यूपी में इस जगह बनेगा पहला बासमती & ऑर्गेनिक ट्रेनिंग सेंटर, एपीडा ने 70 साल के लिए ली ज़मीन, 5 लाख किसानों को मिलेगा फायदा

Gaon Connection | Apr 30, 2026, 14:37 IST
पीलीभीत में बासमती चावल और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। एपीडा, कृषि विभाग और यूपी सरकार के बीच 70 साल का समझौता हुआ है। टांडा बिजैसी में बासमती और ऑर्गेनिक ट्रेनिंग सेंटर व डेमो फार्म बनेगा। इससे किसानों को आधुनिक खेती सीखने का मौका मिलेगा।

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में बासमती चावल और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा), कृषि विभाग और यूपी सरकार के बीच 70 साल के पट्टे का समझौता हुआ है। इसके तहत टांडा बिजैसी क्षेत्र में बासमती और ऑर्गेनिक ट्रेनिंग सेंटर और डेमो फार्म बनाया जाएगा, जिससे किसानों को आधुनिक खेती सीखने का मौका मिलेगा।



7 एकड़ में बनेगा ट्रेनिंग सेंटर

यह केंद्र करीब 7 एकड़ जमीन पर विकसित होगा। यहां किसानों के लिए ट्रेनिंग हॉल, संग्रहालय, लैब, कॉन्फ्रेंस रूम और ऑर्गेनिक खेती से जुड़ी सामग्री रखने की सुविधा होगी। इस सेंटर के जरिए किसानों को नई तकनीक, बेहतर खेती के तरीके और एक्सपोर्ट से जुड़ी जानकारी दी जाएगी। साथ ही यह जगह कृषि विशेषज्ञों और छात्रों के लिए भी एक महत्वपूर्ण रिसोर्स सेंटर बनेगी।



देश का पहला बासमती-ऑर्गेनिक डेमो फार्म बनेगा

यह केंद्र खास इसलिए भी होगा क्योंकि यहां पारंपरिक और जैविक दोनों तरह की बासमती खेती का प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बनने से उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि पीलीभीत को बासमती उत्पादन का बड़ा केंद्र बनाया जा सकता है और इसमें किसानों की भागीदारी बढ़ाना जरूरी है।



AI तकनीक से होगा धान का सर्वे, 5 लाख किसानों को मिलेगा लाभ

इस मौके पर 2026-28 के लिए एआई आधारित बासमती धान सर्वे प्रोजेक्ट भी लॉन्च किया गया। यह परियोजना करीब 40 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करेगी और 1.5 लाख से ज्यादा सर्वे प्वाइंट्स से डेटा जुटाएगी। इससे 5 लाख से अधिक किसानों को फायदा होगा। इस तकनीक से फसल का सही आकलन, किस्मों की पहचान और बेहतर निर्यात योजना बनाने में मदद मिलेगी।



बासमती निर्यात में भारत मजबूत, नई किस्मों पर भी होगा काम

इस नए केंद्र को राष्ट्रीय स्तर के बासमती रिसर्च सेंटर (AICRP) के रूप में भी विकसित किया जाएगा। इससे नई किस्मों का परीक्षण और बेहतर उत्पादन पर काम होगा। भारत का बासमती चावल निर्यात 2025-26 में 5.67 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जिसकी मात्रा करीब 65 लाख मीट्रिक टन रही। एपीडा जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए ट्रेनिंग, सर्टिफिकेशन और बाजार से जोड़ने पर भी काम कर रहा है, जिससे किसानों को बेहतर कीमत मिल सके।

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