम का सही होना बहुत ज़रूरी है। इसके लिए 20 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान सबसे अच्छा माना जाता है। बहुत ज़्यादा गर्मी, पाला या लगातार बारिश से फसल को नुकसान हो सकता है। जिन इलाकों में नमी मध्यम रहती है, वहाँ पौधे अच्छी तरह बढ़ते हैं।
बलविंदर सिंह का मानना है कि दोमट या बलुई दोमट मिट्टी शिमला मिर्च के लिए सबसे अचछी होती है। खेत में पानी निकास की सही व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि पानी जमा न हो। मिट्टी का पीएच मान 6.0 से 7.0 के बीच होना चाहिए। खेत तैयार करते समय इन बातों का ध्यान रखने से फसल अच्छी होती है।
अच्छी किस्म चुनना है सबसे अहम
बलविंदर सिंह ने बताया कि शिमला मिर्च की खेती में सही बीज का चयन बहुत ज़रूरी होता है। ज़्यादा उपज और अच्छी पैदावार वाले किस्मों का इस्तेमाल करना चाहिए। प्रमुख किस्मों में कैलिफ़ोर्निया वंडर (लाल), येलो वंडर (पीला), अरका गौरव (पीला), अरका मोहिनी (हरा) और अरका बसंत (पीला) शामिल हैं। ये किस्में किसानों में काफ़ी पसंद की जाती हैं। एक हेक्टेयर खेत के लिए लगभग 250 से 300 ग्राम बीज काफ़ी होता है। बीज को सीधे खेत में बोने के बजाय पहले नर्सरी तैयार करना ज़्यादा अच्छा रहता है।
पॉलीहाउस, नर्सरी और रोपाई का सही तरीका
बीज बोने से पहले बीजोपचार ज़रूर करें, इससे बीमारियों का खतरा कम हो जाता है। 25 से 30 दिन में पौधे रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं। इसके बाद खेत में 45×45 सेंटीमीटर की दूरी पर पौधों की रोपाई करें।
खेत तैयार करते समय 20 से 25 टन सड़ी हुई गोबर की खाद प्रति हेक्टेयर डालें। साथ ही 120 किलो नाइट्रोजन, 60 किलो फॉस्फ़ोरस और 60 किलो पोटाश दें। नाइट्रोजन को एक साथ देने के बजाय दो या तीन बार में देने से पौधे अच्छी तरह बढ़ते हैं।
सिंचाई और देखभाल से बढ़ेगी पैदावार
बलविंदर सिंह का कहना है कि गर्मियों में 6 से 7 दिन और सर्दियों में 10 से 12 दिन के अंतराल पर सिंचाई करनी चाहिए। खेत या फिर पॉलीहाउस जहाँ भी खेती कर रहे हों खरपतवार न बढ़ें, इसके लिए समय-समय पर देखभाल ज़रूरी है।
शिमला मिर्च की फसल में एफिड, थ्रिप्स और फलछेदक कीट नुकसान पहुँचा सकते हैं। इसके अलावा झुलसा, मोज़ेक और डैम्पिंग-ऑफ जैसी बीमारियाँ भी लग सकती हैं। इसलिए संतुलित खाद का प्रयोग करें और समय पर कीट-रोग नियंत्रण करें।
60–70 दिन में शुरू हो जाती है तुड़ाई
शिमला मिर्च की रोपाई के लगभग 60 से 70 दिन बाद तुड़ाई शुरू हो जाती है। एक बार तुड़ाई शुरू होने के बाद कई बार फल तोड़े जा सकते हैं। सामान्य हालात में एक हेक्टेयर खेत से 200 से 250 क्विंटल तक उपज मिल सकती है।
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