राजस्थान में अब सिर्फ इस तारीख तक ही होगी MSP पर गेहूं की खरीद, सरकार ने घटाई अवधि, किसानों की बढ़ी चिंता
राजस्थान में एक ओर जहां बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से किसानों की गेहूं फसल प्रभावित हुई है, वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार द्वारा गेहूं खरीद की अवधि घटाने के फैसले ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के संशोधित निर्देशों के अनुसार रबी विपणन सत्र (RMS) 2026-27 में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं खरीद अब 16 मार्च से 31 मई 2026 तक ही की जाएगी, जबकि पहले यह अवधि 30 जून तक तय थी।
मौसम की मार के बीच कम हुई खरीद अवधि
राज्य में हाल के दिनों में हुई बारिश, आंधी और ओलावृष्टि के चलते गेहूं की फसल को भारी नुकसान हुआ है। ऐसे समय में जब किसान सरकारी खरीद पर निर्भर हैं, खरीद अवधि कम होने से उन्हें अपनी उपज बेचने के लिए कम समय मिलेगा। अभी तक अनाज में नमी और खराब मौसम के कारण खरीद की रफ्तार भी धीमी बनी हुई है।
पंजीकरण की नई अंतिम तिथि तय
सरकार ने किसानों के पंजीकरण की अंतिम तिथि 25 मई 2026 निर्धारित की है। सीमित समय में पंजीकरण और बिक्री के कारण खरीद केंद्रों पर भीड़ बढ़ने की आशंका है, जिससे किसानों को परेशानी हो सकती है।
गुणवत्ता मानकों में नहीं मिली राहत
बारिश और ओलावृष्टि के कारण गेहूं की गुणवत्ता प्रभावित हुई है। दाने सिकुड़ गए हैं और उनकी चमक कम हो गई है, लेकिन इसके बावजूद गुणवत्ता मानकों में कोई छूट नहीं दी गई है। इससे किसानों को अपनी फसल रिजेक्ट होने का डर सता रहा है।
सरकारी खरीद का लक्ष्य और व्यवस्था
रबी विपणन वर्ष 2026–27 के तहत राज्य में MSP पर गेहूं खरीद का कुल लक्ष्य 23 लाख मैट्रिक टन निर्धारित किया गया है। राजस्थान राज्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम लिमिटेड (RSFCSC) को हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर जिलों में 3,26,167 मैट्रिक टन गेहूं खरीद के लिए 14 खरीद केंद्र आवंटित किए गए हैं।
खरीद केंद्रों पर परिवहन व्यवस्था के लिए जिला स्तर पर निविदा प्रक्रिया जारी है। वहीं, लक्ष्य के 50% के लिए HDPE/PP बैग और पुराने जूट बैग की आपूर्ति हेतु निगम स्तर पर रेट कॉन्ट्रैक्ट प्रक्रिया भी चल रही है।
MSP और बोनस के बावजूद बढ़ी चिंता
सरकार ने गेहूं के लिए ₹2,585 प्रति क्विंटल MSP तय किया है और राज्य स्तर पर बोनस की भी घोषणा की गई है। बावजूद इसके, खरीद अवधि कम होने और सख्त शर्तों के चलते किसानों में चिंता बनी हुई है। कम समय में अधिक आवक होने से खरीद केंद्रों और भंडारण व्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।