पश्चिम एशिया संकट का असर, चाय बाजार में सुस्ती, लोकप्रिय ग्रेड की कीमतों में आई गिरावट
भारतीय चाय बाजार पर वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और घरेलू समस्याओं का सीधा असर दिखने लगा है। केरल के कोच्चि में हुई हालिया चाय नीलामी में खरीदारों के सतर्क रुख और कमजोर मांग के चलते चाय की लोकप्रिय श्रेणियों की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। इस मंदी के पीछे पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) का संकट और देश के भीतर एलपीजी (LPG) गैस की किल्लत को मुख्य वजह माना जा रहा है।
वैश्विक संकट और नई फसल का असर
चाय निर्यात के मोर्चे पर विशेष रूप से ऑर्थोडॉक्स लीफ टी (Orthodox Leaf Tea) की मांग काफी ठंडी रही। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण वहां के आयातकों ने फिलहाल नई खरीदारी टाल दी है। इसके अलावा, मिडल ईस्ट के खरीदार इस उम्मीद में भी 'वेट एंड वॉच' की नीति अपना रहे हैं कि आने वाले दिनों में कीमतें और कम हो सकती हैं। बाजार में नई फसल की आमद शुरू होने से भी कीमतों में और गिरावट आने के कयास लगाए जा रहे हैं।
घरेलू स्तर पर एलपीजी संकट ने बिगाड़ा खेल
केवल निर्यात ही नहीं बल्कि चाय की घरेलू खपत पर भी ब्रेक लगा है। व्यापारियों ने बताया कि हाल ही में हुई एलपीजी शॉर्टेज (रसोई गैस की किल्लत) के कारण कई होटल, रेस्तरां और सड़क किनारे चाय की दुकानें (ढाबे) बंद रहने को मजबूर हुए। इस वजह से स्थानीय बाजार में चायपत्ती की मांग में भारी कमी आई है।
डस्ट चाय ₹2 प्रति किलो तक सस्ती हुई
टी ट्रेड एसोसिएशन ऑफ कोचीन (TTAC) के अध्यक्ष अनिल जॉर्ज ने बाजार की स्थिति पर कहा, "अच्छी गुणवत्ता और कड़क स्वाद (लिकरिंग) वाली चाय की मांग बाजार में अब भी मजबूत है, लेकिन आम तौर पर पसंद किए जाने वाले लोकप्रिय ग्रेड्स की कीमतों में ₹1 से ₹2 प्रति किलोग्राम की गिरावट देखी गई है। खराब या दोयम दर्जे की चाय बेचने वालों पर इस समय सबसे ज्यादा दबाव है।"
नीलामी एजेंसी फोर्ब्स, इवार्ट एंड फिगिस के आंकड़ों के अनुसार, सीटीसी डस्ट (CTC Dust) का बाजार औसतन ₹2 प्रति किलोग्राम टूट गया है। इस बार नीलामी के लिए 5.98 लाख किलोग्राम से अधिक चाय पेश की गई थी, जिसमें से केवल 79% हिस्सा ही बिक सका। इस सप्ताह औसत कीमत ₹152.48 प्रति किलोग्राम रही, जो पिछले हफ्ते ₹154.91 थी। कुल बिक्री में से 70% हिस्सा बड़े ब्लेंडर्स (चाय कंपनियों) ने खरीदा।
ऑर्थोडॉक्स सेगमेंट का हाल
दूसरी ओर, ऑर्थोडॉक्स ग्रेड में करीब 1.96 लाख किलोग्राम चाय की पेशकश की गई। इसमें 'होल लीफ' और 'ब्रोकंस' की कीमतें तो मजबूत रहीं, लेकिन बाकी श्रेणियों में भाव काफी उतार-चढ़ाव भरे और कमजोर रहे। मांग इतनी कम थी कि कुछ व्यापारियों को अपनी चाय बिना बेचे ही वापस लेनी पड़ी। इस सेगमेंट को मध्य पूर्व और सीआईएस (CIS) देशों के निर्यातकों से केवल मामूली सहारा ही मिल सका।