बारिश कम हुई तो भी नहीं होगा नुकसान? सरकार ने बनाया पूरा रोडमैप, शिवराज सिंह बोले- किसानों को नहीं होने देंगे घाटा
कमजोर मानसून और अल नीनो के संभावित असर के बीच केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन को लेकर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने साफ कहा है कि सरकार के लिए किसान हित सबसे ऊपर है और किसी भी चुनौती से निपटने के लिए पहले से रणनीति तैयार कर ली गई है। दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मौसम के अनुमान, जल उपलब्धता, फसलों की स्थिति, बीज और कृषि आदानों की व्यवस्था से लेकर राज्यों की तैयारियों तक हर पहलू पर विस्तार से चर्चा हुई। खास तौर पर संभावित अल नीनो प्रभाव और सामान्य से कम बारिश के संकेतों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने पहले से ही एक्शन प्लान तैयार करना शुरू कर दिया है, ताकि खेती और किसानों पर असर को सीमित रखा जा सके।
बैठक में क्या-क्या तय हुआ
समीक्षा बैठक में मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसानों से जुड़े हर जरूरी इंतजाम समय रहते पूरे कर लिए जाएं। इसमें बीज, उर्वरक, कीटनाशक जैसे कृषि आदानों की उपलब्धता के साथ-साथ राज्यों की तैयारी और फसल की स्थिति पर भी चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर काम करें ताकि किसी भी तरह की मौसम से जुड़ी समस्या का असर सीधे किसानों पर न पड़े। साथ ही यह भी कहा गया कि जिला स्तर तक योजनाएं तैयार रखी जाएं और जरूरत पड़ने पर तुरंत लागू की जा सकें।
मानसून और अल नीनो पर सरकार की नजर
बैठक में भारत मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान का भी जिक्र हुआ, जिसमें 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून के सामान्य से कम रहने और दीर्घकालीन औसत के करीब 92 प्रतिशत रहने की संभावना जताई गई है। साथ ही मानसून के दौरान अल नीनो की स्थिति बनने के संकेत भी दिए गए हैं, हालांकि अंतिम अपडेट मई के अंत में आएगा। इन संकेतों को देखते हुए सरकार ने पहले ही तैयारी शुरू कर दी है, ताकि बारिश कम रहने या मौसम बिगड़ने की स्थिति में भी खेती पर ज्यादा असर न पड़े।
पानी और तकनीक से राहत की उम्मीद
बैठक में यह भी सामने आया कि देश के जलाशयों में फिलहाल पानी की स्थिति अच्छी है और भंडारण सामान्य से करीब 127 प्रतिशत तक है। इसका सीधा फायदा खरीफ सीजन में मिलेगा, क्योंकि सिंचाई की जरूरतें पूरी करने में मदद मिलेगी और नमी की कमी का खतरा कम होगा। सरकार का मानना है कि बेहतर जल प्रबंधन, सूक्ष्म सिंचाई, आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक सलाह के जरिए संभावित अल नीनो के असर को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। पिछले वर्षों की तुलना में अब खेती ज्यादा तकनीक आधारित और लचीली हो चुकी है।
बैकअप प्लान और किसानों के लिए तैयारी
सरकार ने साफ किया है कि इस बार सिर्फ मानसून के भरोसे नहीं रहा जाएगा। राज्यों को निर्देश दिए गए हैं कि हर जिले में आकस्मिक योजनाएं तैयार रखें। किसानों को वैकल्पिक फसल विकल्प, देरी से बुवाई की रणनीति और सूखा-सहनशील किस्मों के बारे में पहले से जानकारी दी जाएगी। बीज की उपलब्धता जरूरत से ज्यादा रखी गई है और राष्ट्रीय बीज रिजर्व भी तैयार है, ताकि किसी भी स्थिति में तुरंत सहायता दी जा सके। सरकार का कहना है कि लगातार निगरानी, राज्यों के साथ समन्वय और समय पर फैसलों के जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि खेती प्रभावित न हो और किसानों का भरोसा बना रहे।