नक्सल प्रभावित इस गाँव में कैसे एक बाँध ने सब कुछ बदल दिया है

Manoj Choudhary | Jun 08, 2024, 05:28 IST
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यहाँ के गाँवों के अधिकतर लोग या तो खेती करते हैं या फिर पलायन कर दूसरे शहरों और राज्यों में जाते हैं, लेकिन हाल ही में कुछ ऐसा हुआ जिससे अब लोगों को गाँव में काम मिलने लगा है।
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नक्सल प्रभावित इस गाँव में कैसे एक बाँध ने सब कुछ बदल दिया है
बारहवीं तक पढ़ाई करने के बाद सोनाराम सरदार अपने पिता की खेती में मदद करने लगे थे, क्योंकि उनके पास आगे पढ़ाई करने के पैसे नहीं थे, लेकिन आज अपने गाँव में ही सोनाराम पर्यटन मित्र बन गए हैं। सिर्फ सोनाराम ही नहीं उनके गाँव के कई लोगों को अब गाँव में ही काम मिल गया है।

आप सोच सकते हैं कि आखिर गाँव में ऐसा क्या हो गया? तो आपको दिल्ली से लगभग 1,375 किमी दूर झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम के बंदगाँव चलना होगा। यहाँ हर दिन पर्यटकों का जमावड़ा लगाता है। दरअसल पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन द्वारा पर्यटन को बढ़ावा दिए जाने से नक्सल प्रभावित बंदगांव प्रखंड के ग्रामीण युवाओं को कमाई का मौका मिल रहा है।

26 साल के सोनाराम सरदार गाँव कनेक्शन से बताते हैं, "नकटी डैम में पर्यटन को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों से मेरा जीवन बदल गया है; कुल 11 युवा अब अपने परिवारों की आर्थिक मदद कर रहे हैं, जो दिहाड़ी कर्मचारी के रूप में काम करने के लिए पलायन कर रहे थे, हुरंगदा और आसपास की पंचायतों के 10 गाँवों के युवा नकटी डैम में पर्यटन संबंधी गतिविधियों से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित हो रहे हैं।"

सोनाराम ने अब अपनी कमाई से कृषि उपकरण भी खरीद लिए हैं, जिससे उनके पिता की खेती में मदद हो सके। उनके छोटे भाई सरजू सरदार को आर्थिक तंगी के कारण मैट्रिक के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी थी, लेकिन अब सरजू ने इंटरमीडिएट में प्रवेश लिया और परिवार के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया।

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प्रशासन सारंडा और पोराहाट वन प्रमंडलों में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए परियोजनाओं का मसौदा तैयार कर रहा है। पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए नवंबर 2023 में, रांची से करीब 101 किलोमीटर दूर नकटी बाँध में नौकायन की सुविधा शुरू की गई थी।

वन, मत्स्य और पर्यटन विभाग ने जुलाई 2023 में 11 पर्यटन मित्रों को 15 दिनों का प्रशिक्षण देने के बाद नकटी डैम में 17 नावें उपलब्ध कराई हैं। ये युवा अब हर महीने 4,000 रुपये से अधिक कमा रहे हैं। पर्यटन मौसम के दौरान डैम पर फूड स्टॉल लगाकर कुछ महिलाएं भी आर्थिक रूप से स्वावलम्बी हो रही हैं।

पर्यटन से ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति में सुधार

हुरंगदा पंचायत की मैट्रिक पास नीता महतो और दो अन्य महिलाओं ने भी पर्यटन मौसम के दौरान बांध पर खाने-पीने के स्टॉल लगाकर कमाई शुरू कर दी है। सचिन गगराई, भोला गगराई, अनम बोदरा जैसे कई अन्य युवा इलाके में नौकायन और पर्यटन को बढ़ावा देने वाले अन्य कदमों से लाभान्वित हो रहे हैं।

टूरिस्टों को आकर्षित करने का प्रयास

बंदगांव से पश्चिमी सिंहभूम जिला परिषद की सदस्य बसंती कुमारी ने गाँव कनेक्शन से बताती हैं, "मत्स्य विभाग, पोराहाट वन प्रमंडल और पर्यटन विभाग, बांध पर सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए कदम उठा रहे हैं।"

उन्होंने आगे कहा, "वन विभाग ने पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए नवंबर 2023 में बांध पर एक पार्क बनाया है, बंदगांव प्रखंड नक्सल घटनाओं के लिए बदनाम है; पिछले कई महीनों से पुलिस पोराहाट वन क्षेत्रों में नियमित रूप से बमों को खोजकर निष्क्रिय कर रही है, ऐसी घटनाओं के बावजूद जिला प्रशासन ने नकटी बांध में पर्यटन को बढ़ावा देने और बेरोजगार युवाओं के लिए कमाई के अवसर पैदा करने के लिए सकारात्मक कदम उठाया है।"

