खेती को मुनाफे का सौदा बनाने की तैयारी, खरीफ सीजन से पहले दिल्ली में जुटी ‘टीम एग्रीकल्चर’, शिवराज सिंह ने बताया रोडमैप
खरीफ सीजन 2026 शुरू होने से पहले केंद्र सरकार खेती को लेकर बड़े स्तर पर रणनीति बनाने में जुट गई है। नई दिल्ली के पूसा परिसर में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राष्ट्रीय खरीफ अभियान 2026 का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि देश में खाद्यान्न का पर्याप्त भंडार मौजूद है और इसके पीछे किसानों की मेहनत सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि सरकार खेती को सिर्फ उत्पादन तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि किसानों की कमाई बढ़ाने और खेती को टिकाऊ बनाने पर भी लगातार काम कर रही है।
रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन से सरकार उत्साहित
कृषि मंत्री ने कहा कि इस साल देश का अनुमानित खाद्यान्न उत्पादन 376 मिलियन टन से ज्यादा रहने का अनुमान है, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 5.3 फीसदी अधिक है। उन्होंने इसे किसानों की मेहनत, वैज्ञानिकों के शोध और सरकार की योजनाओं का संयुक्त परिणाम बताया। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि चावल उत्पादन के मामले में भारत अब दुनिया में पहले स्थान पर पहुंच गया है और इस मामले में चीन को पीछे छोड़ दिया है। गेहूं और मक्का उत्पादन में भी इस बार रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
हर राज्य की जरूरत के हिसाब से बनेगी खेती की रणनीति
सरकार अब खेती के लिए एक जैसी नीति लागू करने के बजाय क्षेत्रीय जरूरतों के हिसाब से रणनीति तैयार कर रही है। कृषि मंत्री ने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में जलवायु, मिट्टी और खेती की परिस्थितियां अलग हैं, इसलिए राज्यों के साथ मिलकर स्थानीय जरूरतों के मुताबिक योजना बनाई जा रही है। इसी दिशा में जयपुर, लखनऊ और भुवनेश्वर में क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन आयोजित किए जा चुके हैं। जल्द ही उत्तर-पूर्व और दक्षिण भारत में भी ऐसे सम्मेलन किए जाएंगे, ताकि किसानों की समस्याओं को जमीनी स्तर पर समझा जा सके।
दलहन-तिलहन और प्राकृतिक खेती पर रहेगा जोर
सम्मेलन में दलहन और तिलहन उत्पादन बढ़ाने को लेकर भी विशेष चर्चा हुई। सरकार चाहती है कि खाद्य तेल और दालों के लिए आयात पर निर्भरता कम हो और देश आत्मनिर्भर बने। इसके लिए बेहतर बीज, आधुनिक तकनीक और प्रोसेसिंग सुविधाओं को बढ़ावा देने की योजना बनाई जा रही है। इसके साथ ही प्राकृतिक खेती, ऑर्गेनिक फार्मिंग और इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल पर भी जोर दिया गया। सरकार का मानना है कि कम लागत वाली खेती ही छोटे किसानों के लिए ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकती है।
बदलते मौसम और मिट्टी की सेहत बनी बड़ी चुनौती
क्लाइमेट चेंज को लेकर भी सम्मेलन में चिंता जताई गई। कृषि मंत्री ने कहा कि अनियमित बारिश, बढ़ती गर्मी और मौसम में लगातार बदलाव का असर खेती पर साफ दिखाई दे रहा है। ऐसे में किसानों को मौसम के हिसाब से तैयार करना जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा कि मिट्टी की सेहत सुधारने और उर्वरकों के संतुलित इस्तेमाल पर भी सरकार फोकस कर रही है। कई किसान जरूरत से ज्यादा रासायनिक खाद का इस्तेमाल करते हैं, जिससे जमीन की उर्वरता प्रभावित होती है।
डिजिटल खेती और किसान डेटा पर सरकार का फोकस
सम्मेलन में डिजिटल एग्रीकल्चर, फार्मर आईडी, एग्री इंफ्रा फंड और एफपीओ को मजबूत बनाने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। सरकार का मानना है कि तकनीक के जरिए किसानों तक सही जानकारी और योजनाओं का लाभ तेजी से पहुंचाया जा सकता है। कृषि मंत्री ने कहा कि छोटे किसानों की आय बढ़ाने के लिए इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि किसान सिर्फ एक फसल पर निर्भर न रहें और उन्हें अतिरिक्त आमदनी के विकल्प भी मिल सकें।
खरीफ सीजन के लिए संयुक्त रोडमैप तैयार करेगी सरकार
दो दिवसीय सम्मेलन में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर तालमेल पर भी जोर दिया जा रहा है। सम्मेलन में आईसीएआर, कृषि संस्थानों और विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि खरीफ सीजन की तैयारियों को लेकर साझा रणनीति पर चर्चा कर रहे हैं। सरकार का लक्ष्य ऐसा रोडमैप तैयार करना है, जिससे खेती ज्यादा लाभकारी, टिकाऊ और जलवायु संकट के अनुकूल बन सके, साथ ही किसानों की आमदनी और उत्पादन दोनों में बढ़ोतरी हो।