पंजाब की हाइब्रिड धान बीजों पर रोक की मांग पर केंद्र बनाएगा समिति, खरीफ सीजन से पहले फैसले का इंतज़ार
केंद्र सरकार ने पंजाब सरकार की हाइब्रिड धान बीजों को डिनोटिफाई करने की मांग पर विचार के लिए एक विशेष समिति बनाने का आश्वासन दिया है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ बैठक में कहा कि राज्य की मांग की जांच के लिए समिति गठित की जाएगी। हालांकि, इस मुद्दे पर फैसला कब तक लिया जाएगा, इसे लेकर कोई समयसीमा तय नहीं की गई है। पंजाब सरकार चाहती है कि गैर-बासमती हाइब्रिड धान की किस्मों को तुरंत डिनोटिफाई किया जाए, ताकि आगामी खरीफ सीजन में किसान इन किस्मों की बुवाई न कर सकें। सूत्रों के मुताबिक राज्य सरकार का कहना है कि इन हाइब्रिड किस्मों से चावल की रिकवरी कम होती है और मिलिंग के दौरान दानों के टूटने की मात्रा ज्यादा रहती है।
पंजाब सरकार ने केंद्र को लिखा था पत्र
पंजाब ने हाल ही में केंद्र सरकार को पत्र लिखकर सभी गैर-बासमती हाइब्रिड धान किस्मों को डिनोटिफाई करने की मांग की थी। राज्य सरकार का कहना है कि मौजूदा कानून के तहत वह केवल उन्हीं बीजों की बिक्री पर रोक लगा सकती है, जिन्हें केंद्र द्वारा अधिसूचित नहीं किया गया हो। राज्य की मुख्य चिंता यह है कि कुछ हाइब्रिड धान किस्मों से 67 फीसदी चावल रिकवरी का मानक पूरा नहीं हो पा रहा है। मिलर्स को प्रोसेसिंग के बाद भारतीय खाद्य निगम (FCI) को तय मात्रा में चावल देना होता है।
हाईकोर्ट पहले रद्द कर चुका है प्रतिबंध
अगस्त 2025 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा अप्रैल 2024 में लगाए गए हाइब्रिड धान बीजों के प्रतिबंध को रद्द कर दिया था। हालांकि अदालत ने गैर-अधिसूचित किस्मों की बिक्री पर रोक लगाने की अनुमति दी थी। रिपोर्ट्स के अनुसार चूंकि ये बीज केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित हैं, इसलिए इनकी बिक्री पर रोक लगाने के लिए पहले डिनोटिफिकेशन जरूरी होगा।
ICAR ने क्या पाया?
मामले में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने भी जांच की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक 2015 के बाद जारी की गई 23 हाइब्रिड धान किस्मों की समीक्षा में पाया गया कि वे न्यूनतम मिलिंग मानकों पर खरी उतरती हैं। इसी कारण केंद्र सरकार इस मुद्दे पर सावधानी से आगे बढ़ रही है, क्योंकि बिना ठोस कानूनी आधार के किसी भी फैसले को बीज कंपनियां अदालत में चुनौती दे सकती हैं।
भगवंत मान ने रखीं कई अन्य मांगें
13 मई को हुई बैठक में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से खाद की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने, केंद्रीय बीज समिति में पंजाब को प्रतिनिधित्व देने और 2026-27 के लिए गेहूं बीज सब्सिडी आवंटन की भी मांग की। बैठक में भूजल संरक्षण, फसल विविधीकरण और कृषि से जुड़े कई अन्य मुद्दों पर भी चर्चा हुई। कृषि मंत्रालय के मुताबिक शिवराज सिंह चौहान ने पंजाब को कृषि और जल संरक्षण से जुड़ी योजनाओं में हरसंभव मदद का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि कपास, दलहन, तिलहन और बागवानी मिशन जैसी योजनाओं का लाभ पंजाब के कृषि क्षेत्र को मजबूत करने में दिया जाएगा।