सूखे इलाकों में बढ़िया पैदावार देगी बाजरे की नई क़िस्म, बीमारियों से भी नहीं होगा नुकसान
बाजरे के इस नई क़िस्म को राजस्थान, गुजरात और हरियाणा जैसे राज्यों के असिंचित क्षेत्रों के लिए विकसित किया गया है। इसकी सबसे ख़ास बात इसमें कई तरह की बीमारियाँ नहीं लगती हैं और पक्षी भी नुकसान नहीं पहुँचाते हैं।
बाजरा उन फ़सलों में से है जो न केवल कम पानी, ज़्यादा गर्मी और बंजर जमीन पर भी उग जाती है, इसी वजह से सूखा प्रभावित इलाकों के लाखों किसान बाजरे की खेती करती हैं। ऐसे में बाजार किसानों के लिए एक और अच्छी खबर आई है, वैज्ञानिकों ने पहली बार Three-way बाजरा हाइब्रिड तैयार किया है, जो दूसरी क़िस्मों की तुलना में ज़्यादा पैदावार देता है।
अब तक किसान जो हाइब्रिड बाजरा बोते थे, वे दो किस्मों को मिलाकर बनाए जाते थे। लेकिन इस नई तकनीक में तीन अलग-अलग किस्मों के अच्छे गुणों को मिलाया गया है। इससे नया बाजरा पौधा ज्यादा ताकतवर बन गया है और मुश्किल मौसम में भी अच्छा उत्पादन देने में सक्षम है।
इस किस्म को ICRISAT ने आईसीएआर के राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान (RARI) के अखिल भारतीय समन्वित बाजरा सुधार परियोजना (AICRP) के सहयोग से विकसित किया है।
RARI के पादप प्रजनन और आनुवंशिकी विभाग के हेड डॉ. एसके जैन गाँव कनेक्शन से इस किस्म ख़ासियत के बार में बताते हैं, "इस किस्म को विकसित करने के लिए हमने एक्स्ट्रा बी लाइन का इस्तेमाल किया है, आमतौर पर किसी किस्म को विकसित करने के लिए ए-लाइन और आर-लाइन का क्रॉस करवा के F1 हाइब्रिड बनाते हैं, लेकिन इसमें हमने हमने एक्स्ट्रा बी लाइन इस्तेमाल किया है। ऐसे में इसमें इनमें तीन किस्मों की ख़ासियतें हैं।"
वो आगे बताते हैं, "ये किस्म उत्तर पश्चिमी राज्यों जैसे राजस्थान, गुजरात, हरियाणा के लिए विकसित की गई है, जहाँ 400 मिमी या उससे कम बारिश होती है। क्योंकि बाजरा की खेती ऐसे क्षेत्र में की जाती है जहाँ पानी की समस्या होती है, ऐसे में ये किस्म वहाँ बढ़िया उत्पादन देगी।
यही नहीं ये किस्म अर्ली मैच्योरिंग हाइब्रिड (early maturing hybrid) है, 74 दिनों में तैयार हो जाती है, दूसरा ये सूखा प्रतिरोधी भी मतलब सूखे को सहन कर सकता है क्योंकि कम पानी में हो रहा है।
कई ऐसे बीमारियाँ होती हैं, जो बाजरे की फ़सल को प्रभावित करती हैं, लेकिन RHB 273 किस्म में ब्लास्ट और डाउनी मिल्ड्यू जैसी बीमारियाँ नहीं लगती है। इससे औसत उत्पादन 2,230 किमी हेक्टेयर मिलता है जोकि दूसरी स्थानीय किस्मों की तुलना में 13–28% ज़्यादा है। इससे किसानों के सामने चारे की समस्या भी खत्म हो जाएगी। इसके बारे में कह सकते हैं कि इससे दोहरा लाभ मिलता है।
आमतौर पर बाजरे की फ़सल चिड़ियों की वजह से काफी प्रभावित होती है लेकिन इस किस्म की बालियों में राएँ बड़े आकार के होते हैं, जो इसे दूसरी किस्मों से अलग बनाती है, जिससे चिड़ियाँ इन्हें नुकसान नहीं पहुँचा पाती है।
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अगर इसकी पोषण गुणवत्ता की बात करें तो इसमें 45 पीपीएम (ppm) आयरन है और लगभग 35 पीपीएम जिंक है। और इसके अलावा प्रोटीन कंटेंट है 10.5% के आसपास और फैट कंटेंट भी अच्छा है।
डॉ. एसके जैन आगे बताते हैं, "अभी क्योंकि सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए अच्छी बाजरे की किस्म नहीं हैं, अभी तक ऐसे इलाकों में किसान HHB 67 किस्म की खेती करते आए हैं, ऐसे क्षेत्रों के लिए RHB 273 बढ़िया साबित होगी।"
यह नया हाइब्रिड सिर्फ लैब में नहीं बना है। वैज्ञानिकों ने इसे खेतों में किसानों के साथ मिलकर परखा है। अलग-अलग इलाकों में इसकी खेती करके देखा गया और जब अच्छे नतीजे मिले, तब इसे जारी किया गया।
आने वाले समय में जलवायु परिवर्तन के कारण खेती और ज्यादा चुनौतीपूर्ण होगी। ऐसे में ऐसी फसल किस्में जरूरी हैं जो कि मौसम के उतार-चढ़ाव को झेल सके, कम खर्च में ज्यादा उत्पादन दें और किसान को नुकसान से बचाएं।
Three-way हाइब्रिड क्या होता है?
सरल भाषा में समझें तो इसमें तीन तरह के बाजरा किस्मों के अच्छे गुण एक साथ जोड़े जाते हैं। इसका फायदा यह होता है कि नया पौधा, ज़्यादा मजबूत बनता है, सूखे और गर्मी को बेहतर सहन करता है, कीट-रोगों का असर कम झेलता है और अधिक पैदावार मिलती है। आसान भाषा में समझें तो कम जोखिम में ज़्यादा पैदावार मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
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