₹22 से ₹2 प्रति किलो पर आया केले का भाव, निर्यात ठप, पश्चिम एशिया युद्ध ने महाराष्ट्र के किसानों को किया बेहाल
पश्चिम एशिया में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब सीधे किसानों की जेब पर दिखने लगा है। महाराष्ट्र के जलगांव और सोलापुर जैसे प्रमुख केला उत्पादक जिलों में इस सीजन में भारी आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। मिडिल ईस्ट देशों को निर्यात रुकने के कारण केले के कई कंटेनर कोल्ड स्टोरेज में फंसे हुए हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए तैयार फसल अब घरेलू बाजार में आ रही है, जिससे आपूर्ति बढ़ी और कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
कुछ ही महीनों में धराशायी हुए दाम
'इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के मुताबिक, स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि फरवरी में जहां किसानों को केले का भाव ₹18 से ₹22 प्रति किलो मिल रहा था, वहीं मार्च में यह घटकर ₹8-10 रह गया और अप्रैल में कीमतें गिरकर सिर्फ ₹2-3 प्रति किलो तक पहुंच गईं। सोलापुर के एक किसान ने 10 एकड़ में केले की खेती पर करीब ₹20 लाख का निवेश किया था, लेकिन अब मौजूदा कीमतों पर उन्हें केवल ₹2.5 से ₹3 लाख मिलने की उम्मीद है। यानी उन्हें करीब ₹17 लाख का सीधा नुकसान झेलना पड़ रहा है।
फसल नष्ट कर दूसरी खेती की तैयारी
लगातार गिरती कीमतों ने किसानों को बड़ा फैसला लेने पर मजबूर कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, बारामती के कई किसानों का कहना है कि मौजूदा हालात में केले की खेती घाटे का सौदा बन गई है, क्योंकि ट्रांसपोर्ट और मजदूरी का खर्च भी नहीं निकल पा रहा। ऐसे में कई किसान अपनी खड़ी फसल को रोटावेटर से मिट्टी में मिलाकर गन्ने जैसी दूसरी फसल उगाने की तैयारी कर रहे हैं।
बाजार में ऊंचे दाम, किसान को नहीं मिल रहा लाभ
इस पूरे संकट के बीच सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जहां उपभोक्ता बाजार में केले ₹50-60 प्रति किलो के भाव से बिक रहे हैं, वहीं किसानों को बेहद कम कीमत मिल रही है। लागत बढ़ने और आमदनी घटने के कारण किसान आर्थिक और मानसिक दोनों तरह के दबाव में हैं, जिससे यह संकट और गहराता जा रहा है।