मिडिल ईस्ट युद्ध का असर, भारत को DAP टेंडर में मिले 1100 डॉलर प्रति टन तक के ऑफर, खरीफ बुवाई से पहले बढ़ी टेंशन
मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध का असर अब भारत की खेती-किसानी पर भी दिखने लगा है। डीएपी (DAP) खाद की कीमतों में भारी उछाल आया है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत को हालिया वैश्विक टेंडर में 900 डॉलर प्रति टन से अधिक के भाव पर ऑफर मिले हैं। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब देश में खरीफ फसलों की बुवाई का मौसम नजदीक है और किसानों को बड़े पैमाने पर उर्वरकों की जरूरत पड़ने वाली है।
भारत को डीएपी के लिए मिले रिकॉर्ड महंगे ऑफर
ब्लूमबर्ग के अनुसार, इंडियन पोटाश लिमिटेड (IPL) द्वारा आयोजित टेंडर में डीएपी खाद के लिए 930 डॉलर से लेकर 1,100 डॉलर प्रति टन तक के ऑफर मिले। इस टेंडर में 18 कंपनियों ने हिस्सा लिया और करीब 23 लाख टन डीएपी की पेशकश की गई, जो मांगी गई मात्रा से लगभग दोगुनी थी। विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर फॉस्फेट उर्वरकों की लागत पर पड़ रहा है। दरअसल, सल्फर की वैश्विक सप्लाई का बड़ा हिस्सा उन्हीं देशों से आता है जो होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास स्थित हैं। सल्फर से ही वह एसिड तैयार किया जाता है जिसका इस्तेमाल फॉस्फेट उर्वरक बनाने में होता है।
युद्ध के बाद 30% से ज्यादा बढ़ीं कीमतें
ग्रीन मार्केट्स के आंकड़ों के मुताबिक सल्फर की कीमतें 2013 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं। वहीं आर्गस मीडिया ग्रुप के प्राइस डेटा के अनुसार, ईरान युद्ध शुरू होने के बाद भारत में फॉस्फेट उर्वरकों की कीमतें और ढुलाई लागत मिलाकर 30 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ चुकी हैं। भारत में फॉस्फेट उर्वरकों पर सरकार सब्सिडी देती है इसलिए फिलहाल किसान इन्हें खरीद पा रहे हैं लेकिन सवाल यह है कि क्या सरकार इतनी महंगी कीमतों का बोझ लंबे समय तक उठा पाएगी। हालांकि, सरकार पहले भी अतिरिक्त सब्सिडी का भार उठाती रही है और इस बार भी ऐसा हो सकता है।
खरीफ सीजन से पहले बढ़ी सरकार की चिंता
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मई महीने में होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान जारी रहता है, तो जुलाई-अगस्त में उर्वरकों की सप्लाई और महंगी हो सकती है। भारत साल के दूसरे हिस्से में सबसे ज्यादा डीएपी आयात करता है। इसी बीच भारत ने हाल ही में यूरिया के लिए भी 25 लाख टन का टेंडर जारी किया था जिसमें युद्ध से पहले की तुलना में लगभग दोगुनी कीमत चुकानी पड़ी। यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब देश में धान, मक्का और सोयाबीन जैसी खरीफ फसलों की बुवाई की तैयारी शुरू होने वाली है।