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नकटी जलाशय विस्थापित मछली पालन स्वावलंबी सहयोग समिति के सदस्य नारदे मेलगांडी ने गाँव कनेक्शन को बताया कि हुरंगदा पंचायत के तहत तेंताईपाड़ा और आस-पास के गाँवों के करीब 150 परिवारों ने बांध निर्माण के लिए अपनी ज़मीन दी थी। मत्स्य विभाग की मदद से हुरंगदा और नकटी पंचायत के करीब 130 युवकों ने समिति बनाई और 2017 में मछली पकड़ने का काम शुरू किया।

“पहले हम सिर्फ परिवार के लिए मछलियाँ पकड़ते थे, बुनियादी सुविधाओं और पिंजरों की कमी के कारण 2023 तक करीब तीन साल के लिए मछली पकड़ना बंद कर दिया गया था। अब हमें इससे बेहतर कमाई की उम्मीद है क्योंकि प्रशासन नकटी बांध में रोज़गार के अवसरों पर विशेष ध्यान दे रहा है, "नारदे मेलगांडी ने कहा।

बड़े पैमाने पर मत्स्य पालन पर ध्यान

यहाँ के स्थानीय लोगों को मछली पालन से जोड़ा जा रहा है, जिससे उनकी कमाई हो सकती है। समिति के कोषाध्यक्ष बलबीर सेन ने कहा, मत्स्य विभाग ने बड़े पैमाने पर मत्स्य पालन शुरू करने के लिए पिछले साल छह पिंजरे उपलब्ध कराए थे। ग्रामीणों ने मछली पकड़ने के लिए 25 और पिंजरों की माँग की है। मछली पकड़ने के लिए विभाग ने हाल ही में मछली जीरा उपलब्ध कराया है।

बलबीर सेन ने आगे कहा, "बंदगांव में नक्सली खतरे के बावजूद हजारों पर्यटक आते हैं, क्योंकि पुलिस बांध में कानून-व्यवस्था पर विशेष ध्यान दे रही है।"

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पर्यटक स्थलों को बढ़ावा देने के लिए कदम

आने वाले समय में यहाँ और क्षेत्रों में पर्यटन स्थल बनाने का काम किया जा रहा है। जिले की पर्यटन नोडल अधिकारी रूपा रानी तिर्की गाँव कनेक्शन से बताती हैं, "पर्यटन विभाग पर्यटक स्थलों पर गेस्ट हाउस, सड़क, बस स्टैंड, बिजली, सफाई और अन्य सुविधाओं के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कर रहा है।"

"इस साल के अंत तक बेनीसागर, समीज आश्रम, हिरनी फॉल, नकटी डैम व थोलकोबाद में पर्यटकों के लिए बेहतरीन सुविधाएँ मुहैया करा दी जाएँगी; जिला पर्यटन संवर्धन परिषद जल्द ही विभिन्न पर्यटक स्थलों पर रोजगार सृजन के लिए नौकायन व अन्य गतिविधियाँ शुरू करने का निर्णय लेगी, "रूपा तिर्की ने आगे कहा।

बाँध के नाम और लाभार्थी पर विवाद

हुरंगदा पंचायत के युवाओं ने आरोप लगाया है कि बाँध के कारण विस्थापित हुए ग्रामीणों को नौकायन और मत्स्य पालन के उचित वित्तीय लाभ से वंचित किया जा रहा है।

हुरंगदा पंचायत के देवेंद्र नाग कहते हैं, "बाँध का नाम पड़ोसी नकटी पंचायत के नाम पर रखा गया है, जबकि यह हुरंगदा पंचायत में स्थित है, स्थानीय विस्थापित युवा बाँध का नाम बदलना चाहते हैं और कमाई के अवसरों में प्राथमिकता की माँग कर रहे हैं।"

तेंताईपाड़ा गाँव के गुरुचरण महतो ने कहा, "नकटी पंचायत के युवाओं को मत्स्य पालन और अन्य समितियों में ले लिया गया है, जबकि हुरंगदा पंचायत के निवासियों को वंचित किया गया है।"

उन्होंने आगे कहा, "स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन को इस अन्याय के बारे में सूचित किया है और बांध का नाम बदलने और विस्थापित परिवारों के युवाओं को उचित रोजगार के मौके प्रदान करने की अपील की है।"

समिति के कोषाध्यक्ष बलबीर सेन बताते हैं, " बांध हुरंगदा पंचायत के अंतर्गत स्थित है, लेकिन आसपास के सभी गाँवों के युवाओं का इस पर समान अधिकार है; हुरंगदा सहित बंदगांव की तमाम पंचायतों के युवाओं को मत्स्य पालन और अन्य समितियों में शामिल किया गया है।"

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