यूपी में गन्ने की खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार की बड़ी पहल
Gaon Connection | Feb 02, 2026, 17:51 IST
उत्तर प्रदेश सरकार गन्ने की खेती और चीनी उत्पादन को बढ़ाने के लिए लगातार कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी की अध्यक्षता में एक अहम बैठक हुई। इस बैठक में गन्ने की नई किस्मों को बढ़ावा देने, पुरानी किस्मों को बदलने, नई तकनीक अपनाने और गन्ना व चीनी की पैदावार बढ़ाने पर चर्चा की गई।
बलरामपुर चीनी मिल और उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद, शाहजहांपुर के बीच टिश्यू कल्चर तकनीक को बढ़ावा देने के लिए करार किया गया। इस तकनीक से रोग-मुक्त और बेहतर किस्म का गन्ना बीज तैयार किया जाएगा। इससे किसानों को जल्दी और अच्छी गुणवत्ता का बीज मिल सकेगा। टिश्यू कल्चर से ज्यादा मात्रा में शुद्ध और उन्नत बीज तैयार कर किसानों तक पहुंचाया जाएगा, जिससे नई किस्मों की उपलब्धता आसान होगी।
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए गन्ना विभाग ने उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के साथ भी समझौता किया है। इसके तहत महिला स्वयं सहायता समूहों को गन्ना बीज उत्पादन, नर्सरी तैयार करने, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, प्रेरणा कैंटीन, ड्रोन संचालन और अन्य कामों से जोड़ा जाएगा। इससे गांवों में महिलाओं को रोजगार मिलेगा और उनकी आमदनी बढ़ेगी। यह कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी मदद करेगा।
बैठक में गन्ने की कटाई और छिलाई के लिए इस्तेमाल होने वाली हार्वेस्टर मशीनों का प्रदर्शन भी किया गया। मजदूरों की कमी और बढ़ती खेती लागत को देखते हुए अब खेती में मशीनों का इस्तेमाल जरूरी हो गया है। इससे किसानों की मेहनत कम होगी और खर्च भी घटेगा। अलग-अलग कंपनियों ने हार्वेस्टर मशीनों के फायदे किसानों को बताए।
गन्ने की खेती के बेहतर विकास के लिए 30 सदस्यों का एक कोर ग्रुप बनाया गया है। इसमें मुख्य सचिव, गन्ना आयुक्त, विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, शोध विशेषज्ञ, चीनी मिलों के प्रतिनिधि और किसान प्रतिनिधि शामिल हैं। इस कोर ग्रुप की पहली बैठक लखनऊ में लाल बहादुर शास्त्री गन्ना किसान संस्थान में हुई।
बैठक में गन्ना मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रदेश की जलवायु के अनुसार अधिक पैदावार देने वाली, रोग-रोधी और अच्छी गुणवत्ता की गन्ना किस्मों को बढ़ावा दिया जाए। साथ ही पुरानी और कम उत्पादन देने वाली किस्मों को धीरे-धीरे हटाया जाए। उन्होंने कहा कि किसानों को समय पर पर्याप्त बीज मिलना चाहिए, ताकि खेती की लागत कम हो और उत्पादन बढ़े।
चीनी मिलों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे गन्ना विकास के लिए अलग से बजट खर्च करें। मौजूदा पेराई सत्र 2025-26 को ध्यान में रखते हुए मिलों को नई किस्मों के प्रसार, गन्ना उत्पादकता बढ़ाने, पेड़ी प्रबंधन, रोग-कीट नियंत्रण और पोषक तत्व प्रबंधन के लिए विस्तृत कार्ययोजना (माइक्रो प्लान) तैयार करनी होगी। इन योजनाओं पर समयबद्ध तरीके से काम करने और नियमित निगरानी के निर्देश भी दिए गए हैं।
यह कोर ग्रुप गन्ने की उन्नत किस्मों के प्रचार, टिश्यू कल्चर, रोग और कीट नियंत्रण, मिट्टी की सेहत सुधार, संतुलित खाद के उपयोग, खेती में मशीनीकरण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से सटीक खेती को बढ़ावा देने पर काम करेगा।
