MP News: राजगढ़ में जैविक क्रांति; कलेक्टर ने कंधे पर पंप टांगकर दिया संदेश, जिले में खुलेंगे 13 बीआरसी केंद्र
जलवायु परिवर्तन, मिट्टी की घटती उर्वरता और रासायनिक खादों के बढ़ते दुष्प्रभाव के बीच मध्य प्रदेश का राजगढ़ जिला अब जैविक खेती की दिशा में बड़ा कदम बढ़ा रहा है। किसानों को रासायनिक खाद पर निर्भरता से बाहर निकालने के लिए प्रशासन ने जिलेभर में ‘बायो रिसोर्स सेंटर’ (BRC) शुरू करने की तैयारी तेज कर दी है। इन केंद्रों के जरिए गांव-गांव तक सस्ती दरों पर जैविक खाद और जैविक कीटनाशक पहुंचाए जाएंगे।
कलेक्टर ने खुद कंधे पर पंप टांगकर दिया संदेश
इस अभियान को लेकर जिला प्रशासन की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राजगढ़ कलेक्टर गिरीश कुमार मिश्रा खुद मैदान में उतर आए। हाल ही में उन्होंने कलेक्ट्रेट परिसर स्थित पार्क में कंधे पर स्प्रे पंप टांगकर जैविक लिक्विड का छिड़काव किया। कलेक्टर की इस पहल का उद्देश्य किसानों को यह संदेश देना था कि जैविक खेती केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि आने वाले समय की जरूरत है। प्रशासन का मानना है कि रासायनिक खेती से लगातार खराब हो रही जमीन को बचाने के लिए अब प्राकृतिक और जैविक खेती की ओर लौटना जरूरी हो गया है।
जिले के 6 ब्लॉकों में खुलेंगे 13 बीआरसी केंद्र
कृषि विभाग के उपसंचालक सचिन जैन ने बताया कि जिले के 6 विकासखंडों में कुल 13 बायो रिसोर्स सेंटर स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से 8 केंद्रों पर जैविक खाद और जैविक कीटनाशक बनाने का काम शुरू भी हो चुका है। इन केंद्रों पर किसानों को बेहद कम कीमत पर जैविक उत्पाद उपलब्ध कराए जाएंगे। विभाग के मुताबिक 5 लीटर जीवामृत, जो एक एकड़ खेत के लिए पर्याप्त होगा, उसकी कीमत 500 रुपये तय की गई है। वहीं नीमास्त्र की 2 लीटर मात्रा भी 500 रुपये में मिलेगी। इन जैविक लिक्विड खादों की खास बात यह है कि किसान इन्हें ड्रिप इरिगेशन और स्प्रिंकलर सिस्टम के जरिए आसानी से खेतों में इस्तेमाल कर सकेंगे। इससे मेहनत और लागत दोनों कम होंगी।
ऊंचाखेड़ा मॉडल बना चर्चा का केंद्र
ऊंचाखेड़ा बीआरसी केंद्र के संचालक युवराज सिंह ने बताया कि उन्हें शासन की ओर से एक लाख रुपये की अनुदान राशि मिली है। फिलहाल उनका केंद्र 2 हजार लीटर जैविक खाद और 800 लीटर जैविक पेस्टिसाइड तैयार करने के लक्ष्य पर काम कर रहा है। हालांकि उन्होंने जैविक खेती से जुड़ी चुनौतियों का भी जिक्र किया। युवराज सिंह के मुताबिक बड़े स्तर पर गौमूत्र एकत्र करना आसान नहीं है। इसके अलावा जैविक खेती के शुरुआती दौर में उत्पादन थोड़ा कम हो जाता है, जिससे कई किसान इस मॉडल को अपनाने से हिचकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार जैविक उत्पादों के लिए अलग और बेहतर मंडी रेट तय करे, तो किसान ज्यादा उत्साह के साथ जैविक खेती की ओर आगे बढ़ेंगे।
किसानों को मिलेगी बड़ी राहत
राजगढ़ में शुरू हो रहे बीआरसी केंद्र उन किसानों के लिए राहत लेकर आए हैं, जो जैविक खेती करना तो चाहते थे, लेकिन खाद और जैविक कीटनाशक तैयार करने की जटिल प्रक्रिया के कारण पीछे हट जाते थे। अब गांव स्तर पर तैयार उत्पाद आसानी से उपलब्ध होंगे। अब नजर इस बात पर रहेगी कि प्रशासन और सरकार किसानों की ‘उचित दाम’ की मांग को किस तरह पूरा करते हैं, क्योंकि जैविक खेती को बड़े स्तर पर सफल बनाने में बाजार और कीमत दोनों की अहम भूमिका मानी जा रही है।