ठंड, कोहरा और रोग: इस रबी सीज़न में किसान कैसे बचाएँ गेहूँ की खेती

Gaon Connection | Jan 05, 2026, 13:23 IST
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रबी मौसम 2025–26 में ठंड और कोहरे के बढ़ते असर ने गेहूं की खेती को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। ऐसे में किसानों के लिए सही समय पर सिंचाई, संतुलित खाद और रोग-कीट पर नज़र रखना बेहद ज़रूरी हो गया है।

<p>इस बार गेहूं में गलती पड़ी भारी: रबी सीजन के लिए वैज्ञानिक सलाह<br></p>
रबी मौसम 2025–26 में ठंड और कोहरे के बढ़ते असर ने गेहूं की खेती को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। ऐसे में किसानों के लिए सही समय पर सिंचाई, संतुलित खाद और रोग-कीट पर नज़र रखना बेहद ज़रूरी हो गया है।

इस साल रबी का मौसम थोड़ा अलग है। ठंड ज़्यादा है, कई इलाकों में कोहरा लंबे समय तक बना हुआ है और दिन में धूप कम निकल रही है। ऐसे मौसम में गेहूं की फसल पर रोग और कीट जल्दी हमला कर सकते हैं। इसलिए इस बार खेती में लापरवाही नहीं, बल्कि समय पर सही फैसला लेना ज़रूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए भारतीय गेहूँ एवं जौ अनुसंधान संस्थान (IIWBR) ने गेहूं के किसानों के लिए खास सलाह दी है।

सिंचाई को लेकर सबसे ज़रूरी बात

गेहूं की फसल में पानी सही समय पर देना सबसे अहम होता है। बुवाई के लगभग 20–25 दिन बाद पहली सिंचाई करनी चाहिए। यही समय होता है जब पौधे की जड़ें मज़बूत बनती हैं। इसके बाद जब पौधे में कल्ले निकलें, फिर बाल आने लगे और दाना भरने लगे, तब पानी की ज़रूरत पड़ती है। लेकिन ज़्यादा पानी देना भी नुकसान करता है। अगर खेत में पानी ज़्यादा देर तक खड़ा रहा तो जड़ सड़ने लगती है और रोग लगने का खतरा बढ़ जाता है। ठंड और कोहरे के दिनों में शाम के समय सिंचाई करने से बचना बेहतर रहता है।

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खाद कैसे डालें ताकि फसल मज़बूत बने

कई किसान सोचते हैं कि ज़्यादा यूरिया डालेंगे तो फसल ज़्यादा अच्छी होगी, लेकिन ऐसा नहीं है। बिना मिट्टी जांच के ज़्यादा खाद डालने से फसल कमजोर हो सकती है। बुवाई के समय थोड़ी खाद डालें और पहली सिंचाई के बाद नाइट्रोजन की अगली मात्रा दें। खाद हमेशा संतुलन में डालनी चाहिए, ताकि पौधा मजबूत बने और गिरने का खतरा न रहे।

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इस मौसम में कौन से रोग और कीट ज़्यादा नुकसान कर सकते हैं

ठंड और नमी के कारण पीला रतुआ नाम का रोग इस समय जल्दी फैलता है। इसमें गेहूं की पत्तियों पर पीली धारियाँ दिखने लगती हैं। अगर समय पर दवा न डाली जाए तो पूरी फसल खराब हो सकती है। इसी तरह माहू नाम का कीट पौधे का रस चूस लेता है, जिससे पौधा कमजोर हो जाता है। किसान भाइयों को चाहिए कि खेत में रोज़ नज़र रखें। बहुत ज़्यादा कीट दिखें तभी दवा का छिड़काव करें, बेवजह दवा डालने से खर्च बढ़ता है और फायदा कम होता है।

मौसम को देखकर खेती करें

अगर कोहरा बहुत घना हो या बारिश की संभावना हो तो दवा का छिड़काव न करें, क्योंकि ऐसी स्थिति में दवा ठीक से असर नहीं करती। खेत में पानी जमा न होने दें और अगर कोई पौधा बहुत ज़्यादा बीमार दिखे तो उसे खेत से निकाल देना बेहतर होता है। अपने इलाके के मौसम की जानकारी और कृषि विभाग की सलाह पर ध्यान देना भी फायदेमंद रहता है।

आखिर में किसानों के लिए सीधी सलाह

इस रबी मौसम में गेहूं की अच्छी पैदावार के लिए सबसे ज़रूरी है - समय पर सिंचाई, संतुलित खाद और खेत पर नियमित नज़र। मौसम बदल रहा है, इसलिए पुरानी आदतों से नहीं, बल्कि वैज्ञानिक सलाह से खेती करनी होगी। अगर किसान समय रहते छोटे-छोटे फैसले सही ले लें, तो फसल सुरक्षित रहेगी और पैदावार भी अच्छी मिलेगी।

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