किसानों को सलाह दी गई है कि वे भूजल की बचत के लिए ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी माइक्रो-इरिगेशन तकनीक अपनाएं। साथ ही मिट्टी की जांच कराकर जैविक खादों का इस्तेमाल बढ़ाएं। गन्ने की खेती में मशीनों के उपयोग और मैकेनिकल हार्वेस्टिंग को भी बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है।
सरकार का कहना है कि इन सभी प्रयासों से गन्ना किसानों की आय बढ़ेगी, पैदावार और गुणवत्ता में सुधार होगा और उत्तर प्रदेश चीनी उत्पादन में और मजबूत बनेगा। इससे चीनी मिलों को भी बेहतर कच्चा माल मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए गन्ना विभाग ने उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के साथ भी समझौता किया है। इसके तहत महिला स्वयं सहायता समूहों को गन्ना बीज उत्पादन, नर्सरी तैयार करने, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, प्रेरणा कैंटीन, ड्रोन संचालन और अन्य कामों से जोड़ा जाएगा। इससे गांवों में महिलाओं को रोजगार मिलेगा और उनकी आमदनी बढ़ेगी। यह कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी मदद करेगा।
बैठक में गन्ने की कटाई और छिलाई के लिए इस्तेमाल होने वाली हार्वेस्टर मशीनों का प्रदर्शन भी किया गया। मजदूरों की कमी और बढ़ती खेती लागत को देखते हुए अब खेती में मशीनों का इस्तेमाल जरूरी हो गया है। इससे किसानों की मेहनत कम होगी और खर्च भी घटेगा। अलग-अलग कंपनियों ने हार्वेस्टर मशीनों के फायदे किसानों को बताए।
गन्ने की खेती के बेहतर विकास के लिए 30 सदस्यों का एक कोर ग्रुप बनाया गया है। इसमें मुख्य सचिव, गन्ना आयुक्त, विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, शोध विशेषज्ञ, चीनी मिलों के प्रतिनिधि और किसान प्रतिनिधि शामिल हैं। इस कोर ग्रुप की पहली बैठक लखनऊ में लाल बहादुर शास्त्री गन्ना किसान संस्थान में हुई।
बैठक में गन्ना मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रदेश की जलवायु के अनुसार अधिक पैदावार देने वाली, रोग-रोधी और अच्छी गुणवत्ता की गन्ना किस्मों को बढ़ावा दिया जाए। साथ ही पुरानी और कम उत्पादन देने वाली किस्मों को धीरे-धीरे हटाया जाए। उन्होंने कहा कि किसानों को समय पर पर्याप्त बीज मिलना चाहिए, ताकि खेती की लागत कम हो और उत्पादन बढ़े।
चीनी मिलों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे गन्ना विकास के लिए अलग से बजट खर्च करें। मौजूदा पेराई सत्र 2025-26 को ध्यान में रखते हुए मिलों को नई किस्मों के प्रसार, गन्ना उत्पादकता बढ़ाने, पेड़ी प्रबंधन, रोग-कीट नियंत्रण और पोषक तत्व प्रबंधन के लिए विस्तृत कार्ययोजना (माइक्रो प्लान) तैयार करनी होगी। इन योजनाओं पर समयबद्ध तरीके से काम करने और नियमित निगरानी के निर्देश भी दिए गए हैं।
यह कोर ग्रुप गन्ने की उन्नत किस्मों के प्रचार, टिश्यू कल्चर, रोग और कीट नियंत्रण, मिट्टी की सेहत सुधार, संतुलित खाद के उपयोग, खेती में मशीनीकरण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से सटीक खेती को बढ़ावा देने पर काम करेगा।
किसानों को सलाह दी गई है कि वे भूजल की बचत के लिए ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी माइक्रो-इरिगेशन तकनीक अपनाएं। साथ ही मिट्टी की जांच कराकर जैविक खादों का इस्तेमाल बढ़ाएं। गन्ने की खेती में मशीनों के उपयोग और मैकेनिकल हार्वेस्टिंग को भी बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है।
सरकार का कहना है कि इन सभी प्रयासों से गन्ना किसानों की आय बढ़ेगी, पैदावार और गुणवत्ता में सुधार होगा और उत्तर प्रदेश चीनी उत्पादन में और मजबूत बनेगा। इससे चीनी मिलों को भी बेहतर कच्चा माल मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।