एक-एक कर मरने लगीं मुर्गियां, महाराष्ट्र के इस ‘अंडों के शहर’ में फिर फैला बर्ड फ्लू, मारी गईं 2 लाख मुर्गियां, किसान बोले- अब संभल पाना मुश्किल
महाराष्ट्र के नवापुर में एक बार फिर बर्ड फ्लू फैल गया है। The Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक 2 लाख से ज्यादा मुर्गियों को मारा जा चुका है और लाखों अंडे नष्ट किए गए हैं। लाखों अंडे मिट्टी में दबा दिए गए, हजारों टन चारा फेंक दिया गया और पोल्ट्री कारोबार से जुड़े लोग अब भविष्य को लेकर डरे हुए हैं। लगातार तीसरी बार फैले बर्ड फ्लू से पोल्ट्री कारोबारियों को करोड़ों का नुकसान हुआ है और कई किसान अब इस कारोबार को छोड़ने की बात कह रहे हैं।
12 अप्रैल से शुरू हुई मौतों की श्रृंखला
रिपोर्ट के मुताबिक, 12 अप्रैल 2026 को नवापुर के कई पोल्ट्री फार्मों में अचानक मुर्गियों की मौत शुरू हुई। शुरुआत में किसानों ने इसे गर्मी का असर माना लेकिन कुछ ही घंटों में मौतों की संख्या तेजी से बढ़ने लगी। 26 अप्रैल को नमूने जांच के लिए भोपाल स्थित हाई सिक्योरिटी एनिमल डिजीज इंस्टीट्यूट भेजे गए जहां एवियन इन्फ्लुएंजा की पुष्टि हुई। इसके बाद 30 अप्रैल को जिला प्रशासन ने कई इलाकों को संक्रमित और निगरानी क्षेत्र घोषित कर दिया।
90 दिन तक रहेगा प्रतिबंध
प्रशासन ने बर्ड फ्लू के केंद्र से 1 किलोमीटर क्षेत्र को संक्रमित और 10 किलोमीटर तक के इलाके को निगरानी जोन बनाया है। पोल्ट्री, अंडों और उससे जुड़े सामान की बिक्री व आवाजाही पर 90 दिनों के लिए रोक लगा दी गई है। पुलिस को निगरानी के लिए तैनात किया गया है। 5 मई तक 2 लाख से ज्यादा पक्षियों को मारा जा चुका था, जबकि करीब 8 लाख अंडे और 210 मीट्रिक टन चारा नष्ट किया गया।
2006 और 2021 में भी आई थी तबाही
नवापुर इससे पहले 2006 और 2021 में भी बर्ड फ्लू की चपेट में आ चुका है। साल 2006 में करीब 10 लाख पक्षियों और 14 लाख अंडों को नष्ट किया गया था। वहीं 2021 में करीब 9 लाख पक्षियों और 60 लाख अंडों को खत्म करना पड़ा था। लगातार फैलते संक्रमण ने यहां के पोल्ट्री कारोबार को कमजोर कर दिया है। कई फार्म बंद हो चुके हैं और कई कारोबारी अब इस व्यवसाय से बाहर निकल रहे हैं।
मुआवजे से ज्यादा हो रहा नुकसान
रिपोर्ट के मुताबिक किसानों का कहना है कि एक मुर्गी को तैयार करने में करीब 500 रुपये खर्च होते हैं जबकि सरकार सिर्फ 140 रुपये मुआवजा देती है। 2006 में यह मुआवजा 20 से 40 रुपये था जिसे 2021 के बाद बढ़ाकर 90 रुपये और फिर 2024 में 140 रुपये किया गया। किसानों की मांग है कि कम से कम 450 रुपये प्रति पक्षी मुआवजा मिलना चाहिए। उनका कहना है कि सफाई, दवा और मजदूरी का खर्च भी उन्हें खुद उठाना पड़ता है।
नई पीढ़ी छोड़ रही पोल्ट्री कारोबार
लगातार घाटे और बर्ड फ्लू के डर ने नई पीढ़ी को पोल्ट्री व्यवसाय से दूर कर दिया है। कई किसान अब गन्ना, सोयाबीन जैसी खेती या दूसरे कारोबार की ओर जा रहे हैं। किसानों ने सरकार से स्थायी समाधान और एवियन इन्फ्लुएंजा के खिलाफ प्रभावी वैक्सीन की मांग की है। फिलहाल नवापुर के कई पोल्ट्री फार्मों के बाहर “बर्ड फ्लू प्रतिबंधित क्षेत्र, प्रवेश निषेध” के बोर्ड लगे हैं और जुलाई 2026 तक इलाके में सख्त निगरानी जारी रहेगी।