गुड़-खांडसारी उद्योग को राहत, केंद्र सरकार ने वापस लिया शुगरकेन कंट्रोल ऑर्डर 2026 का ड्राफ्ट, जानें क्यों हो रहा था विरोध

Gaon Connection | May 30, 2026, 12:36 IST
केंद्र सरकार ने गन्ना किसानों और गुड़-खांडसारी उद्योग के विरोध के बाद शुगरकेन (कंट्रोल) ऑर्डर 2026 का ड्राफ्ट वापस ले लिया है। सरकार राज्यों और हितधारकों से मिले सुझावों पर नए सिरे से विचार करेगी। फिलहाल गन्ना नियंत्रण आदेश, 1966 के प्रावधान लागू रहेंगे। यह फैसला उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले किसानों की नाराजगी को देखते हुए लिया गया है।
सरकार ने रोके गन्ना नियमों में बदलाव

गन्ना किसानों, गुड़-खांडसारी उद्योग और चीनी मिल क्षेत्र के एक हिस्से के विरोध के बाद केंद्र सरकार ने शुगरकेन (कंट्रोल) ऑर्डर 2026 का ड्राफ्ट वापस ले लिया है। सरकार ने कहा है कि राज्यों और अन्य हितधारकों से प्राप्त सुझावों एवं आपत्तियों के आधार पर मसौदे की दोबारा समीक्षा की जाएगी। फिलहाल गन्ना नियंत्रण आदेश, 1966 के मौजूदा प्रावधान ही लागू रहेंगे। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने शुक्रवार को जारी आदेश में कहा कि विभिन्न राज्य सरकारों और हितधारकों से मिले सुझावों को देखते हुए ड्राफ्ट शुगरकेन (कंट्रोल) ऑर्डर, 2026 पर नए सिरे से विचार करना आवश्यक है। इसलिए प्रस्तावित मसौदे को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाता है।



क्यों हो रहा था विरोध?

सरकार ने अप्रैल में यह ड्राफ्ट जारी किया था और 20 मई तक इस पर सुझाव मांगे गए थे। लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश समेत कई गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में किसान संगठनों ने इसके कुछ प्रावधानों पर गंभीर आपत्तियां जताईं। सबसे बड़ा विवाद गुड़ और खांडसारी इकाइयों को विनियमित करने के प्रस्ताव को लेकर था। ड्राफ्ट में इन इकाइयों के लिए लाइसेंस अनिवार्य करने और किसानों को उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) के आधार पर भुगतान सुनिश्चित करने का प्रावधान रखा गया था। किसान संगठनों का कहना था कि इससे छोटे उत्पादकों और स्थानीय स्तर पर संचालित इकाइयों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा।



गन्ने की कीमत तय करने के फार्मूले पर भी सवाल

भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) समेत कई किसान संगठनों ने गन्ने का एफआरपी तय करने की मौजूदा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि चीनी मिलों की कमाई अब केवल चीनी तक सीमित नहीं है। एथेनॉल, कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG), शीरा (मोलासिस), बगास आधारित बिजली उत्पादन और प्रेसमड जैसे उत्पादों से भी मिलों को बड़ा राजस्व मिलता है। किसानों की मांग थी कि गन्ने का मूल्य तय करते समय इन अतिरिक्त आय स्रोतों को भी शामिल किया जाए ताकि किसानों को बेहतर कीमत मिल सके।



पश्चिमी यूपी में सबसे ज्यादा असर

मेरठ, मुजफ्फरनगर, बागपत, सहारनपुर, बिजनौर, अमरोहा और बरेली जैसे गन्ना उत्पादक जिलों में हजारों गुड़ और खांडसारी इकाइयां संचालित होती हैं। अनुमान है कि प्रत्येक प्रमुख गन्ना जिले में 2,000 से 3,000 तक ऐसी इकाइयां काम करती हैं। इन क्षेत्रों के किसानों और स्थानीय उद्योगों ने आशंका जताई थी कि नए नियम उनके कारोबार और आय दोनों को प्रभावित कर सकते हैं।



चुनावी राज्य में बड़ा मुद्दा बनने से पहले फैसला

सूत्रों के मुताबिक किसान संगठनों ने राष्ट्रीय लोकदल प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी से भी मुलाकात कर अपनी चिंताएं साझा की थीं। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले गन्ना किसानों की नाराजगी बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकती थी। ऐसे में केंद्र सरकार ने फिलहाल विवादित मसौदे को वापस लेने का फैसला किया। अब सरकार राज्यों, किसान संगठनों, चीनी उद्योग और अन्य हितधारकों से चर्चा के बाद संशोधित मसौदा तैयार कर सकती है।

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