हीट-स्ट्रेस से सब्जियों की फसल पर संकट, मुरझा रहीं ये फसलें, कृषि विभाग ने किसानों के लिए जारी की एडवाइज़री
उत्तर प्रदेश में लगातार बढ़ रही गर्मी और तेज धूप के कारण सब्जियों की फसलें हीट-स्ट्रेस की चपेट में आ रही हैं। कृषि विभाग के अनुसार अत्यधिक तापमान की वजह से पौधों की वृद्धि प्रभावित हो रही है और फलों की गुणवत्ता लगातार घट रही है। टमाटर, मिर्च, बैंगन, खीरा और करेला जैसी फसलें सबसे ज्यादा प्रभावित बताई जा रही हैं।
क्या है समस्या?
कृषि विभाग के मुताबिक बढ़ती गर्मी के कारण सब्जियों की फसलें हीट-स्ट्रेस का सामना कर रही हैं। अधिक तापमान और पोषण की कमी से पौधों की वृद्धि प्रभावित हो रही है। इसके चलते फल छोटे, टेढ़े-मेढ़े और कम आकर्षक निकल रहे हैं, जबकि स्वाद और गुणवत्ता में भी गिरावट देखी जा रही है। विभाग ने बताया कि अत्यधिक गर्मी के कारण फसलों में विटामिन-सी और मिनरल्स की मात्रा भी कम हो रही है।
टमाटर, मिर्च और बैंगन समेत कई फसलें प्रभावित
कृषि विभाग के अनुसार टमाटर, मिर्च, बैंगन, खीरा और करेला जैसी फसलें हीट- स्ट्रेस से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही हैं। तेज गर्मी के कारण पौधों की पत्तियां झुलस रही हैं और कई जगह पौधे सूखने लगे हैं।
हीट-स्ट्रेस के कारण
विभाग के अनुसार 35 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान हीट-स्ट्रेस का सबसे बड़ा कारण है। इसके अलावा मिट्टी में नमी की कमी, असंतुलित पोषण, तेज धूप और गर्म हवाएं भी फसलों को नुकसान पहुंचा रही हैं। लगातार पड़ रही लू के कारण पौधों की पत्तियां झुलस रही हैं और कई जगह पौधे सूखने लगे हैं।
बचाव के उपाय
कृषि विभाग ने किसानों को सुबह या शाम के समय हल्की सिंचाई करने की सलाह दी है, ताकि मिट्टी में पर्याप्त नमी बनी रहे। खेतों में भूसा या प्लास्टिक से मल्चिंग करने को भी प्रभावी उपाय बताया गया है, जिससे मिट्टी का तापमान नियंत्रित रहता है और नमी लंबे समय तक बनी रहती है। फसलों को तेज धूप से बचाने के लिए 25 से 50 प्रतिशत ग्रीन नेट या शेड नेट लगाने की सलाह दी गई है। इसके अलावा समुद्री शैवाल, अमीनो एसिड, पोटाश और 1 प्रतिशत कैल्शियम नाइट्रेट का फोलियर स्प्रे करने से पौधों को हीट-स्ट्रेस से बचाया जा सकता है। कृषि विभाग ने माइकोराइजा और संतुलित पोषण के इस्तेमाल के साथ समय पर निराई-गुड़ाई और खरपतवार नियंत्रण करने की भी सलाह दी है।