कमजोर मानसून के अनुमान के बीच 1 जून से गाँव-गाँव पहुंचेंगी विशेषज्ञों की टीमें, जानिए क्या है सरकार का नया प्लान
आगामी खरीफ सीजन में अल नीनो के संभावित असर और देश के कई हिस्सों में पिछले एक दशक के सबसे कमजोर मानसून की आशंका के बीच केंद्र सरकार ने किसानों के लिए बड़ा कदम उठाया है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय 1 जून से देशव्यापी ‘सेव द फील्ड्स’ (खेत बचाओ) अभियान शुरू करने जा रहा है, जिसके तहत किसानों को फसल चयन, जल प्रबंधन, उर्वरक उपयोग और मौसम के अनुरूप खेती से जुड़ी सलाह दी जाएगी। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अभियान की तैयारियों की समीक्षा बैठक में कहा कि एक महीने तक चलने वाला यह अभियान किसानों को बदलते मौसम के जोखिमों को देखते हुए सही निर्णय लेने में मदद करेगा। इसके तहत किसानों को स्थानीय मौसम, मिट्टी और बाजार की परिस्थितियों के अनुरूप व्यावहारिक सलाह उपलब्ध कराई जाएगी।
अल नीनो और कमजोर मानसून को लेकर बढ़ी चिंता
यह अभियान ऐसे समय शुरू किया जा रहा है जब खरीफ बुवाई से पहले मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अल नीनो की स्थिति कई क्षेत्रों में वर्षा के वितरण को प्रभावित कर सकती है, जिससे फसल योजना और किसानों की आय पर असर पड़ सकता है। इसी बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने शुक्रवार को वर्ष 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून के अपने अनुमान को और घटा दिया। विभाग ने मानसून को अब दीर्घकालिक औसत (LPA) का 90 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है, जबकि पहले यह 92 प्रतिशत रहने की संभावना व्यक्त की गई थी। यदि यह अनुमान सही साबित होता है तो 2026 का मानसून पिछले एक दशक से अधिक समय में सबसे कमजोर मानसूनों में शामिल हो सकता है। इससे पहले वर्ष 2015 में देश में सामान्य से 12.7 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई थी।
क्या है एलपीए?
IMD के अनुसार देश में 1971 से 2020 के आंकड़ों के आधार पर मौसमी वर्षा का दीर्घकालिक औसत (LPA) 87 सेंटीमीटर है। किसी क्षेत्र में 30 से 50 वर्षों की औसत वर्षा को एलपीए कहा जाता है। मौसम विभाग का कहना है कि मानसून सीजन के दौरान अल नीनो विकसित होने के कारण वर्षा सामान्य से कम रह सकती है। हालांकि हिंद महासागर द्विध्रुव (Indian Ocean Dipole) के तटस्थ बने रहने की संभावना है। IMD के दूसरे चरण के पूर्वानुमान में कहा गया है कि पूर्वोत्तर भारत को छोड़कर देश के अधिकांश हिस्सों में इस वर्ष सामान्य वर्षा मिलने की संभावना नहीं है।
जलवायु अनुकूल खेती पर रहेगा जोर
कृषि मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि ‘सेव द फील्ड्स’ अभियान के दौरान किसानों को जलवायु अनुकूल खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। साथ ही उन्हें ऐसे कृषि निर्णयों से बचने की सलाह दी जाएगी जो जल संकट वाले क्षेत्रों में खेती के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। अभियान में फसल विविधीकरण, संसाधनों के कुशल उपयोग और संरक्षण आधारित कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने पर विशेष जोर रहेगा।
उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर भी फोकस
सरकार ने इस अभियान में संतुलित उर्वरक उपयोग को भी प्रमुख विषय बनाया है। शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि रासायनिक उर्वरकों, विशेषकर यूरिया के अत्यधिक उपयोग को कम करने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं। किसानों को मिट्टी परीक्षण आधारित पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने, संतुलित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग करने और हरी खाद, जैविक खाद तथा बायो-फर्टिलाइजर के उपयोग के लिए प्रेरित किया जाएगा। इसके साथ ही खेत स्तर पर इंटीग्रेटेड न्यूट्रिएंट मैनेजमेंट (INM) के प्रदर्शन भी आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि अभियान का मुख्य उद्देश्य खेतों को बचाना, खेती की लागत कम करना और किसानों तक समय पर सही सलाह पहुंचाना है।
1600 से अधिक टीमें किसानों तक पहुंचेंगी
अभियान को प्रभावी बनाने के लिए देशभर में 1600 से अधिक टीमों का गठन किया गया है। इनमें से 500 टीमें उन 100 जिलों में काम करेंगी जहां उर्वरकों की खपत अधिक है। इन टीमों में कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (AICRP) के वैज्ञानिकों के साथ कृषि विभाग के अधिकारी शामिल होंगे। इसके अलावा 1150 बहु-विषयक टीमें अन्य क्षेत्रों में भी किसानों के बीच काम करेंगी।
सरकारी योजनाओं का भी मिलेगा लाभ
अभियान के दौरान किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) और पीएम-किसान जैसी योजनाओं का लाभ लेने में भी सहायता दी जाएगी। साथ ही दलहन और तिलहन उत्पादन, ऑयल पाम खेती, कॉटन मिशन, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और जल संरक्षण जैसे विषयों पर भी जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इस अभियान को जन आंदोलन का स्वरूप देने के लिए मुख्यमंत्री, मंत्री, सांसद, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधियों का भी सहयोग लिया जाएगा।
मानसून की प्रगति जारी
इस बीच IMD ने बताया कि दक्षिण-पश्चिम मानसून अरब सागर, लक्षद्वीप, कोमोरिन क्षेत्र और बंगाल की खाड़ी के कई हिस्सों में आगे बढ़ चुका है। अगले चार से पांच दिनों में इसके केरल, तमिलनाडु और अन्य क्षेत्रों में और आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं।