भारत में समुद्री मछली उत्पादन 3% बढ़ा, गुजरात को पछाड़ टॉप पर पहुंचा यह राज्य, जानें कौनसी मछली सबसे ज़्यादा पकड़ी गई
भारत में समुद्री मछली उत्पादन में वर्ष 2025 के दौरान हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आईसीएआर- केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (CMFRI) के आकलन के अनुसार देश में कुल समुद्री मछली उत्पादन 35.7 लाख टन तक पहुंच गया जो 2024 के मुकाबले लगभग 3 प्रतिशत अधिक है। इस दौरान बाजार में मांग और विपणन व्यवस्था में सुधार के कारण इस क्षेत्र का आर्थिक मूल्य भी तेजी से बढ़ा है। CMFRI के मत्स्य संसाधन मूल्यांकन, अर्थशास्त्र और विस्तार प्रभाग ने देशभर में समुद्री मछली उत्पादन का आकलन अपने ऑनलाइन डेटा संग्रह प्रणाली के माध्यम से किया है जिससे यह विस्तृत रिपोर्ट तैयार की गई है।
तमिलनाडु सबसे आगे
रिपोर्ट के मुताबिक तमिलनाडु 6.85 लाख टन उत्पादन के साथ देश में पहले स्थान पर पहुंच गया है जबकि गुजरात 15 प्रतिशत गिरावट के चलते दूसरे स्थान पर आ गया है। यह गिरावट खराब मौसम, लंबी मछली पकड़ने पर पाबंदी और चक्रवाती गतिविधियों के कारण हुई है। केरल तीसरे स्थान पर बना रहा, जहां उत्पादन में मामूली 2 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई।
मैकेरल रही सबसे ज्यादा पकड़ी गई मछली
CMFRI के वार्षिक आंकड़ों के अनुसार भारतीय मैकेरल 2.70 लाख टन के साथ सबसे ज्यादा पकड़ी गई मछली रही। इसके बाद सेफालोपोड्स (2.57 लाख टन) और ऑयल सार्डिन (2.53 लाख टन) का स्थान रहा। सेफालोपोड्स में 25 प्रतिशत और थ्रेडफिन ब्रीम्स में 55 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो पिछले एक दशक का उच्च स्तर है। कुल पकड़ में पेलाजिक मछलियों की हिस्सेदारी 54 प्रतिशत रही, जबकि डेमर्सल, क्रस्टेशियंस और मोलस्क भी महत्वपूर्ण हिस्सेदारी में रहे।
कर्नाटक और महाराष्ट्र में तेज वृद्धि
राज्यों के स्तर पर कर्नाटक में 2024 की गिरावट के बाद 2025 में 44 प्रतिशत की बड़ी वृद्धि दर्ज की गई जबकि महाराष्ट्र में 18 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। CMFRI के निदेशक डॉ. ग्रिन्सन जॉर्ज के अनुसार अनुकूल पर्यावरणीय परिस्थितियों और नियंत्रित मछली पकड़ने के दबाव ने छोटी पेलाजिक मछलियों के भंडार को पुनर्जीवित करने में अहम भूमिका निभाई।
बाजार में मांग मजबूत
देशभर के लैंडिंग सेंटरों पर समुद्री मछलियों से लगभग 69,254 करोड़ रुपये (10.45% वृद्धि) का कारोबार हुआ, जबकि खुदरा स्तर पर यह आंकड़ा 97,702 करोड़ रुपये (8.43% वृद्धि) तक पहुंच गया। इससे साफ है कि बाजार में मांग मजबूत बनी हुई है। राष्ट्रीय स्तर पर मार्केटिंग दक्षता 70.88 प्रतिशत रही, जिसमें केरल 72.83 प्रतिशत के साथ सबसे आगे रहा।